हमीरपुर में किसानों ने बंजर भूमि में लहलहाई जादुई फूलों की खेती
परम्परागत खेती के साथ जादुई फूलों की खेती से किसान हर साल ले रहे बड़ा मुनाफा हमीरपुर, 20 नवम्बर (हि.स
फोटो-20एचएएम-2 हमीरपुर में किसानों ने बंजर भूमि में लहलहाई जादुई फूलों की खेती


परम्परागत खेती के साथ जादुई फूलों की खेती से किसान हर साल ले रहे बड़ा मुनाफा

हमीरपुर, 20 नवम्बर (हि.स.)। हमीरपुर समेत समूचे बुन्देलखंड क्षेत्र में इस बार किसानों ने बंजर भूमि में जादुई फूलों की खेती शुरू की है। परम्परागत खेती के साथ जादुई फूलों की खेती से किसान हर साल बड़ा मुनाफा भी ले रहे है इसीलिए इसकी खेती का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है। जादुई फूलों की डिमांड भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में ज्यादा होने से किसानों के साथ अब ईट भट्ठे में काम करने वाले मजदूरों ने भी इसकी खेती से अपनी किस्मत चमकाने की तैयारी की है।

हमीरपुर जिले के मुस्करा क्षेत्र के चिल्ली गांव में चालीस फीसदी से ज्यादा किसानों ने परम्परागत खेती के साथ जादुई फूलों की पौध फालतू जमीन पर लगाए है। जादुई फूल को कैमोमाइल भी कहा जाता है जिसमें अगले महीने फूल खिलेंगे। हमीरपुर में काफी समय तक रहे अपर मुख्य अधिकारी धर्मजीत त्रिपाठी ने बताया कि बुन्देलखंड क्षेत्र के झांसी के चार ब्लाकों के तमाम गांवों में किसान जादुई फूलों की खेती कर रहे है। वहीं हमीरपुर के अलावा चित्रकूट, और आसपास के इलाकों में भी किसानों में इसकी खेती के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है। बताया कि कैमोमाइल (जादुई फूल) निकोटीन रहित होता है। ये पेट सम्बन्धी बीमारी के लिये बड़ा ही कारगर साबित होता है।

बताया कि इन फूलों का सौन्दर्य प्रसाधन में इस्तेमाल होता है। चिल्ली गांव में इस फूल की खेती करने वाले रघुवीर सिंह का कहना है कि जादुई फूलों की मांग आयुर्वेद कम्पनी में ज्यादा होने से अब यहां किसानों ने इसका खेती का दायरा बढ़ाया है। बताया कि एक एकड़ भूमि में पांच क्विंटल तक जादुई फूल मिलते है जो घर बैठे बिक जाते है। जिला उद्यान अधिकारी रमेश चन्द्र पाठक ने बताया कि जादुई फूल को कैमोमाइल कहते है। ये मेडिसन है जिसकी डिमांड आयुर्वेदिक चिकित्सा में ज्यादा है। बताया कि इसकी खेती हमीरपुर में इस बार किसान कर रहे है।

जादुई फूलों की खेती से किसानों की बदली तकदीर

जादुई फूलों की खेती को बढ़ावा देने वाले प्रगतिशील किसान रघुवीर सिंह ने बताया कि चिल्ली गांव में ही इस बार इसकी खेती एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में शुरू की गई है। जादुई फूलों के पौध खेतों में लगाए जा चुके है। चिल्ली गांव में ही कभी ईट भट्टों में मजदूरी करने वाले मदन पाल, श्यामलाल सहित तमाम मजदूरों ने भी इसकी खेती शुरू कर दी है। जादुई फूलों की खेती से ही हर साल लाखों रुपये का मुनाफा भी ये किसान ले रहे है।

जादुई फूलों की खेती से मिलता है पांच गुना मुनाफा

मुस्करा क्षेत्र के चिल्ली गांव निवासी रघुवीर सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि गांव में चालीस फीसदी से ज्यादा लोग इसकी खेती कर रहे है। इसके अलावा राठ और गोहांड क्षेत्र के तमाम गांवों में भी तीन सैकड़ा से अधिक किसान परम्परागत खेती के साथ जादुई फूलों की खेती कर रहे है। इसकी खेती में करीब दस हजार रुपये की लागत आती है लेकिन मुनाफा पांच गुना होता है। एक हेक्टेयर में करीब बारह क्विंटल जादुई के फूल होते है।

अल्सर बीमारी के लिए है रामबाण है जादुई फूल

जादुई फूलों की खेती चार पांच महीने में तैयार होती है। राजस्थान व एमपी समेत कई राज्यों के व्यापारी इसे खरीदने यहां आते है। यहां के वैद्य दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि इसके फूल पेट सम्बन्धी बीमारी में रामबाण है। इसके फूल सुखाकर नियमित चाय पीने से अल्सर रोग ठीक हो जाता है। आयुर्वेदिक डाँ.आत्म प्रकाश ने बताया कि जादुई फूल से होम्योपैथिक में बहुत दवाएं बनती है। जिनसे असाध्य बीमारी का इलाज होता है।

हिन्दुस्थान समाचार/पंकज/


 rajesh pande