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भोपाल: अच्छी और शुद्ध भाषा से डरने की आवश्यकता नहीं है : विवेक अग्निहोत्री
सिनेमा विकल्प मांगता है, जो देगा वह चलेगा- प्रो के.जी. सुरेश "भारतीय सिनेमा और हिन्दी" पर परिचर्चा म

सिनेमा विकल्प मांगता है, जो देगा वह चलेगा- प्रो के.जी. सुरेश

"भारतीय सिनेमा और हिन्दी" पर परिचर्चा में चर्चित फिल्मकार विवेक अग्निहोत्री

भोपाल, 14 सितंबर (हि.स.)। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल में "भारतीय सिनेमा और हिन्दी" विषय पर आयोजित परिचर्चा में देश के जाने माने फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सिनेमा के माध्यम से बहुत कुछ अवांछनीय सामग्री दिखाई जाती है, जो न तो समाज की मांग है और न ही समाज की आवश्यकता है।

अग्निहोत्री ने आजादी के 75 वर्षों की सिनेमा के कथानक की यात्रा में आए बदलाव पर आलोचनात्मक समीक्षा रखते हुए बताया कि किस तरह समाज के बदलाव का प्रतिबिंब सिनेमा में दिखा ,जबकि कुछ लोगों ने जिनको भारत की समझ नहीं थी ने अपने फैशनेबल विचारों को सिनेमा पर थोपा।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो के.जी. सुरेश ने कहा कि आज सिनेमा में विकल्प की जरूरत भी है और मांग भी है। जो विकल्प देगा वह चलेगा। आज कम बजट की सार्थक फिल्म भी समाज पर अधिक प्रभाव डालती है और हिट हो सकती है। सुरेश ने कहा कि भारतीय सिनेमा ने हिन्दी समेत कई भारतीय भाषाओं को दुनियाभर में पहुंचाया है। इसलिए इसका उपयोग भाषाई विस्तार के लिए भी प्रभावी ढंग से होना चाहिए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में विषय का प्रवर्तन करते हुए फिल्म पत्रकार अतुल गंगवार ने आगामी फिल्म समारोह की भूमिका और रूपरेखा प्रस्तुत की। गंगवार ने कहा कि बाजार की मांग की आड़ लेकर भाषा को विकृत और कमजोर नहीं किया जा सकता। भाषा की शुद्धता बनाए रखकर भी सफल फिल्मों के कई उदाहरण हैं।

स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव श्रृंखला के अंतर्गत हिंदी दिवस पर आयोजित इस परिचर्चा में मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ भारत शरण ने आगामी फिल्म समारोह के लिए शुभकनाएं दी कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय में फिल्म समूह आयोजन सिटी के अध्यक्ष प्रो पवित्र श्रीवास्तव ने लिया। कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अविनाश वाजपेई ने आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार/राजू


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