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बिड़ला घराना नागदा में लगा रहा 2500 करोड़ का उद्योग

By HindusthanSamachar | Publish Date: Mar 13 2019 6:02PM
बिड़ला घराना नागदा में लगा रहा 2500 करोड़ का उद्योग

कैलाश

नागदा, 13 मार्च (हि.स.)। देश का जाना-माना बिड़ला घराना मप्र के उज्जैन जिले में स्थित नागदा में उद्योग लगाने के लिए कदम बढ़ा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 2500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। वर्तमान ग्रेसिम संयत्र में इस नवीन प्रोजेक्ट को विस्तार के साथ जोड़ा जा रहा है। ग्रेसिम प्रबंधन ने इस योजना में लगभग 2820 लोगों को रोजगार मुहैया कराने का दावा किया है। इस प्रोजेक्ट की पर कार्य शुरू हो गया है। जिसके दस्तावेज प्रशासनिक प्रक्रिया में पेश भी कर दिए गए हैं। सारे अभिलेख हिंदुस्थान समाचार संवादाता नागदा के पास सुरक्षित है। प्रदूषण विभाग, कलेक्टर कार्यालय उज्जैन एवं नगरपालिका नागदा आदि में प्रस्तुत अभिेलेखों में ग्रेसिम प्रबंधन ने शहर के समीप गांव मेहतवास बिड़लागा्रम की भूमि पर इस प्रोजेक्ट को मूर्तरूप देने की मंशा जताई है। यह पूरी कार्रवाई भारत सरकार द्धारा गठित एक्सपर्ट अप्राईजल कमेटी में पर्यावरण स्वीकृति अर्थात क्लीरेंस का एक हिस्सा माना जा रहा है।

इस नवीन उद्योग में कपड़ा निर्माण में प्रयुक्त स्टेपल फाईबर का उत्पादन होगा। एक ओर विशिष्ट एक्सल फाईबर प्रोडक्शन को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जा रहा है। उद्योग स्थापना के लिए बिजली की आपूर्ति के लिए 55 मेगावाट क्षमता का पावर सयंत्र भी प्रस्तावत है। जिससे उद्योग प्लांट में बिजली की आपूर्ति होगी। इसी प्रकार के स्टपेल फाईबर उत्पादन का एक उद्योग ग्रेसिम का पहले से यहां चल रहा है। जिसमें फाईबर उत्पादन क्षमता प्रतिदिन औसतन 400 टन का अनुमान है।

इस प्लांट की स्थापना वर्ष 1956 में हुई थी। उस समय इस उद्योग की नींव बिड़ला घराना के पुरोधा स्व. घश्याम दास बिड़ला व उस समय की कंपनी गवालियर रेयान के सलाहकार स्वं दुर्गाप्रसाद मंडेलिया ने रखी थी। एक बार फिर अब बिड़ला परिवार की तीसरी पीढ़ी ने चबंल नदी किनारें बसे नागदा में उद्योग विस्तार के नाम पर करोड़ों की पूंजी निवेश के लिए कदम बढाए हैं। जिस स्टेपल फाईबर का निर्माण होता है उसमें प्रतिदिन करोड़ों लीटर पानी की खपत होती है। यह सुविधा इस क्षेत्र में बिना किसी बाधा के बिड़ला परिवार को संभव है। संभतया इस बात के एक बार फिर यहां जल आधारित उद्योग की स्थापना के लिए बिड़ला परिवार आगे आया है।

प्रबंधन ने इस नवीन प्रोजेक्ट को अब उद्योग विस्तार का नाम देकर प्रशानिक प्रक्रिया को आगे बढाया है। जिसके लिए प्रदूषण विभाग संभागीय कार्यालय उज्जैन के माध्यम से दावे- आपतियां एवं सुझाव मांगे गए हैं। इस प्रोजेक्ट की योजना के सारे अभिलेख सार्वनजिक कर दिए गए हैं। एसडीम कार्यालय नागदा में 10 अप्रैल 2019 को लोक सुनवाई में जनता से प्राप्त दावे- आपतियां एवं सुझावों का निराकरण होगा। ग्रेसिम की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में असिस्टेंड वाईस प्रेसीडेंट डॉ. आर.सी शुक्ला का नाम उल्लेखित हैं। अभिलेखों के मुताबिक स्टपेल फाईबर के अलावा एक्सल फाइबर का निर्माण भी होगा। आज के युग में इस फाईबर की मांग विदेशों में बड़ी मात्रा में है। इस नवीन प्रोजेक्ट पर प्रतिवर्ष 2 लाख 33 हजार 600 टन स्टेपल फाईबर निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। इसी प्रकार से एक्सल फाईबर प्रतिवर्ष 36 हजार 500 टन की उत्पादन की नीति बनाई गई है। जबकि सल्प्युरिक एसिड का उत्पादन प्रतिवर्ष 2 लाख 20 हजार 825 टन की जानकारी दी गई है।

