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शिक्षकों का कार्य दायित्व शराबबंदी, नशापान के प्रति जन जागरुकता फैलाना है:डॉ शेखर गुप्ता
भागलपुर, 29 जनवरी (हि.स.)।बिहार सरकार शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव द्वारा नशामुक्ति अभियान को गति दे
डॉ शेखर गुप्ता


भागलपुर, 29 जनवरी (हि.स.)।बिहार सरकार शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव द्वारा नशामुक्ति अभियान को गति देने एवं समाज में नशा के प्रति जागरूकता पैदा करने संबंधी निर्गत विभागीय निर्देश के आलोक में प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ, भागलपुर के अध्यक्ष डॉ शेखर गुप्ता ने शनिवार को कहा कि शराबबंदी, समाज में नशामुक्ति के प्रति जन जागरुकता फैलाने में विद्यालयी शिक्षकों, शिक्षा सेवकों, तालिमी मरकज, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों के सहयोग की परिकल्पना का प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ हार्दिक स्वागत करती है।

नशा, शराब का सेवन निश्चित रूप से एक सामाजिक बुराई है और इसका दुष्परिणाम शराब पीने वालों के साथ उनके घर परिवार, उनके आश्रित जनों पर भी पड़ रहा है। छात्र, समाज हित में एक सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना के साथ प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ अपने शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सामाजिक, नैतिक कर्तव्यों, दायित्वों के प्रति भी दृढ़ संकल्पित है। समाज में शिक्षा के प्रचार प्रसार, जन जागरुकता तथा सरकारी दंडात्मक नीतियों के कारण निश्चित रूप से शराब तथा नशा सेवन में अप्रत्याशित कमी आई है और निकट भविष्य में शिक्षकों, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों के माध्यम से जन जागरुकता फैलाने संबंधी अतिरिक्त जिम्मेवारियों, दायित्वों से इसमें और कमी देखने को मिल सकती है। किन्तु शिक्षकों, शिक्षा सेवकों, तालिमी मरकज, विधालय शिक्षा समिति के सदस्यों को चोरी छिपे शराब पीने वाले या इसकी आपूर्ति करने वालों की पहचान कर मद्य निषेध विभाग के मोबाइल नंबर पर सूचना देने संबंधी विभागीय निर्देश युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है और प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ इससे सहमत नहीं है।

विभाग को ध्यान रखना चाहिए कि एक सामान्य शिक्षक, दूर दराज से विद्यालय में अध्ययन अध्यापन के लिए आते हैं। इनके पास किसी तरह की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होती है। भले ही सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखे जाने के लिए निर्देश जारी किये गये हैं। बावजूद इसके संभावित खतरे और उनके जान माल के नुकसान की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। साथ ही सरकार की विभिन्न विभाग पुलिस, उत्पाद, खुफिया विभाग इसके लिए पूर्व से ऐसी जानकारियां इकट्ठी करने के लिए नियुक्त हैं। ऐसे में शिक्षकों को ऐसी अतिरिक्त जिम्मेदारी इकठ्ठा करने के लिए नियुक्त किया जाना युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होता है। साथ ही विद्यालय अवधि बाद जब शिक्षक अपने घरों को लौट आते हैं।

इस अवधि में विद्यालयों में चोरी छुपे शराब सेवन, नशापान के कारण ऐसे विद्यालयों का उपयोग प्रतिबंधित किये जाने संबंधी आदेश भी युक्तिसंगत प्रतीत नहीं होते हैं। बेहतर हो इसके लिए विद्यालयों में रात्रि प्रहरी की अनिवार्य नियुक्ति की जानी चाहिए। रात्रि प्रहरी की नियुक्ति से विद्यालयी संपत्तियों की सुरक्षा के साथ साथ असामाजिक तत्वों द्वारा चोरी छुपे विद्यालयों में नशापान, शराब सेवन की संभावना पर भी पूर्णतः विराम लग सकता है। जिले में वर्तमान में भी अनेकानेक ऐसे विद्यालय हैं। जिसमें चहारदीवारी का अभाव है। चहारदीवारी विहीन विद्यालयों में विद्यालय अवधि बाद स्वयं विद्यालय की सुरक्षा एक चुनौती होती है। चोरी छिपे शराब पीने वालों या उसकी आपूर्ति करने वाले अपराधियों की पहचान, दंड का जिम्मा शासन प्रशासन का ही होना चाहिए, ना कि अध्ययन अध्यापन से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाओं का इसलिए प्रारंभिक माध्यमिक शिक्षक संघ मांग करती है कि शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऐसी जिम्मेवारियों से मुक्त किया जाय।

हिन्दुस्थान समाचार/बिजय


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