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आधार मामला : सिब्बल की दलीलें पूरी, अब गोपाल सुब्रमण्यम की बारी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 13 2018 8:36PM
आधार मामला : सिब्बल की दलीलें पूरी, अब गोपाल सुब्रमण्यम की बारी

नई दिल्ली, (हि.स.)। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देनेवाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आज याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आधार हमारे मौलिक अधिकारों और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि आधार एक्ट संविधान की धारा 14 और 21 का उल्लंघन करता है। आज कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें खत्म कर लीं। आज एक और याचिकाकर्ता के वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने भी अपनी दलीलें शुरु की। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।

 
आज बहस की शुरुआत करते हुए कपिल सिब्बल ने आधार एक्ट की तुलना इजरायल के बायोमेट्रिक डाटाबेस लॉ से की। उन्होंने कहा कि इजरायल के कानून में पहचान पत्र स्वैच्छिक है लेकिन आधार में ऐसा नहीं है। इजरायल के कानून में सहमति का कंसेप्ट आधार एक्ट की तरह अस्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायल के नागरिकों का बायोमेट्रिक डाटा उसी खास जरुरत के लिए इस्तेमाल जिसके लिए उसे संग्रह किया जाता है। उस डाटा तक पहुंच भी खास परिस्थितियों में ही होती है। वहां मेटाडाटा का कलेक्शन नहीं होता है।
 
कपिल सिब्बल ने कहा कि आधार के जरिये आप हमारे आनेवाली पीढ़ी के अधिकारों को सरेंडर कर रहे हैं। ये असंवैधानिक है। इसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति आधार से इनकार करता है तो उसे सुविधाएं नहीं मिलेंगी। सिब्बल ने कहा कि आधार से हमारा स्टेटस स्थापित नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब हम अपनी पहचान साबित करेंगे तब हम सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि कोई भी कानून आपके एक मौलिक अधिकार के बदले दूसरे मौलिक अधिकार को नहीं ले सकता है।
 
कपिल सिब्बल ने आधार एक्ट के तहत नागरिकों के एनरॉलमेंट के दौरान ऑथेंटिकेशन पर चर्चा करते हुए कहा कि सब्सिडी और दूसरी सेवाओं को आधार से लिंक कर दिया गया है। तब लोगों से ली गई सहमति की यहां क्या प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा कि पहचान और ऑथेंटिकेशन रिकॉर्ड की गोपनीयता राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भंग की जा सकती है और इस प्रावधान का दुरुपयोग किया जा सकता है।
 
उन्होंने निजता के अधिकार के फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि सूचना ही ताकत है। फैसले में कहा गया है कि वर्तमान समय सूचना का है और सूचना ही ज्ञान है। उन्होंने फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी टैक्सी कंपनी उबेर के पास कोई वाहन नहीं है। दुनिया का सबसे पोपुलर मीडिया मालिक फेसबुक का अपना कोई कंटेट नहीं है। 
 
सिब्बल ने कहा कि जो भी युजर किसी वेबसाइट का इस्तेमाल करता है वो वहां अपना इलेक्ट्रॉनिक ट्रैक छोड़ता है। इन इलेक्ट्रॉनिक ट्रैक की मदद से किसी व्यक्ति की रुचियों के बारे में जाना जा सकता है। वे लोगों के व्यक्तित्व की प्रकृति का खुलासा करते हैं। वे खानपान की आदतों, उनकी भाषा, स्वास्थ्य, आदतें, सेक्सुअल प्राथमिकता, दोस्त और राजनीतिक विचारधारा का खुलासा करते हैं।
 
उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां आधार एक्ट लोगों के हितों के लिए बताया जा रहा है| दूसरी तरफ यह लोगों के गोपनीय व्यक्तिगत सूचना को सार्वजनिक कर रहा है। कोई व्यक्ति कहां जा रहा है ये सार्वजनिक हित में कैसे हो सकता है। उन्होंने हाल की एक घटना का जिक्र किया जिसमें एक महिला को आधार नहीं होने पर अस्पताल के बाहर बच्चे को जन्म देना पड़ा। कपिल सिब्बल ने इस बात पर सहमति जताई कि राष्ट्रीय पहचान पत्र होना चाहिए लेकिन संवेदनशील बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक डाटा के जरिये राज्य द्वारा नियंत्रित करने पर चिंता जताई। सिब्बल ने कहा कि आधार एक्ट की धारा 3 के तहत भले ही इसे मुफ्त और स्वैच्छिक कहा गया है लेकिन इसका स्वरुप अनिवार्य हो गया है।
 
सिब्बल की दलील खत्म होने के बाद एक याचिकाकर्ता की ओर से गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा कि तकनीकी विकास के दौर में संविधान की भी रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निजता के अधिकार के फैसले में साफ कहा गया कि मौलिक अधिकारों में कोई छेड़छाड़ नहीं किया जा सकता है।
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