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अजय प्रसन्‍ना की बाँसुरी और संध्या पुरेचा के नृत्य से दर्शक हुये मंत्रमुग्ध

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 14 2019 7:25PM
अजय प्रसन्‍ना की बाँसुरी और संध्या पुरेचा के नृत्य से दर्शक हुये मंत्रमुग्ध
भोपाल, 14 अप्रैल (हि.स.) । मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में गायन, वादन एवं नृत्य प्रस्तुतियों पर एकाग्र श्रृंखला ''उत्तराधिकार'' में रविवार को ''बाँसुरी वादन'' एवं ''भरतनाट्यम नृत्य'' की प्रस्तुतियां संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत में दिल्‍ली के अजय प्रसन्ना ने अपने साथी कलाकारों के साथ राग यमन में बांसुरी वादन कर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद अजय प्रसन्ना ने साथी कलाकारों के साथ ''याद पिया की आये'' प्रस्तुत कर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। बांसुरी वादन के दौरान अजय प्रसन्ना का साथ तबले पर रामेन्द्र सिंह सोलंकी ने, बाँसुरी पर अमृत और नीलेश द्विवेदी ने दिया। बांसुरी वादन के बाद मुंबई की संध्या पुरेचा ने अपने साथी कलाकारों के साथ भरतनाट्यम नृत्य की शुरुआत ''वृन्दावनी वेणी बाजे'' पर नृत्य प्रस्तुत कर की। इस प्रस्तुति में कलाकारों ने अपने नृत्याभिनय कौशल से कालिया मर्दन और गोबर्धन गिरधारी प्रस्तुत किया, जिसमें श्रीकृष्ण के रूप को मंच पर बिम्बित किया गया। ''वृन्दावनी वेणी बाजे'' के बाद कलाकारों ने ''संत जनाबाई'' केंद्रित प्रस्तुति प्रस्तुत कर सभी दर्शकों को भाव से भर दिया। इस प्रस्तुति में जनाबाई, जो असल में एक नौकरानी हैं, उनके कार्य कौशल को कलाकारों ने नृत्य माध्यम से दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया। बता दें कि जनाबाई एक वृद्ध महिला हैं और वह घर के काम-काज करने में काफी कुशल हैं, परन्तु उनका कहना है कि वह स्वयं कुछ नहीं करतीं, उनकी सहायता तो स्वयं विठ्ठल देव करते हैं। इस प्रसंग के बाद कलाकारों ने संत जनाबाई का दूसरा प्रसंग नृत्य माध्यम से प्रस्तुत किया। इस प्रसंग में विठ्ठल का हार चोरी करने का आरोप जनाबाई पर लगता है और उसे फाँसी के लिए ले जाया जाता है, लेकिन प्रभु की कृपा से नदी में बाढ़ आ जाती है और जनाबाई के अलावा सभी बह जाते हैं। इसके बाद कलाकारों ने ''वेणाबाई'' पर केंद्रित नृत्य प्रस्तुत किया। वेणाबाई रामदास जी की शिष्या थीं और उन्हीं के सानिध्य में वेणाबाई ने राम भक्ति की। अतः रामनवमी के दिन रामचंद्र जी ने स्वयं रामाबाई के रूप में आकर उनकी सहायता की। प्रस्तुति के अंत में संध्या पुरेचा ने अपने साथी कलाकारों के साथ ''मुक्ताबाई'' पर केंद्रित नृत्य प्रस्तुत करते हुये अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। योग सिद्ध मुक्ताबाई आदिमाया का अवतार थीं। ऐसा माना जाता है कि संत निवृत्तिनाथ से संत मुक्ताबाई ने मुक्ति का वैभव और परमज्ञान प्राप्त किया था। नृत्य प्रस्तुति के दौरान मंच पर संध्या पुरेचा का साथ शांति मोहंती दवे, चित्रा डालवी, मंदिरा जोशी, पुष्करा डोचाके, रेशम गढ़ेकर और मनस्वी मिर्लेकर आदि ने दिया। प्रस्तुति के दौरान प्रकाश परिकल्पना में कमल जैन और भावना शाह ने सहयोग किया। इस नृत्य प्रस्तुति का निर्देशन संध्या पुरेचा ने किया। गौरतलब है कि अजय प्रसन्ना लम्बे समय से गायन-वादन के क्षेत्र में सक्रीय हैं। अजय प्रसन्ना ने बांसुरी वादन की कई प्रस्तुतियां देश के विभिन्न कला मंचों पर दी हैं। संध्या पुरेचा को संगीत नाट्य अकादमी पुरस्कार के साथ ही साथ कई प्रतिष्ठित सम्मानों और पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। संध्या पुरेचा ने देश के विभिन्न कला मंचों पर भरतनाट्यम नृत्य की कई मोहक प्रस्तुतियां दी हैं। हिन्‍दुस्‍थान समाचार / उमेद / मुकेश
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