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महागठबंधन के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद घटक दलों में बगावत का अंदेशा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 9 2018 5:45PM
महागठबंधन के उम्मीदवारों की घोषणा के बाद घटक दलों में बगावत का अंदेशा
-आलोक नंदन शर्मा हैदराबाद, 09 नवम्बर (हि.स.)। महागठबंधन में अभी तक सीट बंटवारे की तस्वीर साफ न होने से कांग्रेस समेत गठबंधन के तमाम घटक दलों के नेताओं का धैर्य जवाब देने लगा है। तेलंगाना के तमाम विधानसभा क्षेत्रों में तेलंगाना राष्ट्र समिति उम्मीदवार जिस तरह से धुआंधार प्रचार कर रहे हैं उसे देखते हुये महागठबंधन के घटक दलों के संभावित उम्मीदवारों को अहसास हो रहा है कि यदि उन्हें टिकट मिल भी जाता है तो देर होने की वजह से टीआएस के उम्मीदवार प्रचार-प्रसार के मामले में उन पर बीस साबित होंगे। इसके अलावा उन्हें यह भी डर सता रहा है कि टिकट के बंटवारे के साथ उम्मीदवारों नामों के घोषणा के बाद उन्हें टिकट से वंचित रहने वाले अपने ही पार्टी या फिर घटक दलों के उम्मीदावारों के बागी रूख का सामना करना पड़ सकता है। समय कम रहने की वजह से उनके लिए संभावित बागी उम्मीदवारों को मनाना भी टेढ़ी खीर साबित होगा। टिकट से वंचित संभावित बागी उम्मीदवार भितरघात कर सकते हैं। ऐसी हालत में उन्हें एक साथ दो-दो मोर्चों पर जूझना होगा। एक तो प्रचार-प्रसार का अभियान पूरे दमखम से चलाना होगा ताकि टीआरएस के उम्मीदवारों की वह बराबरी कर सकें और दूसरा, बागी उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को भी सम्मानजनक तरीके से अपने पाले में करना होगा। यह दोनों कार्य महागठबंधन के उम्मीदवारों के लिए आसान नहीं होगा। हैदराबाद के राजनीतिक गलियारों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने 26 सीट महागठबंधन के घटक दलों को देने का फैसला किया है। इनमें से 14 सीट तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी), 8 सीट तेलंगाना जन समिति, 3 सीट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एक सीट हाल में बनी तेलंगाना एंटी पार्टी को दी जाएगी। बाकी 93 सीटों पर कांग्रेस खुद अपने उम्मीदवार खड़ा करेगी। वैसे अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने अभी तक 72 उम्मीदवारों के नाम तय कर लिये हैं लेकिन इसकी घोषणा अभी नहीं की जा रही है। इसे 10 नवम्बर तक के लिए टाल दिया गया है। कहा जा रहा है कि इन नामों का निर्धारण कांग्रेस ने एक अंदरुनी सर्वे के आधार पर किया है। कांग्रेस के कुछ संभावित उम्मीदवार अपने स्तर पर इस सूची के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। जिन उम्मीदवारों को आशंका है कि उनका नाम इस सूची में नहीं है वे अभी से सर्वे रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगाते हुये उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। तेलंगाना में कांग्रेस के इंचार्ज आरसी खुटिया ने इस सर्वे रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से साफ तौर से मना कर दिया है, जिसकी वजह से कुछ संभावित कांग्रेसी उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ अभी से विद्रोह का बिगुल फूंकने की तैयारी में जुट गये हैं। इस संबंध में एक संभावित उम्मीदावार का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्थिति स्पष्ट करने के बजाय पार्टी के अंदर ही असमंजस की स्थिति पैदा कर रहे हैं। कुछ इसी तरह का आलम महागठबंधन के घटक दलों में है। सीपीआई पांच सीटों पर दावेदारी कर रही है जबकि टीडीपी 18 सीट की आस लगाये हुये है। इसी तरह टीजेएस भी 10 सीट चाह रही है। ये दल अभी भी कांग्रेस पर अधिक से अधिक सीट देने के लिए दबाव बनाये हुये हैं। यही वजह है कि महागठबंधन में अभी तक सीटों का स्पष्ट बंटवारा नहीं हो सका है। टीआरएस महागठबंधन में व्याप्त इस स्थिति का भरपूर फायदा उठाने में जुटी हुई है। टीआएस के तमाम नेता अपनी चुनावी सभाओं में एक सुर से महागठबंधन को मौकापरस्त करार देते हुये इसे परस्पर विरोधी विचारधारा वाली पार्टियों का संगम बता रहे हैं, जिनका एक मात्र मकसद सत्ता पर काबिज होना है न कि तेलंगाना के हितों के ख्याल रखना। जिस तरह से कांग्रेस और टीडीपी ने एक दूसरे से हाथ मिलाया है कि उससे तेलंगाना की अवाम भी सकते में है। तेलंगाना में कांग्रेस और टीडीपी का संबंध नाग और नेवले का रहा है। दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे। तेलंगाना की सियासत पर नजर रखने वाले राजनीतिक पंडित भी दबी जुबान से इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि यहां की अवाम को कांग्रेस और टीडीपी की दोस्ती हजम नहीं हो रही है। ऐसी हालत में दोनों पार्टियों को एक दूसरे के पक्ष में अपने वोट शिफ्ट करने में कहां तक सफलता मिलेगी, यह कह पाना मुश्किल है। महागठबंधन के तमाम उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के बाद यदि विभिन्न घटक दलों में बगावत की आंधी चलने लगे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/आलोक/सुनीत
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