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निर्मल हृदय में बच्चा बेचे जाने का धंधा पुराना, फंडिंग की होगी सीबीआई जांच

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jul 11 2018 4:25PM
निर्मल हृदय में बच्चा बेचे जाने का धंधा पुराना, फंडिंग की होगी सीबीआई जांच

रांची, 11 जुलाई (राजीव मिश्र)| चैरिटी होम निर्मल हृदय से बच्चों के बेचने के खुलासे के बाद झारखंड के डीजीपी डीके पांडेय ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं के फंड को मिले विदेशी फंड की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की है। इसके साथ ही जांच पूरी होने तक इन संस्थाओं के बैंक एकाउंट फ्रीज कर दिये जाने का आग्रह किया है।

10 जुलाई को गृह सचिव एसकेजी रहाटे को पत्र लिखे पत्र में डीजीपी पांडे ने कहा है कि इन संस्थाओं को एफसीआरए (द फॉरेन कंट्रिब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट) के तहत 2006 से 2011 के बीच 9.27 अरब रुपये विदेशों से मिले हैं। इसकी सूक्ष्मता से जांच कराई जानी चाहिए क्योंकि इन राशियों का इस्तेमाल मूल उद्देश्य से अलग हटकर किया गया है। इसलिए इसके एफसीआरए निबंधन कर देना चाहिए। नियम के अनुसार एक करोड़ तक की राशि की जांच राज्य की एजेंसी कर सकती है, लेकिन यह राशि बहुत बड़ी है| इसलिए इसकी जांच का अधिकार केंद्र को है। इसके साथ ही मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय चैरिटी होम के कई दस्तावेज गायब हैं। अप्रैल 2016 से पहले से पहले के एक भी दस्तावेज नहीं मिले। जिला प्रशासन की टीम की जांच में यह बात सामने आई। प्रशासन अब इसकी जांच एजेंसियोंं से कराएगा।

सेवा के नाम पर मिशनरीज ऑफ चैरिटी पैसे लेकर नवजातों को बेचने का गैरकानूनी धंधा कर रही है। मजबूर नाबालिग गर्भवतियों के बच्चों को 50 हजार से 1.20 लाख रुपये में बेचा जाता है। यहां यह धंधा कोई नया नहीं हो रहा है। हां, साक्ष्य के साथ पहली बार गिरफ्तारी हुई है। छापेमारी के दौरान 1.48 लाख रुपये भी बरामद हुए, जो बच्चा बेचने की एवज में मिले थे। चैरिटी होम निर्मल हृदय की सिस्टर कौंसिलिया और स्टाफ अनिमा इंदवार जेल में हैं। दोनों ने लिखित रूप में गलतियां कबूल भी की हैं। हिरासत में लेकर निर्मल हृदय की हेड सिस्टर मेरिडियन से भी पूछताछ हो चुकी है। इसी वर्ष अब तक चार बच्चों को बेचा जा चुका है। हालांकि उनमें से दो बच्चों को बरामद किया जा चुका है। शेष की खोज जारी है। इसके साथ ही निर्मल हृदय से 11 गर्भवती लड़कियों को संरक्षण में लेकर संप्रेषण गृह (नामकुम) भेजा गया। इनमें कुछ नाबालिग भी हैं।

हिनू के शिशु सदन के एक से चार साल के 22 बच्चों को दूसरी जगह शिफ्ट कर उसे सील कर दिया गया, लेकिन मानसिक रूप बीमार 75 महिलाओं के वहां रहने के कारण चैरिटी होम निर्मल हृदय सील नहीं किया गया। अब यह मामला देशव्यापी मानव तस्करी का खुलासा कर रहा है।

झारखंड ही नहीं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल समेत कई राज्यों के तार इससे जुड़ने लगे हैं। सभी राज्यों में बच्चों को बेचा गया है। डिलीवरी के बाद सैकड़ों बच्चे गायब हैं। उनकी जांच की जा रही है। बच्चों के बेचने के धंधे के पर्दाफाश के बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास के निर्देश पर मिशनरीज ऑफ चैरिटी की राज्यभर में स्थित शाखाओं, शेल्टर एवं एडॉप्शन होम में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। कहीं से तीन-तीन साल के दस्तावेज गायब हैं तो कहीं से बच्चे। इसके अलावा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने भी मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को मिशनरी ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय सहित अन्य शाखाओं के साथ ही पूरे राज्य में सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित बाल गृहों, सीसीआईएस शेल्टर होम, ओपन होम की उच्चस्तरीय जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमेटी) अध्यक्ष रूपा कुमारी, सदस्य तनुश्री सरकार, प्रतिमा तिवारी, डीएसडब्ल्यू कंचन सिंह और डीसीपीओ की तत्परता से बच्चा बेचने के रहस्य का खुलासा हुआ।

