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शराबबंदी के कारण गरीबों के पहुंच से दूर हुई होम्योपैथिक चिकित्सा
भागलपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। शराबबंदी का सबसे ज्यादा असर होम्योपैथिक दवाइयों पर देखा जा रहा है। गरीबों
डॉ सत्यजीत मिश्रा


भागलपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। शराबबंदी का सबसे ज्यादा असर होम्योपैथिक दवाइयों पर देखा जा रहा है। गरीबों की चिकित्सा पद्धति कहा जाने वाला होम्योपैथ अब उनके पहुंच से बाहर होता जा रहा है। पहले सौ दौ सौ रूपये में होने वाला इलाज अब पांच से छः सौ रुपये में हो रहा है। होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ सत्यजीत मिश्रा ने बताया कि शराबबंदी के बाद से बड़े जार की जगह छोटी शीशी में दवा आने लगी तो दुकानदारों को यह महंगी पड़ने लगी। दवाई बड़े जार में आती थी और अत्यधिक बिक्री होने के कारण कंपनी के द्वारा बड़े जार की जगह छोटी शीशी में दवा आने लगी तो दुकानदारों को यह महंगी पड़ने लगी। इसका नतीजा गरीब बीमार लोग भुगत रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की शराबबंदी नीति ने होम्योपैथ दवा महंगी कर दी। होम्योपैथ दवा कि जिस एक शीशी का कीमत 12 रुपये से 15 रुपये हुआ करता था शराबबंदी के बाद उसी का दाम बढ़ कर 50 से 60 रुपए तक हो गयी है। सरकार के शराबबंदी निर्णय ने होम्योपैथ की मीठी गोली का स्वाद कड़वाहट में बदल दिया है। प्रदेश में शराब बंद होने पर शराब के शौकीन लोगों ने होम्योपैथ दवाओं का कितना दुरुपयोग किया इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आ रहा है। 30 एमएल से बड़ी सीसी रखने पर सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया है। शराबबंदी से पहले 2100 सौ रुपये में 3000 एमएल की शीशी आती थी। अब 3000 एमएल के लिए 30 एमएल की एक सौ शीशी खरीदनी पड़ रही है। इसकी कीमत 5000 रुपये पड़ रही है। होम्योपैथी दवाओं का कारोबार लाखों रुपए का है और शराबबंदी को लेकर दवाई भी कम मिल रही है। सरकार को गंभीर रूप से सोचना चाहिए और होम्योपैथिक दवाई बहुत पौराणिक दवाई है। जिससे गरीब अमीर सभी लोग होम्योपैथिक दवाई का उपयोग करते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार/बिजय


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