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रतलाम-झाबुआ सीट से भाजपा का मुकाबला विधानसभा में हारे उम्मीदवार के पिता से

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 14 2019 6:39PM
रतलाम-झाबुआ सीट से भाजपा का मुकाबला विधानसभा में हारे उम्मीदवार के पिता से
रतलाम, 14 अप्रैल (हि.स.)। लम्बे इंतजार के बाद रतलाम-झाबुआ-अलीराजपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा ने रविवार को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। पार्टी ने झाबुआ से हाल ही में निर्वाचित विधायक गुमानसिंह डामोर को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनका मुकाबला कांग्रेस के वर्तमान सांसद कांतिलाल भूरिया से होगा। यदि कोई तीसरा दल प्रमुख रूप से मैदान में नहीं उतरा तो इन दोनों के बीच में ही मुख्य मुकाबला संभावित है। विधानसभा चुनाव में गुमानसिंह डामोर ने कांग्रेस उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया के सुपुत्र को पराजित किया था। अब उनका मुकाबला पराजित विधायक उम्मीदवार के पिता से होगा। हाल ही के विधानसभा चुनाव में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर गुमानसिंह डामोर ने भाजपा में शामिल होकर विधानसभा चुनाव लड़ा। उन्होंने वर्तमान सांसद कांतिलाल भूरिया के सुपुत्र डा. विक्रांत भूरिया को 10 हजार 437 मतों से पराजित किया था। डा. भूरिया की पराजय से गुमानसिंह डामोर का जिले में कद बढ़ा है। भाजपा हाईकमान को भी उनकी चुनावी रणनीति पसंद आयी, क्योंकि झाबुआ जिले में भाजपा का परचम 2014 के लोकसभा चुनाव में दिलीपसिंह भूरिया के नेतृत्व में फहराया गया। पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को झाबुआ-अलिराजपुर विधानसभा क्षेत्र में अच्छी सफलता मिली थी। रतलाम जिले में भी पांचों सीटें भाजपा के खाते में ही गई थीं, लेकिन इस बार चुनाव में कांग्रेस ने इस संसदीय क्षेत्र की पांचों सीटों पर कब्जा किया। लोकसभा चुनाव में मोदी को पुन: प्रधानमंत्री बनाने के लिए सम्पूर्ण देश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो संकल्प लिया है, उसके चलते झाबुआ संसदीय क्षेत्र में भी परिवर्तन की लहर संभावित है। इससे लगता है कि हाईकमान ने गुमानसिंह डामोर जैसे सशक्त उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, जो राजनीतिक दृष्टि से भले ही अधिक परिपक्व न हों, लेकिन पेशे से इंजीनियर होने के कारण वह रणनीति में माहिर हैं। यही कारण है कि वे पहली बार विधानसभा चुनाव लड़े और अच्छे मतों से कांग्रेस उम्मीदवार को पराजित करने में सफल रहे। रतलाम लोस सीट से भाजपा उम्मीदवार निर्मला भूरिया पिछला लोकसभा उपचुनाव करीब 87 हजार मतों से कांग्रेस उम्मीदवार कांतिलाल भूरिया से हार गई थीं। इसके बाद उन्होंने पेटलावद विधानसभा से भी चुनाव भी लड़ा, जहां पांच हजार मतों से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। यदि वह लोकसभा चुनाव में पराजित होने के बाद लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहतीं तो वह टिकट की दावेदार बन सकती थीं। टिकट के दावेदारों में और भी कई नाम थे, लेकिन वह टिकट लाने में कामयाब नहीं हो पाए। विधानसभा परिणामों को देखते हुए भाजपा को कड़ी मेहनत करना होगी विधानसभा चुनाव में रतलाम में भाजपा 43 हजार 735, ग्रामीण में भाजपा 5 हजार 605 तथा झाबुआ में 10 हजार 437 मतों से विजय हुई थी। जबकि कांग्रेस पेटलावद में 5 हजार, थांदला में 31 हजार 151, जोबट में 2 हजार 56, अलीराजपुर में 21 हजार 962 तथा सैलाना में 28 हजार 498 मतों से विजयी हुई थी। यदि मतों का अंतर देखा जाए तो काफी है, जिसके लिए भाजपा को लोकसभा चुनाव में काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, तब जाकर लोकसभा चुनाव में भाजपा को सफलता मिल सकती है। हिन्दुस्तान समाचार/शरद/ मुकेश/रामानुज
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