इस उद्योग में रा- मटेरियल के रूप में बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग होगा। वर्तमान में उद्योग में प्रतिदिन 1.5 एमसीएफ टी प्रतिदिन की खपत जलसंसाधन बता रहा है। इस नवीन प्रोजेक्ट से अब एक बार फिर भारी मात्रा में पानी का दोहन होगा। प्रबंधन ने प्रोजेक्ट दस्तावेजों में नवीन उद्योग में 54, 890 केएलडी अर्थात किलोलीटर पानी प्रतिदिन की आवश्यकता का खुलासा किया है।

प्रशासन के समक्ष दस्तावेजों में प्रबंधन ने यह स्पष्ट किया हैकि पानी की जलापूर्ति शहर से गुजरी चंबल नदी से होगी। यह भी बताया गया कि चंबल नदी पर ग्रेसिम ने अपने जलाशयों को पूर्व से बना रखा है। इसी प्रकार से उद्योग में कच्ची सामग्री के रूप में पानी के अलावा कार्बनडाई सल्फाईड, तथा सल्युरिक एसिड की बड़ी मात्रा में आवश्यकता होगी। हालांकि नई तकनीकी से अब एक्सेल फाइबर का निर्माण सीएसटू गैस के बिना उत्पादन संभव है। लेकिन लाखों टन स्टेपल फाईबर का निर्माण सीएसटू गैस के बिना असंभव है। इसलिए इस गैस का निर्माण भी करने की नीति बनाई गई है। सीएसटू गैस निर्माण के लिए संयत्र स्थापित होंगे। जिसमें 31 हजार 25 टन प्रतिवर्ष का उत्पादन आंका जा रहा है।

रोजगार के अवसर- प्रबंधक ने इस प्रोजेक्ट पर 2820 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का दावा अभिलेखो में किया गया है। इन लोगों को जुटाने का तरीका अन स्किल्ड तथा सेमीस्किल्ड को स्थानीय क्षेत्र से लेने की बात कही जा रही है। जबकि स्किल्ड को बाहर से लिया जाएगा।

भूमि कीआवश्यकता- इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि के लिए गांव मेहतवास बिड़लाग्राम का नाम दिया गया है। लेकिन इस सर्वे की यह भूमि है उसका खुलासा नहीं है। बताया जा रहा हैकि 3 जून 2000 में बंद हुए भारत कॉमर्स उद्योग की भूमि पर इस उद्योग की मशीनों को शोरगुल होगा। लेकिन यह भूमि अभी विवादित है। ग्रेसिम प्रबंधन ने किसी समय इस भूमि को हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशन में नीलामी में खरीदा है। इस भूमि का स्वामित्म को लेकर मजदूर नेता भवानीसिंह शेखावत की आपति पर विवाद खड़ा हुआ था। इस भूमि के असली हकदार को लेकर हाल में मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। मप्र शासन ने सुपीम कोर्ट में भूमि के स्वामित्व को लेकर अपील कर रखी है। ग्रेसिम प्रबंधन के प्रस्तुत दस्तावेजों के मुताबिक इस विस्तार नीति के बाद अब बिड़लाग्राम क्षेत्र में कुल प्लांट का क्षेत्र 196.08 हैक्टेयर होगा। इस कुल क्षेत्र मेें 127.53 प्लांट, कॉलोनी तथा बच्चा हुआ भाग 68.55 हैक्टेयर शामिल है। कानूनी अड़चनों के समाधान के लिए यह भी बताया गया हैकि ग्रीन बेल्ट एरिया आल रेडी पूर्व से विकसित है।

हिन्दुस्थान समाचार

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