सीडब्ल्यूसी ने चार जुलाई को रांची के कोतवाली थाना में चैरिटी होम निर्मल हृदय के खिलाफ उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ओबरा की दंपती को एक लाख 20 हजार रुपये में नवजात को बेचने को लेकर चार जुलाई को प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने सिस्टर कौंसिलिया बाखला और अमिता इंदवार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार होने के बाद निर्मल हृदय की सिस्टर कौंसिलिया बाखला और अमिता इंदवार ने खुद सीडब्ल्यूसी में सब कुछ लिखित में कबूल किया है। हेड सिस्टर मेरिडियन को भी हिरासत में लिया गया, पर लंबी पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।

सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष रूपा कुमारी ने सदस्यों के साथ चार जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मिशनरीज ऑफ चैरिटी के बच्चा बेचने के मामले का खुलासा किया। कहा, मिशनरी ऑफ चैरिटी में काम करने वाली अनिमा इंदवार संस्था के सिस्टर के कहने पर बच्चे को बेचती थी। जो अविवाहित लड़कियां मां बनने वाली होती हैं, उन लोगों से संपर्क कर निर्मल हृदय में आश्रय दिया जाता है और बच्चा होने के बाद उसे सीडब्ल्यूसी में पेश किये बिना लोगों को बेच दिया जाता है। बच्चों का सौदा 50 हजार से 1.20 लाख रुपये में किया जाता है।

उन्होंने बताया कि सीडब्ल्यूसी कुछ दिनों से इस संस्था की निगरानी कर रही थी। सीडब्ल्यूसी ने 19 मार्च 2018 को गुमला की दुष्कर्म पीड़ित नाबालिग को निर्मल हृदय संस्था को सौंपा। वह अविवाहिता मां बनने वाली थी। जब डिलिवरी का समय आया तो उसे सदर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस दौरान संस्था की अनिमा इंदवार साथ थी। पीड़िता ने एक मई को लड़के को जन्म दिया। जब बच्चा एक माह का हो गया तो संस्था वालों ने एक लाख 20 हजार रुपये लेकर 14 मई को उत्तर प्रदेश के ओबरा निवासी सौरभ कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रीति अग्रवाल को बेच दिया।

जब सीडब्ल्यूसी ने निर्मल हृदय पर दबाव डाला तो संस्था ने बच्चे को कोर्ट में पेश करने के नाम पर सौरभ अग्रवाल और प्रीति को बच्चे के साथ रांची बुलवा लिया। जब सौरभ और प्रीति बच्चे के साथ कोर्ट में पहुंचे तो उनके साथ अनिमा इंदवार भी थी। इसी बीच कोर्ट में पेश करने के नाम पर बच्चे को लेकर अनिमा फरार हो गई। बाद में अनिमा को गिरफ्तार किया गया।

सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष ने जब कड़ाई से अनिमा से पूछताछ शुरू की तो परत-दर-परत मामले से पर्दा उठता चला गया। अनिमा इंदवार ने कहा कि निर्मल हृदय की सिस्टर कौंसिलिया के साथ मिलकर कई वर्षों से बच्चे बेचने का काम किया जा रहा था। मेरी निगरानी में चार बच्चों का सौदा किया गया है। उनमें तीन बच्चों को 50-50 हजार और एक बच्चे को 1.20 लाख में बेचा गया है। इसमें 90 हजार रुपये सिस्टर को दिए गये। 20 हजार स्टाफ को और 10 हजार रुपये गार्ड को दिये गये। यह भी जानकारी दी कि बेचे जाने वाला बच्चा संस्था में सुरक्षित है। गिरफ्तार अनिमा ने पुलिस के समक्ष कबूल किया है कि कुछ अन्य सिस्टर्स पिछले कई सालों से ये काम कर रही हैं और अब तक यहां से चार बच्चों को बेचा जा चुका है। ये बच्चे रांची के मोरहाबादी, कांटाटोली के अलावा अन्य जगहों में बेचे गए हैं। हालांकि मोरहाबादी वाले बच्चे को पुलिस ने 8 जुलाई को बरामद कर लिया।

