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तेलंगाना चुनाव : नक्सलियों का 'पोस्टर वार', चुनाव के बहिष्कार की धमकी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Nov 2 2018 7:24PM
तेलंगाना चुनाव : नक्सलियों का 'पोस्टर वार', चुनाव के  बहिष्कार की धमकी
हैदराबाद, 02 नवंबर (हि.स.)। तेलंगाना विधानसभा चुनाव में नक्सलियों की सरगर्मियों पर लगाम लगाने के लिए एक ओर पुलिस महकमा कमर कसे हुये है तो दूसरी ओर नक्सली भी अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुये अभी से ही वोटरों को चुनाव का बहिष्कार करने के लिए पोस्टरों के सहारे डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। डीजीपी एम महेंद्र रेडी ने गुरुवार को जैसे ही पुलिस महकमा के आला अधिकारियों के साथ बैठक करके उन्हें नक्सली इलाकों, खासकर महाराष्ट्र की सीमा से लगे इलाकों में चौकस रहने के साथ-साथ महाराष्ट्र के आला अधिकारियों के साथ मिल-बैठकर तेलंगाना में नक्सलियों के प्रवेश को रोकने के लिए रणनीति बनाने की हिदायत दी वैसे ही नक्सलियों ने रातो-रात अपने प्रभाव वाले इलाकों में पोस्टर और पर्चों के जरिये लोगों को चुनावी प्रक्रिया से दूर रहने के लिए आगाह करते हुये साफ कर दिया कि लोकतंत्र के इस महापर्व में बाधा डालने में वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। नक्सलियों का इरादा साफ है कि चुनाव प्रक्रिया से अधिक से अधिक लोगों को दूर रखना और अपने प्रभाव वाले क्षेत्र का विस्तार करना। भद्राद्री कोठोगुडम और जयशंकर भुपलपल्ली जिले के कई विधानसभा क्षेत्रों में नक्सल इलाकों में सीपीआईएम (माओवादी) की ओर से न सिर्फ पोस्टर चिपकाये गये हैं बल्कि बड़ी तादात में जहां-तहां पर्चे भी फेंके हैं। इन पोस्टरों और पर्चों में लोगों से साफतौर पर अपील की गई है कि वे खुद को वर्तमान चुनावी प्रक्रिया से दूर रखें। इन पर्चों में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (टीआरएस), भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) कांग्रेस समेत भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की भी आलोचना की गई है। टीआरएस, बीजेपी, कांग्रेस और टीडीपी को जहां पूंजीपतियों की पार्टी करार दिया गया है, वहीं सीपीआई और सीपीएम के बारे में कहा है गया है कि इन दोनों वामपंथी पार्टियों ने जनवादी संघर्ष का रास्ता छोड़कर संसदीय लोकतंत्र का रास्ता अख्तियार करके सर्वहारा को धोखा दिया है । इसलिए वर्तमान चुनाव में इनका बहिष्कार करना जरूरी है । पोस्टरों ओर पर्चों में चुनाव में शिरकत करने वाले लोगों को खास अंदाज में इसका नतीजा भुगतने की भी धमकी दी गई है। अपनी धमकी को अमलीजामा पहनाने के लिए नक्सली कितना सक्रिय हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक सप्ताह में भद्राचलम सब डिवीजन के चार्ला मंडल में विस्फोटक सामग्री के साथ छह नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है । जानकारी के मुताबिक पुलिस को खुफिया सूचना मिली है कि चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में नक्सली महाराष्ट्र से तेलंगाना में प्रवेश करने की योजना बना रहे हैं । माओवादियों ने तेलंगाना और महाराष्ट्र से सटे कुछ इलाकों को अपनी ओर से मुक्त (लिबरेटेड) घोषित कर रखा है। माओवादी नक्सली एक खास रणनीति के तहत आम लोगों के बीच पैठ बनाकर उन्हीं की वेशभूषा में मुक्त घोषित किये गये अपने इलाकों पर न सिर्फ पकड़ मजबूत बनाने की फिराक में हैं बल्कि अपने प्रभाव क्षेत्र में इजाफा करना चाह रहे हैं। चुनाव के दौरान अपने प्रभाव को दिखाने के लिए वे पोस्टरों और पर्चों के माध्यम से लोगों को धमका रहे हैं। नक्सलियों के इरादों को भांपते हुये डीजीपी एम महेंद्र रेड्डी ने भी अपनी रणनीति तय कर ली है। एक ओर वह माओवादी नक्सलियों को महाराष्ट्र की सीमा से तेलंगाना में प्रवेश करने से पहले ही रोक देना चाहते हैं तो दूसरी और तेलंगाना में सक्रिया नक्सलियों को दबोचने की रणनीति अपना कर चुनाव के दौरान की जानी वाली उनकी गतिविधियों पर पूरी तरह से विराम लगाने की रणनीति पर चल रहे हैं। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डीजीपी एम महेंद्र रेड्डी ने गुरुवार को रामागुंडम पुलिस कमिश्नरी के पुलिस अफसरों को साफ शब्दों में हिदायत दी है कि महाराष्ट्र पुलिस के साथ तालमेल करके महाराष्ट्र के नक्सलियों को तेलंगाना में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया जाये। इसके साथ ही तेलंगाना में सक्रिय माओवादियों को टोह लेने के लिए एक खास खुफिया दस्ते का भी गठन किया गया है। इस खुफिया दस्ते में उन्होंने लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित करने को कहा है ताकि चुनाव से पूर्व अधिक से अधिक नक्सलियों को दबोचा जा सके। हिन्दुस्थान समाचार/आलोक/शंकर
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