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दिबियापुर विधानसभा सीट: सपा ने तीसरी बार प्रदीप पर, तो भाजपा ने दूसरी बार लाखन सिंह पर लगाया दाव
- मुलायम के लिए कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर सपा नेतृत्व के करीबी बन गए थे प्रदीप यादव - लाखन
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- मुलायम के लिए कन्नौज लोकसभा सीट से इस्तीफा देकर सपा नेतृत्व के करीबी बन गए थे प्रदीप यादव

- लाखन सिंह पहली ही बार में बन गए योगी सरकार में मंत्री

औरैया, 29 जनवरी (हि.स.)। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने संभावनाओं के मुताबिक दिबियापुर विधानसभा से एक बार फिर लाखन सिंह राजपूत पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। लंबे अरसे तक जिले में पार्टी का चुनाव प्रबंधन देखने वाले लाखन सिंह बेहद सधे कदमों से राजनीति में आगे बढ़ते रहे और अपने सौम्य, सरल, स्वभाव के चलते पार्टी नेतृत्व की पसंद बन गए।

फफूंद क्षेत्र के गांव सलहुपुर में पिता रामबली सिंह के यहां 01 जुलाई 1957 को जन्मे लाखन सिंह राजपूत ने बीए एलएलबी की पढ़ाई की। वकालत की डिग्री हासिल करने के बाद वे इटावा में प्रेक्टिस करने लगे थे। 1997 में औरैया जिला बनने के बाद वे औरैया जनपद न्यायालय में वकालत करने लगे थे। इसके साथ में भारतीय जनता पार्टी से जुड़ कर वे संगठन का काम करते रहे। वर्ष 1996, 2007, 2009 एवं 2012 में उन्होंने जिले में भाजपा का चुनाव प्रबंधन का कार्य देखा।

भाजपा के जिला महामंत्री रहते हुए साफ-सुथरी छवि के लाखन सिंह को 2017 में दिबियापुर विधानसभा से पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया। उन्होंने सपा नेतृत्व के करीबी पूर्व सांसद व दिबियापुर विधानसभा के विधायक रहे प्रदीप यादव को लगभग 13 हजार मतों से हराकर विधायक बने। योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें कृषि राज्यमंत्री बनाया गया।

औरैया विधायक रमेश दिवाकर के असामयिक निधन तथा बिधूना के विधायक विनय शाक्य की लंबी अस्वस्थता के चलते लाखन सिंह ने अपनी विधानसभा के साथ-साथ जिले की दोनों विधानसभाओं में विकास योजनाओं का न केवल क्रियान्वयन कराया बल्कि पार्टी संगठन और जिले के नेताओं के बीच बेहतर सामंजस्य बनाया। यही वजह रही कि पार्टी ने एक बार फिर उन्हीं पर अपना भरोसा जताते हुए शुक्रवार को जारी हुई सूची में उनके नाम का ऐलान कर तमाम चर्चाओं पर विराम लगा दिया।

वही, दूसरी ओर जिले की सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र से मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने लगातार तीसरी बार पूर्व सांसद, पूर्व विधायक 65 वर्षीय प्रदीप यादव पर दांव लगाया है। परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई जिले की नई दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार 2012 में सपा के टिकट पर प्रदीप यादव ने ही जीत दर्ज कराई थी।

मूलरूप से इटावा के भरथना निवासी प्रदीप यादव व्यवसाई होने के साथ-साथ स्थानीय राजनीति में रुचि रखते थे। सबसे पहले वे भरथना से ब्लाक प्रमुख बने थे और फिर उनका कद बढ़ा तो तत्कालीन सपा नेतृत्व ने उन्हें 1998 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज से अपना प्रत्याशी बनाया और वे ब्लॉक प्रमुख से सीधे सांसद निर्वाचित हुए।

सांसद बनने के लगभग 01 साल बाद ही मुलायम सिंह यादव को लोकसभा भेजने के लिए प्रदीप यादव ने कन्नौज लोकसभा सदस्य पद से त्यागपत्र देकर अपनी सीट खाली कर दी थी। इस पर वर्ष 1999 में कन्नौज में हुए उपचुनाव में मुलायम सिंह यादव सांसद निर्वाचित हुए और फिर यह सीट लंबे अरसे तक मुलायम सिंह के परिवार के पास सुरक्षित रही।

इधर, 2012 में परिसीमन के बाद हुए विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने प्रदीप यादव को पहली बार दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से मैदान में उतारा और वे विधायक बने।2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने प्रदीप यादव को ही अपना उम्मीदवार बनाया था लेकिन वे मौजूदा विधायक लाखन सिंह राजपूत से चुनाव हार गए थे।

2022 के विधानसभा चुनाव में स्वर्गीय धनीराम वर्मा की पुत्र वधू रेखा वर्मा, पूर्व विधायक इंद्रपाल सिंह पाल की पुत्री पल्लवी पाल व अन्य कई दावेदारों के बीच उलझे सपा नेतृत्व ने आखिर में फिर से एक बार प्रदीप यादव पर ही दांव लगाया है। बसपा ने बहुत पहले ही ब्राह्मण प्रत्याशी पर दाव लगाया दिया उसने अरुण लाल दुबे को उम्मीदवार बनाया है जबकि आम आदमी पार्टी ने अंकिता यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

हिन्दुस्थान समाचार/ सुनील


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