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'अबै तक आपन लाल कै चिट्ठी कै बारै मां डाकिया से पूछत रहौं, अब मोर लाल सोमवार का घरे आ जई'
बांदा, 29 जनवरी (हि.स.)। पाकिस्तान की जेल में पिछले चार साल से बंद अपने बेटे की रिहाई की खबर सुनकर व
‘अबै तक आपन लाल कै चिट्ठी कै बारै मां डाकिया से पूछत रहौं, अब मोर लाल सोमवार का घरे आ जई’


बांदा, 29 जनवरी (हि.स.)। पाकिस्तान की जेल में पिछले चार साल से बंद अपने बेटे की रिहाई की खबर सुनकर विवेक की वृद्ध मां की आंखों में चमक सी आ गई है। पूछने पर मां चंद्रकली नम आंखों से कहने लगी। ‘अबै तक आपन लाल कै चिट्ठी कै बारै मां डाकिया से पूछत रहौं,अब मोर लाल सोमवार का घरे आ जई’। चंद्रकली की तरह पाकिस्तानी फौज द्वारा समुद्र में शिकार के दौरान पकड़े गए बांदा के चार युवा मछुआरों के घरों की कुछ इसी तरह की मार्मिक कहानी है।

जनपद के जसईपुर गांव निवासी राजमिस्त्री राम विशाल कुशवाहा का बेटा विवेक कुशवाहा 12 जुलाई 2017 को महेदु गांव के बाबू कुशवाहा उसके भाई चुनकू कुशवाहा सिधौली गांव के राजू कुशवाहा तथा अजीतपारा के बच्ची लाल के साथ गुजरात की ओखा में मछली शिकार कंपनी में काम करने गया था। 17 सितंबर 2017 को इनके घरों में खबर आई कि मछली का शिकार करते समय सीमा उल्लंघन के कारण इन्हें पाकिस्तान की सेना ने पकड़ लिया है। इस खबर के बाद इनके घरों में मातम छा गया। विवेक के पिता बताते हैं कि बेटे की कमाई से घर का खर्च चलता था, जब से बेटा जेल में है तब से घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया है।

बेटे के जेल में होने से मां चंद्रकली उदास रहने लगी। वह हमेशा घर के बाहर निहारती रहती थी कि शायद बेटा या बेटे की कोई खबर आ जाए। 03 दिन पहले खबर आई है कि पाकिस्तान से बेटे की रिहाई हो गई है। इस खबर से घर की खुशी लौट आई है। बस अब बेटे का घर आने का इंतजार है।

इसी तरह चिल्ला थाना क्षेत्र के महेदु गांव निवासी प्यारे लाल कुशवाहा भी राजमिस्त्री का काम करते हैं उनके तीन बेटे सुशील, बाबू और विनोद है। यहां काम न मिलने के कारण सुशील बाबू और विनोद का बेटा राजू मछली पकड़ने के लिए ओखा गुजरात गए थे। तभी यह मछली पकड़ने के चक्कर में सीमा उल्लंघन कर पाकिस्तान की सीमा में चले गए। जिससे पाकिस्तान सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया तब से पाकिस्तान की कैद में थे।

ठीक इसी तरह से बिसंडा थाना क्षेत्र के अजीतपारा निवासी बच्ची लाल भी चार साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा हुआ है। इसकी रिहाई से गांव में खुशी का माहौल है। पत्नी कलावती बताती है कि वह राजू कुशवाहा के साथ गए थे। राजू तो तीन साल पहले छूट गया लेकिन वह नहीं छूटे थे। जब बच्चे पापा की याद करते थे तो मैं उन्हें तसल्ली देती थी कि पापा जल्दी घर लौट आएंगे। अब वह समय आ गया है जब बच्चों से झूठ नहीं बोलना पड़ेगा। उनकी रिहाई की खबर से गांव के साथ-साथ रिश्तेदार भी खुश है। अब तो 02 दिन का इंतजार बरसो जैसा लग रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार/अनिल


 rajesh pande