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बाल आश्रम के पांच बच्चों को एसआरएम विश्वविद्यालय में मिला दाखिला
नई दिल्ली, 14 नवंबर (हि.स.)। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी और सुमेधा कैलाश की ओर
बाल आश्रम के पांच बच्चों को एसआरएम विश्वविद्यालय में मिला दाखिला


नई दिल्ली, 14 नवंबर (हि.स.)। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी और सुमेधा कैलाश की ओर से स्थापित “बाल आश्रम” के पांच बच्चों को देश के प्रतिष्ठित और उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक एसआरएम विश्वविद्यालय में दाखिला मिला है। सभी बच्चे एक समय बाल मजदूरी कर रहे थे। उस दौरान इनका बचपन कष्ट और यातनापूर्ण था।

सत्यार्थी के संगठन बचपन बचाओ आंदोलन की ओर छापामार कार्रवाई के तहत इन बच्चों को छुड़ाया गया था और इन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किया था। बाल आश्रम में रहकर पढ़ाई करते हुए पांचों बच्चों ने 12वीं की परीक्षा अव्वल नंबरों से पास की। इन पांचों बच्चों के नाम संजय कुमार, इम्तियाज अली, मनीष कुमार, चिराग आलम और मन्नू कुमार है।

बाल आश्रम की सह संस्थापिका सुमेधा कैलाश ने शिक्षा के प्रति इन बच्चों की लगन और जज्बे की सराहना करते हुए कहा, “मैं इन बच्चों को ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद देती हूं। मुझे और कैलाश जी को इन बच्चों पर शुरू से ही भरोसा था, जब हम इन्हें बाल मजदूरी से छुड़वाकर बाल आश्रम लाए थे। बाल आश्रम के सभी बच्चे जीवन में खूब तरक्की करें और मनचाही मंजिल पाएं, इसकी मैं कामना करती हूं।”

उल्लेखनीय है कि बाल आश्रम के जिन बच्चों का एसआरएम विश्वविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिला हुआ है, वे समाज के सबसे कमजोर और हाशिये वाले वर्ग से आते हैं। इन बच्चों को बीएससी (फिजिकल एजुकेशन), बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी, होटल मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन नर्सिंग एवं बैचलर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन के पाठ्यक्रमों में चयन हुआ है। एसआरएम विश्वविद्यालय भारत के शीर्ष विश्वविद्यालयों में से एक है।

संजय का संकल्प और परिश्रम काबिले तारीफ है। राजस्थान के विराट नगर के रहने वाले संजय की दो बहनें हैं। मां और भाई बहनों को वित्तीय संकट के कारण एक ईंट भट्टे में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बचपन बचाओ आंदोलन की ओर से संजय को वहां से मुक्त कराया गया था। फिर संजय का हौसला परवान चढ़ता गया और इसी साल उसने 12वीं कक्षा में अव्वल नंबरों से पास किया है।

इम्तियाज़ अली 21 साल के हैं। उनके सन 2020 में 12वीं में 67 प्रतिशत अंक आये थे। इनका चयन डिप्लोमा इन नर्सिंग में हुआ है। अत्यधिक गरीबी के कारण इम्तियाज़ ट्रैफिकरों के चंगुल में फंस गया था। बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्त कराकर बाल आश्रम में दाखिल करवाया था।

मनीष कुमार 18 साल के हैं। उनका चयन बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी के लिए हुआ है। उनके 2020 में 12वीं में 66 प्रतिशत अंक आए थे। मनीष लापता बच्चे थे और बचपन में ही मां को खो दिया था। बाल आश्रम ने उसके जीवन में बदलाव ला दिया है।

21 वर्षीय चिराग आलम का चयन बीबीए पाठ्यक्रम के लिए हुआ है। उसने 2020 में 12वीं में 64.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किये थे। जबकि मन्नू कुमार उरांव 18 साल के हैं। मन्नू के 2020 में 12वीं में 57 प्रतिशत अंक आए थे। उनका चयन बीएस-सी (फिजिकल एजुकेशन) में हुआ है। पिता की मृत्यु के बाद महज आठ साल की उम्र में उसने तबेले में काम करना शुरू कर दिया था। बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने उन्हें मुक्त किया और पुनर्वास के लिए बाल आश्रम भेज दिया था।

हिन्दुस्थान समाचार/अनूप


 rajesh pande