उत्तराखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन लाल बौंठियाल का निधन, मुख्यमंत्री ने जताया शोक
देहरादून, 14 जनवरी (हि.स.)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ से जुड़े मोहन लाल बौंठियाल का शुक्रवार की शाम
स्वर्गीय मोहनलाल


देहरादून, 14 जनवरी (हि.स.)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और संघ से जुड़े मोहन लाल बौंठियाल का शुक्रवार की शाम हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 79 वर्ष के थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा कि यह समाचार स्तब्ध करने वाला है।

प्रखंड दुगड्डा के अंतर्गत ग्राम ऐता निवासी वरिष्ठ भाजपाई एवं संघ से जुड़े नेता मोहनलाल बौंठियाल को सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। उनके पुत्र सुदीप बौंठियाल उन्हें चिकित्सालय लेकर जाने लगे। इसी दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मोहनलाल बौंठियाल कुछ समय पहले बीमार हुए थे और देहरादून के एक चिकित्सालय में उनका उपचार हुआ था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक संवेदना व्यक्त कर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे सरकार और संगठन में विभिन्न पदों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किये। उत्तराखंड भाजपा में पुरानी पीढ़ी के नेताओं में एक ऐसे व्यक्तित्व थे, वह हमेशा अपनी बेबाकी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। उनका निधन पार्टी के लिए एक अपूर्णीय क्षति है।

उन्होंने हमेशा मृदुभाषी व सादगी के साथ अपना जीवन जिया। मुख्यमंत्री ने परिजनों को सांत्वना दी और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहनलाल बौंठियाल भाजपा के संस्थापको में से एक थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी उनकी फोन पर वार्ता होती रहती थी। सन 58 में वह बाल स्वयं सेवक के तौर पर संघ से जुड़ थे। 19 60 में वह फिर जनसंघ से जुड़े, फिर 19 77 में जनता पार्टी में वह 19 80 में भाजपा के सदस्य बने है। उत्तराखण्ड में भारतीय जनता पार्टी को एक पार्टी के तौर पर खड़ा करने में उन्होंने भी अपनी ओर से कठिन परिश्रम किया। पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी वह पार्टी के कई वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह भाजपा में पंचायत प्रकोष्ठ व अनुशासन समिति के अध्यक्ष के अलावा कई बार गढ़वाल लोकसभा के प्रभारी व पालक भी रहे हैं। प्रदेश के अंदर भाजपा सरकार के समय वन निगम व जलागम प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रहे। विद्या भारती रामजन्मभूमि आंदोलन और राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही है। बताया जाता है कि व कई बार जेल भी गए। इतना ही नहीं आपातकाल में भी भूमिगत आंदोलन में सक्रिय रहे। राज्य बनने से पहले वह पर्वतीय विकास परिषद के सदस्य भी थे।

हिन्दुस्थान समाचार/राजेश


 rajesh pande