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नहीं रही लखनऊ की शान अभिनेत्री फर्रूख जफ़र, रंगकर्मियों में शोक
लखनऊ, 16 अक्टूबर ( हि.स.)। लखनऊ की शान, रंगकर्मियों की अम्मी जान, वयोवृद्ध अभिनेत्री फर्रूख जफ़र ने
नहीं रही लखनऊ की शान अभिनेत्री फर्रूख जफ़र, रंगकर्मियों को हुआ शोक


लखनऊ, 16 अक्टूबर ( हि.स.)। लखनऊ की शान, रंगकर्मियों की अम्मी जान, वयोवृद्ध अभिनेत्री फर्रूख जफ़र ने शनिवार को अंतिम सांस ली। वह 88 वर्ष की थीं। वह बॉलीवुड में एक जाना-माना चेहरा थीं। उनके निधन से शहर के थियेटर और फिल्म आर्टिस्टों में शोक व्याप्त है। सब उनके काम को याद कर रहे थे।

फर्रूख जफ़र ने उमराव जान, स्वदेश, पीपली लाइव, बेयरफुट टू गोवा, अलीगढ़, सुल्तान, सीक्रेट सुपरस्टार, लोग क्या कहेंगे, फोटोग्राफ, अम्मा की बोली और गुलाबो सीताबो जैसी लोकप्रिय फिल्मों में काम किया है। अमिताभ बच्चन के साथ लखनऊ में शूट हुई फ़िल्म गुलाबो सिताबो में उन्होंने फातिमा बेगम के रूप में भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीता था। उनके निधन का कारण पता नहीं चला है।

फर्रुख जफर जौनपुर में पैदा हुई थीं, पर वह लखनऊ में ऐसी रची-बसी कि यहीं की होकर रह गईं। यहां आकाशवाणी में उन्हें उद्घोषक की नौकरी भी की है। वह देश की पहली महिला आरजे बन गई थीं। एक्टिंग का शौक शुरू से ही था। वह मिमिक्री किया करती थीं। इसी शौक ने उन्हें फिल्मों में काम के लिए प्रेरित किया। लखनऊ से बेपनाह इश्क करती थीं। जब उन्हें फिल्म फेयर मिला तो यहां जश्न मनाया गया। उन्हें मुबारकबाद देने वालों की कतार लग गई थी।

बेटी मेहरू जफर ने बताया कि पिछले कुछ समय से उन्हें सीने में जकड़न की शिकायत थी। 4 अक्टूबर को उन्हें सहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सीने में जकड़न की शिकायत बढ़ती गई। उन्हें बाद में निमोनिया भी हो गया।

अभिनेत्री फर्रूुख ने बॉलीवुड के तीनों खान के साथ काम किया है। स्वदेश में शाहरुख खान के साथ काम किया, पीपली लाइव में आमिर खान के साथ और सुल्तान में सलमान खान के साथ भूमिका निभाई। तमाम किरदारों के बाद भी गुलाबो सिताबो में उनके काम को सबसे ज्यादा पसंद किया गया। फर्रूुख जफर ने फ़िल्म पीपली लाइव भी की थी, जिसमें अम्मा की भूमिका काफी लोकप्रिय हुई थी।

संदीप कुमार निर्देशित मेहरुन्निसा उनकी आखि़री फ़िल्म है ,जो लखनऊ में शहर के कलाकरों के साथ शूट हुई है। फिल्म में ढ़ेरो फ़िल्म फेस्टीवल्स में धूम मचाई।

शहर के फिल्म एवं थियेटर आर्टिस्ट डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया वह बहुत अच्छी कलाकार थीं। हम दोनों ने फिल्म मुक्ति भवन सहित 2-3 फिल्मों व एक सीरियल में भी स्क्रीन शेेयर किया था। आखिरी मुलाकात यहीं आयोजित एक एवार्ड समारोह में हुई थी जहां हम दोनों को ही पुरस्कार मिला था। युवा आर्टिस्ट मुकेश वर्मा ने बताया कि वह तो मेरे लिए आदरणीय व प्रेरणास्तोत्र थीं। उनके न रहने पर शहर के कलाकारों में शोक है।

हिन्दुस्थान समाचार /शैलेंद्र मिश्रा


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