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शिक्षकों की शासकीय हत्या कराना चाहती है बिहार सरकार, वापस ले आदेश : गोपगुट
बेगूसराय, 29 जनवरी (हि.स.)। बिहार सरकार द्वारा शराब माफियाओं, शराब के कारोबार में संलग्न एवं शराब का
आदेश पत्र जलाते शिक्षक


बेगूसराय, 29 जनवरी (हि.स.)। बिहार सरकार द्वारा शराब माफियाओं, शराब के कारोबार में संलग्न एवं शराब का सेवन करने वाले व्यक्तियों की पहचान करने के लिए नियुक्त करने का आदेश दिए जाने से शिक्षकों में काफी आक्रोश है। शिक्षक संगठनों ने आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के साथ क्रूर मजाक बताया है। संगठनों ने सरकार से पूछा है कि क्या पुलिस तंत्र और खुफिया विभाग फेल कर गया है जो इस प्रकार का आदेश निर्गत किया। सरकार शिक्षकों को पढ़ाने का काम करने भी देगी या ऐसे ही आदेशो में उलझाकर बच्चों को शिक्षा से दूर कर देगी।

टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोपगुट) ने शनिवार को समाहरणालय के समीप निर्गत पत्र जलाकर विरोध किया है। संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार मिश्र ने कहा कि शिक्षा विभाग के आला अधिकारी द्वारा जारी किया गया पत्र शिक्षा का अधिकार अधिनियम एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की खुलेआम अवहेलना है, जिसमे यह अंकित है कि शिक्षकों को जनगणना, आपदा एवं निर्वाचन के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य में नही लगाया जा सकता है। आदेश में यह भी अंकित है कि जानकारी देने वालो का नाम गुप्त रखा जाएगा, लेकिन बिहार के सत्येंद्र दुबे जैसे ईमानदार अभियंता का नाम जब प्रधानमंत्री कार्यालय से लीक हो जाता है, उनकी हत्या तक हो जाती है तो इसकी क्या गारंटी है कि शिक्षकों का नाम लीक नहीं होगा। हम बिहार में शिक्षक के रूप में पदस्थापित हुए है और हमारा काम है बच्चों को शिक्षा देना, ना कि ऐसे उलूल जुलूल कार्यों को करना, जिसमे स्वयं के जान-माल पर बेबजह का खतरा हो। यह शिक्षकों का शासकीय हत्या करने की साजिश तथा सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करके विद्यालयों के निजीकरण की कोशिश है।

जिला महामंत्री ज्ञानप्रकाश ने कहा कि एक ओर सरकार शिक्षकों के जान जोखिम में डालकर इस प्रकार का काम करवाना चाहती है, दूसरी ओर जब यही शिक्षक अपने लिए बेहतर सुविधा की मांग करते है तो इन्हें स्थानीय निकाय का कर्मी बताकर पल्ला झाड़ लेती है। बेहतर वेतन की बात तो दूर जो वेतन अभी दे रही है वह भी समय से नहीं दे पाती है। क्या शिक्षा विभाग के सबसे वरीय पदाधिकारी को यह नहीं पता है कि शिक्षक का काम शिक्षण कार्य करना होता है, चौकीदारी या अन्य कार्य नहीं। विभाग पहले ही दर्जनों कामों में शिक्षकों को उलझाए हुई है, अब एक और आदेश निर्गत कर वह शिक्षकों में भय का माहौल उत्पन्न करना चाहती है। जिससे उसे बचना चाहिए तथा शिक्षकों को समाज मे जलील करने की नीयत को बंद करना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र


 rajesh pande