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तेलंगाना : ' महाकोटमी ' ने बढ़ाईं केसीआर की मुश्किलें

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 4 2018 9:09AM
तेलंगाना : ' महाकोटमी ' ने बढ़ाईं केसीआर की मुश्किलें
हैदराबाद, 04 नवम्बर (हि.स.)। तेलंगाना में हो रहे विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (महाकोटमी) ने सभी दलों के राजनैतिक समीकरण बिगाड़ दिए हैं। इसके आने से सबसे ज्यादा मुश्किल में के. चन्द्रशेखर राव (केसीआर) हैं। इन्हें अपने बागी कार्यकर्ताओं के साथ महाकोटमी की संयुक्त ताकत से एक साथ निपटना होगा। पिछले चार सालों में केसीआर ने राज्य की छोटी विपक्षी पार्टियों को एकदम कुचल दिया है। तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी), वाईएसआर, कम्युनिस्ट पार्टी (सीपी) जैसे दलों का जमीन पर अस्तित्व काफी हद तक समाप्त हो गया है। बावजूद इनके महाकोटमी बनने के बाद छोटे-छोटे समूह इनके साथ आने लगे हैं और के. चंद्रशेखर राव की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। इतना ही नहीं, टिकट न मिलने से नाराज तेलंगाना राज्य के संघर्षों के साथियों ने इनसे दूरी बनानी शुरू कर दी है। कइयों ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और अब वे निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरसी) से बागी होकर कोरुकंटी चंदर ने भी गोदावरी विधानसभा से निर्दल उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमाने का फैसला सुना दिया है। क्षेत्र में इनकी लोकप्रियता भी काफी दिख रही है। महाकोटमी द्वारा मौका दिए जाने का विकल्प भी इन्होंने खुला रखा है। मतदाता भी इनके अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं । लोगों का मानना है कि क्षेत्रीय दलों के सफाए से कांग्रेस की ताकत बढ़ी है। महाकोटमी की अगुवाई करने वाली कांग्रेस अब सभी छोटे दलों को अपने पाले में लाकर एक मजबूत स्थिति का चुनावी समीकरण तैयार करने जुटी है। हालांकि तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) का सहयोग मिलने का इसका कोई फायदा नहीं होगा, फिर भी पिछले चुनाव के बिगड़े मतदान प्रतिशत को सुधारने में काफी सहूलियत होगी और इसका फायदा कांग्रेस को मिलना तय माना जा रहा है। इधर, चुनाव परिणाम आने में मात्र 5 सप्ताह बाकी हैं और राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। राज्य में चुनाव अब टीआरएस और अन्य के बीच द्वी-ध्रुवीय लड़ाई होने की गुंजाइश बढ़ गयी है। गोदावरी कनि के पी. अयोध्या, के. रंगारेड्डी आदि की मानें तो महाकोटमी ने विधानसभा के चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। केसीआर की मुश्किलें बढ़ने लगीं हैं। बागी होकर चुनाव लड़ने वालों ने भी समस्या खड़ी की है। हिन्दुस्थान समाचार/आमोद/शंकर
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