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पूर्व केन्द्रीय मंत्री चिदंबरम की पत्नी नलिनी की बढ़ी मुसीबत, सीबीआई ने पेश की चार्जसीट

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jan 11 2019 8:09PM
पूर्व केन्द्रीय मंत्री चिदंबरम की पत्नी नलिनी की बढ़ी मुसीबत, सीबीआई ने पेश की चार्जसीट

ओम

कोलकाता, 11 जनवरी (हि.स.)। पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के बारासात स्थित सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट पेश की है।

चार साल से सारदा चिटफंड मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने बताया है कि आरोपित नलिनी चिदंबरम ने सारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन से 1.36 करोड़ रुपये की धनराशि ली थी। सीबीआई ने चार्जसीट में कहा है कि नलिनी चिदंबरम ने सारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन से 1.36 करोड़ रुपये की धनराशि ली थी। बदले में बाजार नियामक संस्था सेबी के अधिकारियों को मैनेज करने का आश्वासन दिया था। यानि चिटफंड कंपनी के गैरकानूनी कारोबार को अवैध तरीके से चलने देने के लिए सेबी के अधिकारियों को घूस आदि देकर मैनेज करने का भरोसा नलिनी चिदंबरम ने दिया था।

नलिनी ने रुपये वर्ष 2010-2012 के दौरान लिए थे। सीबीआई के अनुसार, सारदा प्रमुख सुदीप्त सेन और अन्य लोगों से पूछताछ के बाद यह पता चला था कि नलिनी चिदंबरम के खाते में सारदा समूह की ओर से 1.36 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं। नलिनी को पूछताछ के लिए तलब किया गया, लेकिन वह हाजिर नहीं हुई बल्कि उन्होंने मीडिया के जरिए दावा किया कि सारदा समूह से जो भी रुपये लिए हैं, वह कानूनी सलाह देने की फीस के रूप में था। चूंकि नलिनी चिदंबरम अधिवक्ता भी हैं, इसलिए वह कथित तौर पर सारदा समूह की कानूनी सलाहकार थीं। यह अलग बात है कि समूह की ओर से कभी भी किसी मामले में नलिनी कोर्ट में हाजिर नहीं हुई हैं।

सीबीआई जांच अधिकारी ने बताया कि सारदा चिटफंड समूह को कारोबार करने देने के एवज में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अलग-अलग तरीके से करोड़ों रुपये ऐंठे थे, जिसमें पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम भी शामिल रही हैं। इस मामले में सीबीआई ने जो प्राथमिकी दर्ज की है, उसमें पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं, मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को भी नामजद किया गया है। इसी मामले में धनशोधन की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पहले ही नलिनी चिदंबरम को चार्जशीट में नामजद किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सारदा घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामलों की जांच के सिलसिले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को पिछले साल अप्रैल के महीने में पूछताछ के लिए समन भेजा था। हालांकि, इसके खिलाफ उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट में अपील की थी। अदालत ने उनकी इस दलील को नहीं माना कि किसी महिला को जांच के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के तहत उसके घर से दूर नहीं बुलाया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि इस तरह की छूट अनिवार्य नहीं है। यह संबंधित मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। कोर्ट ने ईडी को नलिनी के नाम नया समन जारी जारी करने को कहा था। इसके बाद एजेंसी ने 30 अप्रैल को समन जारी कर उन्हें सात मई को उपस्थित होने को कहा, लेकिन वह फिर हाजिर नहीं हुई। इसके बाद उन्हें 18 मई को समन जारी किया गया, तब भी वह हाजिर नहीं हुई। एजेंसी ने कहा था कि वह इस मामले में उनके संबंध पर धनशोधन रोधक कानून (पीएमएलए) के तहत बयान दर्ज करना चाहती है। ईडी ने सबसे पहले नलिनी को सात सितंबर, 2016 को समन भेज कर सारदा चिट फंड घोटाले में गवाह के रूप में कोलकाता कार्यालय में पेश होने को कहा था। नलिनी को कथित रूप से अदालत और कंपनी विधि बोर्ड में टीवी चैनल खरीद सौदे में सारदा समूह की ओर से उपस्थिति होने के लिए 1.36 करोड़ रुपये की फीस दी गई थी। ईडी और सीबीआई उनसे इस मामले में पहले भी पूछताछ कर चुकी हैं। एजेंसी का दावा है कि ये रुपये किसी मामले की फीस के रूप में नहीं बल्कि सेबी अधिकारियों को सेट करने के आश्वासन के तौर पर मिले थे। प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कोलकाता की विशेष पीएमएलए अदालत में 2016 में आरोपपत्र दायर किया था। हिन्दुस्थान समाचार

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