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दिल्ली हिंसाः उमर खालिद की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हिंसा के आरोपित उमर खालिद की जमानत याचिका का विर
दिल्ली हिंसाः उमर खालिद की जमानत याचिका का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध


नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हिंसा के आरोपित उमर खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि शाहीन बाग का आंदोलन नानी और दादी का विरोध-प्रदर्शन नहीं था। दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा कि शाहीन बाग के प्रदर्शन को स्थानीय लोगों का भी समर्थन प्राप्त नहीं था। जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 31 जनवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान अमित प्रसाद ने शरजील इमाम के चैट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि हम खुरेजी की टेस्टिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग के आंदोलन में बाहर से महिलाओं को लाया गया। पिंजरा तोड़ समूह के कुछ सदस्यों को शामिल कर लिया गया। राहुल राय लोगों को जोड़ने लगे। आईसीएलयू के वकील भी कानूनी मदद का हाथ बढ़ाने लगे। अमित प्रसाद ने कहा कि आंदोलनों के लिए सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख के नामों का इस्तेमाल किया गया। विरोध प्रदर्शनों के लिए जो भी स्थल चुने गए वो काफी संकरे थे। इन स्थलों के चुनाव का सीधा मकसद था कि उन इलाकों के गरीब लोगों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों को स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त नहीं था। कई सारी टीमें मिलकर इसे मैनेज कर रही थीं। सिविल सोसायटी के एजेंडे से आम महिलाओं को कोई मतलब नहीं था। आंदोलनों के लिए कलाकारों को बुलाया गया। प्रदर्शन स्थलों पर टॉयलेट इसलिए बनवाए गए ताकि बाहर से आनेवाले लोगों के लिए इंतजाम किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी हमारी जांच चल रही है और हमने किसी को क्लीनचिट नहीं दी है।

पिछले साल 28 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 2020 में किए गए विरोध से नागरिकता संशोधन अधिनियम का कोई लेना-देना नहीं था बल्कि उसके जरिये सरकार को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बदनाम करने की नीयत थी। अमित प्रसाद ने 20 फरवरी, 2020 को उमर खालिद के अमरावती में दिए गए भाषण का जिक्र किया था, जिसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जिक्र किया गया था। अमित प्रसाद ने कहा कि देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की ओर अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करना मकसद था। उमर खालिद ने अपने भाषण में कहा था कि प्रधानमंत्री अमेरिका गए थे और हम डोनाल्ड ट्रंप से मिलेंगे। अमित प्रसाद ने पूछा था कि क्या उमर खालिद ने ट्रंप का अप्वाइंटमेट लिया धा। मतलब साफ है कि मकसद कुछ और था।

अमित प्रसाद ने उमर खालिद के वकील त्रिदीप पायस की इस दलील का विरोध किया था कि जांच एजेंसी और जांच अधिकारी सांप्रदायिक हैं। उन्होंने कहा था कि जांच एजेंसी किसी व्यक्ति की नहीं है, ये सरकार की है। उन्होंने कहा था कि जमानत पर सुनवाई के दौरान गवाहों की विश्वसनीयता नहीं देखी जाती है। आप हमारी दलीलों को खारिज कर सकते हैं, पुलिस को दिए गए बयानों को अविश्वसनीय बना सकते हैं, लेकिन अगर कोई गवाह कोर्ट में बयान दर्ज कराता है तो उसे अविश्वसनीय नहीं कहा जा सकता है। ये मामला दिल्ली हिंसा की बड़ी साजिश से जुड़ा हुआ है। हिंसा फैलाने के लिए एक गुप्त समझौता हुआ था, जिसे लोग सार्वजनिक नहीं करना चाहते हैं। जब अपराध का खुलासा हुआ तो आरोपितों ने अपने को छिपाने की कोशिश की। अमित प्रसाद ने त्रिदीप पायस की इस दलील का विरोध किया था कि व्हाट्स ऐप ग्रुप का सदस्य होना अपराध नहीं है। उन्होंने कहा था कि व्यक्तिगत स्तर पर कोई चीज गैरकानूनी नहीं होती। उसका परिणाम गैरकानूनी होता है। उन्होंने कहा था कि राजीव गांधी हत्याकांड में नलिनी का बैटरी खरीदना गैरकानूनी नहीं था। सब कुछ साक्ष्यों पर निर्भर करता है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगे अचानक नहीं हुए थे। ये बात हाई कोर्ट ने भी स्वीकार किया है।

उल्लेखनीय है कि क्राइम ब्रांच ने उमर खालिद पर दंगे भड़काने, दंगों की साजिश रचने और देशविरोधी भाषण देने के अलावा दूसरी धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। करीब 100 पेज की चार्जशीट में कहा गया है कि 8 जनवरी, 2020 को शाहीन बाग में उमर खालिद, खालिद सैफी औऱ ताहिर हुसैन ने मिलकर दिल्ली दंगों की साजिश रचने के लिए मीटिंग की। इस दौरान ही उमर खालिद ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शनों में मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र में हिस्सा लिया और भड़काऊ भाषण दिए। इन भाषणों में उमर खालिद ने दंगों के लिए लोगों को भड़काया है।

उमर खालिद को 13 सितंबर, 2020 को पूछताछ के बाद स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था। 17 सितंबर, 2020 को कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। 16 सितंबर, 2020 को स्पेशल सेल ने चार्जशीट दाखिल की थी।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय


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