हृदयनारायण दीक्षित
''जीवन की साँझ'' भी आती है। संध्या आती है प्रतिदिन। सभी प्राणी घर लौटते हैं। सूर्य अस्त होते हैं। इसी तरह ''वृद्धावस्था'' जीवन की साँझ है। यह अचानक नहीं आती। धीरे-धीरे ''जीवन-ऊर्जा'' घटती है। शरीर क्षीण होता है। मन और
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