सेवा के नाम पर कई वर्षों से चल रहा ये खेल

स्पेशल ब्रांच ने 2016 में ही निर्मल हृदय से बच्चों को बेचने की दी थी रिपोर्ट मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय चैरिटी होम से नवजातों को बेचने की बात पहली बार सामने नहीं आयी है। 2016 में ही विशेष शाखा ने सरकार को रिपोर्ट भेजकर कहा था कि यहां से बच्चों को बेचने का धंधा किया जा रहा है। जांच में पाया गया कि 2016 में निर्मल हृदय में 108 गर्भती महिलाएं थीं और संस्था ने मात्र 10 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया। शेष 98 बच्चों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

आशंका है कि इन्हें दूसरे राज्यों में बेच दिया गया। ये रिपोर्ट दोबारा सरकार के पास भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि एजेंट बिन ब्याही आदिवासी गर्भवती लड़कियों से संपर्क कर झांसे में लेते हैं। उन्हें मुफ्त में रहने, डिलिवरी का खर्च उठाने सहित अन्य सुविधाओं का प्रलोभन दिया जाता है। उनसे अंग्रेजी में लिखे कागज पर हस्ताक्षर करवाया जाता है। उसमें लिखा होता है कि जन्म के बाद बच्चे पर उनका कोई अधिकार नहीं होगा। 

झारखंड सरकार मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित निर्मल हृदय को बच्चों के एडॉप्शन के लिए हर साल 10.15 लाख रुपये अनुदान देती है।

26 नवजातों की जानकारी नहीं दी, एक और बच्चे के बेचे जाने का शक

रांची के डीसी राय महिमापत रे ने कहा कि बाल गृहों में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी, लेकिन इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी हो रही है इसका अंदाजा नहीं था। जिला प्रशासन की जांच में जिन बाल गृहों में सबसे ज्यादा खामियां पाई गई हैं, उनके संबंध में कड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। जिन संस्थाओं को सरकार फंड दे रही है, उसे दिया जाए या नहीं, इस पर भी विचार किया जा रहा है। इसके बाद डीसी ने 22 जून को 8 पदाधिकारियों की टीम गठित की। टीम को जिले के सभी 17 बाल गृहों और एक नारी निकेतन की जांच का आदेश दिया गया। इसके बाद टीम ने 23 और 29 जून को जांच की। फाइलें जब्त की गई थीं। संस्था को शोकॉज भी किया गया था।

निर्मल हृदय में 29 जून की जांच में पाया गया कि दो जनवरी 2017 से अब तक 26 बच्चों की सीडब्ल्यूसी को जानकारी नहीं दी गई। इनमें से दो की मौत हो चुकी है। यह जानकारी संस्था के रजिस्टर से मिली। जिला प्रशासन को होम में रहनेवाली एक विक्षिप्त महिला का बच्चा बेचे जाने का भी शक है। महिला आंध्र प्रदेश की है| संस्था के मुताबिक बच्चा वहां की सीडब्ल्यूसी को दिया गया है। लेकिन, इसका रिकॉर्ड नहीं मिला। इस बीच उत्तर प्रदेश के दंपती जब सामने आए तब मामले का खुलासा हो गया।

निर्मल हृदय में जन्मे 208 बच्चों का पता नहीं

पुलिस और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की जांच के दौरान जब्त कागजात के अनुसार 2015 से 2018 तक मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय और शिशु सदन में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया। डिलिवरी के बाद इनमें 170 बच्चों के बारे में सीडब्ल्यूसी को जानकारी दी गयी, लेकिन शेष 280 बच्चों के बारे में कोई अता-पता नहीं चला। बच्चे कहां हैं, इसकी जांच जारी है।

हर जिले में होगा सीडब्ल्यूसी का गठन, 15 अगस्त तक जांच रिपोर्ट दें :

सीएम नवजात शिशुओं की खरीद-बिक्री तथा गर्भवती महिलाओं के शोषण जैसे कार्य में लगी स्वयंसेवी संस्थाओं को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही हर जिले में सीडब्ल्यूसी का गठन किया जाएगा। झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग पूरे राज्य में ऐसी स्वयंसेवी संस्थाओं की जांच करेगा तथा गलत कार्यों में लिप्त संस्थाओं को चिह्नित कर 15 अगस्त तक सरकार को रिपोर्ट देगा। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 10 जुलाई को झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की समीक्षा बैठक करते हुए यह निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल शोषण एवं अनैतिक कार्यों में लिप्त कोई भी संस्था हो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आयोग से पूरी बारीकी के साथ पारदर्शिता से इसकी जांच करने को कहा है।

हिन्दुस्थान समाचार/राजीव

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