डेंगू और मलेरिया को रोकने के लिए एक समान प्रोटोकॉल बनाएं नगर निगमः हाई कोर्ट
नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली की तीनों नगर निगमों को निर्देश दिया है कि वे
डेंगू और मलेरिया को रोकने के लिए एक समान प्रोटोकॉल बनाएं नगर निगमः हाई कोर्ट


नई दिल्ली, 14 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली की तीनों नगर निगमों को निर्देश दिया है कि वे डेंगू और मलेरिया को रोकने के लिए एक समान प्रोटोकॉल बनाएं। जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इन प्रोटोकॉल का पालन सभी एजेंसियां करें ताकि डेंगू और मलेरिया के प्रकोप से बचा जा सके।

आज सुनवाई के दौरान नगर निगमों ने हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने कोर्ट के पिछले आदेश के मुताबिक दो टास्क फोर्स का गठन किया है। एक टास्क फोर्स निगम मुख्यालय के लिए और दूसरा क्षेत्रीय स्तर पर। तब कोर्ट ने कहा कि पिछले आदेश का मतलब ये था कि नगर निगम एक समान प्रोटोकॉल बनाएं ताकि मच्छरों के प्रकोप से लड़ने वाले हर व्यक्ति की भूमिका तय होनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भले ही डेंगू और मलेरिया के मामले मानसून सीजन में सबसे ज्यादा बढ़ जाते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी हर मौसम में होती है। इनके बढ़ने के पीछे कई वजहें हैं। कोर्ट ने कहा कि मच्छरों का प्रजनन कचरों, पुराने टायरों, बर्तनों, टैंकों इत्यादि में भी होता है, जिनमें पानी रहता है।

24 दिसंबर 2021 को कोर्ट ने नगर निगमों को निर्देश दिया था कि वे अपने-अपने इलाके के लिए टास्क फोर्स का गठन करें। कोर्ट ने कहा था कि टास्क फोर्स के अध्यक्ष संबंधित निगम के कमिश्नर होंगे। टास्क फोर्स को साइट विजिट कर मच्छरों की ब्रीडिंग की रोकथाम के कदम उठाने हैं। कोर्ट ने कहा था कि समस्या यह है कि सीनियर अधिकारी साइट विजिट नहीं करते। उन्हें नियमित रूप से यह काम करने की जरूरत है ताकि जमीनी हकीकत का पता चल सके। दफ्तरों में बैठकर ये सब नहीं हो सकता।

सात दिसंबर 2021 को कोर्ट ने डेंगू पर रोक लगाने में नाकाम रहने पर नगर निगमों और दिल्ली सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने इस मामले में कोर्ट की मदद करने के लिए वकील रजत अनेजा को एमिकस क्युरी नियुक्त किया था। कोर्ट ने कहा था कि प्रशासन को पूरी तरह लकवा मार गया है। कोर्ट ने कहा था कि शहर में बड़े पैमाने पर मच्छरों के प्रजनन के खतरे का मुद्दा है। कोर्ट ने कहा था कि ये जरुरी है कि मच्छरों की ब्रीडिंग के मामले की मानिटरिंग की जाए। कोर्ट ने कहा था कि तीनों नगर निगम, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली कैंट बोर्ड और दिल्ली सरकार इस समस्या पर स्थायी नजर रखें।

एक दिसंबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि अगर चुनाव असली मुद्दों पर लड़ा जाए तो हमारा शहर पूरी तरह बदल जाएगा, लेकिन चुनाव इन पर लड़ा जा रहा है क्या मुफ्त है। कहा कि नीतियां लोकलुभावन बनाई जा रही है और सरकार डर रही है कि उसके वोट खिसक जाएंगे। सुनवाई के दौरान दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने मांग की थी कि कानून का उल्लंघन करनेवालों पर जुर्माने की रकम की सीमा बढ़ाने का दिशानिर्देश जारी किया जाए। तब कोर्ट ने कहा था कि कुछ रोक होनी चाहिए। हमारे समाज में लोग तब तक नहीं समझते जब तक कोई रोक नहीं हो। हम इस पर कानून नहीं बना सकते हैं। आप को ये डर है कि अगर वे कुछ करेंगे तो लोग आपको वोट नहीं देंगे।

कोर्ट ने कहा था कि अगर चुनाव असली मुद्दों पर होते तो हमारा शहर कुछ और होता। आज तक इस पर चुनाव हो रहा है कि मुफ्त क्या है। कोर्ट ने कहा था कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अधिकतर नाले खुले हुए हैं और उनसे बदबू आती है। देश की राजधानी दिल्ली के लिए ये दुखद स्थिति है।

23 नवंबर को कोर्ट ने डेंगू की रोकथाम करने में नाकाम रहने पर नगर निगमों को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि उसके पहले के आदेश को अनसुना कर दिया गया। कोर्ट ने कहा था कि हर साल डेंगू बढ़ कैसे रहा है। क्या यह नगर निगम का काम नहीं है। यह रॉकेट साइंस की तरह है कि मानसून के बाद मच्छर आएंगे। पिछले 15-20 सालों से यही हो रहा है। न तो कोई इस पर सोचता है और न ही कोई योजना बनाई जाती है। कोर्ट ने कहा था कि मच्छरों की चेकिंग करने वाले स्टाफ और छिड़काव करने वाले कर्मचारी कुछ नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने सभी नगर निगमों को निर्देश दिया था कि वे सभी निगमों के चेयरमैन इसे लेकर हर हफ्ते बैठक करें।

हिन्दुस्थान समाचार/संजय


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