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भारतीय भाषाओं के संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर आरएसएस ने जताई चिंता

By HindusthanSamachar | Publish Date: Mar 13 2018 7:47PM
भारतीय भाषाओं के संरक्षण व संवर्द्धन को लेकर आरएसएस ने जताई चिंता
पटना, 13 मार्च (हि.स.)| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाहक डॉ मोहन सिंह तथा संघ के दक्षिण बिहार के सह प्रांत संचालक राजकुमार सिन्हा ने मंगलवार को कहा कि भाषाएँ समाज को जोड़ने के साधन हैं और इसकी इसी ताकत को देखते हुए संघ भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है| नागपुर में नौ से 11 मार्च तक हुए तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में लिए गए प्रस्तावों की चर्चा करते हुए उन्होंने यहाँ कहा कि स्वयंसेवकों सहित समस्त समाज को अपने पारिवारिक जीवन में वार्तालाप तथा दैनन्दिन व्यवहार में मातृभाषा को प्राथमिकता देनी चाहिये। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया , प्रशासन और प्रतियोगी परीक्षाओं को भारतीय भाषाओं में कराने पर बल देते हुआ उन्होंने कहा कि संघ के प्रयासों के कारण संघ लोक सेवा आयोग में भारत की नौ भाषाओं को स्थान मिला | देश की सभी भाषाओं का समर्थन और सम्मान करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी व्यक्ति एवं समाज की पहचान का एक महत्वपूर्ण घटक और संस्कृति की सजीव संवाहिका है। उन्होंने कहा कि देश में प्रचलित विविध भाषाएँ और बोलियाँ देश की संस्कृति, उदात्त परंपराओं, उत्कृष्ट ज्ञान एवं विपुल साहित्य को अक्षुण्ण बनाये रखने के साथ ही वैचारिक नवसृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | भारतीय भाषाओं और बोलियों के चलन तथा उपयोग में आ रही कमी, उनके शब्दों का विलोपन तथा विदेशी भाषाओं के शब्दों से प्रतिस्थापन को गम्भीर चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि आज अनेक भाषाएँ एवं बोलियाँ विलुप्त हो चुकी हैं और कई अन्य का अस्तित्व संकट में है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधिसभा का यह मानना है कि देश की विविध भाषाओं तथा बोलियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिये सरकारों, अन्य नीति निर्धारकों और स्वैच्छिक संगठनों सहित समस्त समाज को सभी सम्भव प्रयास करने चाहिये। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रतिनिधिसभा ने प्रस्ताव पारित कर देश में प्राथमिक शिक्षण मातृभाषा या अन्य किसी भारतीय भाषा में देने के लिए अभिभावकोण से अपना मानस बनाने तथा सरकारों से इस दिशा में उचित नीतियों का निर्माण कर आवश्यक प्रावधान करने को कहा। तकनीकी शिक्षा , आयुर्विज्ञान शिक्षा सहित उच्च शिक्षा में शिक्षण तथा परीक्षा भारतीय भाषाओं में भी सुलभ कराये जाने को कहा । राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) एवं संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के भारतीय भाषाओं में कराए किये जाने का स्वागत करते हुए अन्य प्रवेश एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में भी यह व्यवस्था कराये जाने की आवश्यकता बतलाते हुए उन्होंने कहा कि सभी शासकीय तथा न्यायिक कार्यों में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिये और शासकीय व निजी क्षेत्रों में नियुक्तियों, पदोन्नतियों तथा सभी प्रकार के कामकाज में अंग्रेजी भाषा की प्राथमिकता न रखते हुये भारतीय भाषाओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा ने स्वयंसेवकों सहित समस्त समाज को अपने पारिवारिक जीवन में वार्तालाप तथा दैनन्दिन व्यवहार में मातृभाषा को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि संघ का यह मानना है कि भारतीय भाषाओं तथा बोलियों के साहित्य-संग्रह व पठन-पाठन की परम्परा का विकास के साथ साथ इनके नाटकों, संगीत, लोककलाओं आदि को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिये। पारंपरिक रूप से भारत में भाषाओं को समाज को जोड़ने का साधन बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी को अपनी मातृभाषा का स्वाभिमान रखते हुए अन्य सभी भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिये। केन्द्र व राज्य सरकारों को सभी भारतीय भाषाओं, बोलियों तथा लिपियों के संरक्षण और संवर्द्धन हेतु प्रभावी प्रयास करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा बहुविध ज्ञान को अर्जित करने के लिए विश्व की विभिन्न भाषाओं को सीखने का समर्थण करती है । उन्होंने कहा कि प्रतिनिधि सभा भारत जैसे बहुभाषी देश में अपनी संस्कृति की संवाहिका, सभी भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्द्धन को परम आवश्यक मानते हुए कहा कि प्रतिनिधि सभा ने सरकारों, स्वैच्छिक संगठनों, जनसंचार माध्यमों, पंथ-संप्रदायों के संगठनों, शिक्षण संस्थाओं तथा प्रबुद्धवर्ग सहित संपूर्ण समाज का रोज़ के जीवन में भारतीय भाषाओं के उपयोग एवं उनके व्याकरण, शब्द चयन और लिपि में परिशुद्धता सुनिश्चित करते हुये उनके संवर्द्धन का हर सम्भव प्रयास करने का आह्वान किया । हिन्दुस्थान समाचार / रजनी/शंकर
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