Custom Heading

जयंती पखवाड़ा पर याद किए गए शोषितों और वंचितों के मसीहा कर्पूरी ठाकुर
बेगूसराय, 29 जनवरी (हि.स.)। कुशल राजनीतिज्ञ, सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति तथा शोषितों एवं वंचितो
जयंती समारोह


बेगूसराय, 29 जनवरी (हि.स.)। कुशल राजनीतिज्ञ, सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति तथा शोषितों एवं वंचितों के सशक्त आवाज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती पखवाड़ा के तहत शनिवार को कर्मचारी भवन बेगूसराय के सभागार में राष्ट्रीय नाई महासभा एवं नगर निगम सैलून समिति के संयुक्त तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाध्यक्ष प्रो. रविंद्र कुमार पप्पू की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित नेता एवं कार्यकर्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मौके पर बेगूसराय नगर निगम के निवर्तमान मेयर उपेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर गरीबों, दलितों, शोषितों और वंचितों के मसीहा थे। दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे, फिर भी उनकी सादगी से भरा व्यक्तित्व आज हर नेताओं को उनसे सीख लेने की जरूरत है।

संगठन के राज्य प्रतिनिधि मथुरा ठाकुर ने कहा कि जननायक ने देश की आजादी की लड़ाई के साथ ही देश में सामाजिक न्याय और समरसता स्थापित करने के लिए व्यापक संघर्ष किया। निवर्तमान उप मेयर राजीव रंजन ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर देश में वंचितों, दलितों एवं पिछड़ों को आरक्षण के लिए पूरे जीवन भर संघर्ष किए। इसी का प्रतिफल है कि वंचित समूह आज हर क्षेत्र में भागीदारी सुनिश्चित करने में सफल हो रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए रविंद्र कुमार पप्पू ने कुमार ने कहा कि उनका अमूल्य फॉर्मूला था हक चाहिए तो लड़ना सीखो, कदम-कदम पर अरना सीखो, जीना है तो मरना सीखो, आज यह मूल मंत्र बन गया है। उन्होंने भारत सरकार से कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने एवं नाई जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की मांग की।

जिला सचिव अरविंद ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए सरकारी तंत्र का कभी भी व्यक्तिगत जीवन में उपयोग नहीं किया ऐसे महान व्यक्तित्व थे जननायक। जबकि संगठन सचिव प्रभु प्रताप ठाकुर ने जननायक को सामाजिक न्याय का पुरोधा बताते हुए समतामूलक समाज का निर्माता बताया। आगत अतिथियों का स्वागत नगर निगम सैलून समिति के अध्यक्ष रामकुमार ठाकुर ने तथा धन्यवाद ज्ञापन जिला कोषाध्यक्ष टुनटुन ठाकुर द्वारा किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र


 rajesh pande