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एम एस स्वामीनाथन विश्व कृषि पुरस्कार से होंगे सम्मानित, हिन्दुस्थान समाचार से विशष बातचीत

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 25 2018 2:50PM
एम एस स्वामीनाथन विश्व कृषि पुरस्कार से होंगे सम्मानित, हिन्दुस्थान समाचार से विशष बातचीत

आशुतोष

नई दिल्ली। भारत की हरित क्रांति के चीफ आर्किटेक्ट एम एस स्वामीनाथन को पहले विश्व कृषि पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान समय में स्वामीनाथन सबसे प्रभावी कृषि एंव पर्यावरण वैज्ञानिक हैं जो भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए हरित क्रांति लाने में सक्रिय रहे हैं।

स्वामीनाथन को यह पुरस्कार 26 अक्टूबर शुक्रवार को उपराष्ट्रपति वैकेंया नायडू के द्वारा दिया जाएगा। विश्व कृषि पुरस्कार की ज्यूरी में 11 लोग हैं। इनमें चार भारतीय भी शामिल हैं। इन भारतीयों में महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, खाद्य प्रसंस्करण विभाग के सचिव, डीएआरआई और आईसीएआर के सचिव तथा नाबार्ड के चेयरमैन शामिल हैं। इससे पहले भी स्वामीनाथन को कई सम्मान दिए जा चुके हैं जिनमे से रमन मैग्सेसे पुरस्कार, प्रथम वर्ल्ड फूड प्राइज, इंदिरा गांधी प्राइज फॉर पीस, एलबर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड साइंस अवार्ड प्रमुख हैं।

एम.एस स्वामीनाथन की 'हिन्दुस्थान समाचार' से विशष बातचीत

प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन ने कहा कि किसानों को उनके फसलों का उचित मूल्य मिलना चाहिए। साथ ही कृषि के क्षेत्र जो युवा पीढ़ी आगे आ रही है, उसको हर संभव प्रोत्साहन की जरूरत है। स्वामीनाथन ने कहा कि देश में हरित क्रांति के बाद से भारत कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।

वर्तमान सरकार किसानों के हित में संतोषजनक कार्य कर रही है लेकिन अभी बहुत सारे कार्य तेजी से करने की जरूरत है। बिगत कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ी हैं। इसकी एक वजह जलवायु परिवर्तन भी है। किसान और सरकार के बीच आज भी संवाद की कमी है। इसको मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि भारत के किसानों की आत्मनिर्भरता के लिए वैश्विक बाजार से उन्हें जोड़ना आवश्यक है। किसान कृषि कार्य सुगमता से कर सके, इसके लिए सरकार को हर संभव तकनीक उपलब्ध कराने की जरूरत है।

कृषि के क्षेत्र में महिलाओं के लिए माकूल वातावरण होना चाहिए। किसान उद्यमी को अधिक से अधिक प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। किसानों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाएं उन तक पहुंचें, इसके लिए एक मजबूत तंत्र की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन से कृषि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाओं के बारे में दुनिया के वैज्ञानिकों को चिंतन करना चाहिए।

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