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ई-टेंडरिंग घोटाला: ईओडब्ल्यू की ऑस्मो कंपनी पर कार्रवाई पूरी, कंप्यूटर जब्त

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 7:56PM
ई-टेंडरिंग घोटाला: ईओडब्ल्यू की ऑस्मो कंपनी पर कार्रवाई पूरी, कंप्यूटर जब्त
भोपाल, 13 अप्रैल (हि.स.)। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने मध्यप्रदेश के कथित ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच में चार दिनों से जुटी है। चौथे दिन शनिवार को ईओडब्ल्यू की टीम ने भोपाल के मानसरोबर काम्पलेक्स स्थित ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स कंपनी की दफ्तर में अपनी कार्रवाई पूरी कर ली है और वहां के कम्प्यूटर जब्त कर लिये हैं। बता दें कि दो दिन पहले ईओडब्ल्यू की टीम ने कंपनी के दफ्तर पर छापामार कार्रवाई कर दस्तावेज जब्त किये थे और कंपनी की तीन संचालकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद शुक्रवार को तीनों संचालकों को अदालत में पेश कर 15 अप्रैल तक रिमांड पर लिया था। ईओडब्ल्यू की टीम ने चौथे दिन शनिवार को ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन्स के मानसरोवर स्थित कार्यालयों पर अपनी कार्रवाई को समाप्त कर दिया है। सुबह ईओडब्ल्यू की टीम द्वारा कंपनी के संचालकों वरुण चतुर्वेदी, विनय चौधरी, सुमित गोलवलकर को भी कंपनी के कार्यालय में ले जाया गया, जहां चार दिन से कार्रवाई चल रही थी। शनिवार को कंपनी के सभी कार्यालयों से कंप्यूटर के सीपीयू, मोडम आदि जब्त कर लिए गए। हर एक कंप्यूटर की हैस वेल्यू लेने के बाद जब्ती की कार्रवाई की गई। दूसरी तरफ कंपनी के तीनों संचालकों को पुलिस रिमांड पर लेने के बाद शनिवार को उनसे दिनभर पूछताछ जारी रही। ई-टेंडरिंग घोटाले में डिजिटल सिग्नेचर का डोंगल बनाकर सप्लाई करने वाली ऑस्मो आईटी साल्यूशन्स पर चार दिन पहले ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्जकर कंपनी के तीन संचालकों वरुण चतुर्वेदी, विनय चौधरी, सुमित गोलवलकर को गिरफ्तार किया था। वहीं, शुक्रवार को अदालत से पुलिस रिमांड पर सौंपे गए तीनों संचालकों से शनिवार को दिन में अधिकारियों ने पूछताछ की। पूछताछ में यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्होंने टेंडर में फायदा पहुंचाने वाली कौन-कौन से कंपनियों को किस तरह की मदद की। मदद के लिए उन्हें नेता-अफसरों का दबाव तो नहीं था। छात्रवृत्ति घोटाले में आठ लोगों पर एफआईआर दर्ज वहीं, ईओडब्ल्यू ने छात्रवृत्ति घोटाले में 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। ग्वालियर चंबल संभाग में फैले छात्रवृत्ति घोटाले के रैकेट में यह आठवीं एफआईआर है। गौरतलब है कि भिंड जिले के गोरमी के रामनाथ सिंह शिक्षा प्रसार समिति द्वारा रामनाथ सिंह होम्योपैथिक कॉलेज और रामनाथ सिंह कॉलेज ऑफ फार्मेसी का संचालन किया जाता है, लेकिन सरकार की ओर से अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति हड़पने के लिए कॉलेज संचालकों ने अपने अधिकारियों, कर्मचारियों और नोडल एजेंसी को साथ मिलाकर फर्जी छात्रों के नाम पर लाखों का घोटाला कर लिया। इनमें छात्रवृत्ति लेने के लिए एक ही छात्र को एक ही अवधि में दो अलग अलग संकाय में प्रवेश दिखाकर उनकी स्कॉलरशिप हड़प ली। फिलहाल 50 छात्रों की जांच में ही पांच लाख का घोटाला सामने आया है, जबकि यह दोनों कॉलेज 1996 से 2010 तक इसी तरह की गतिविधियों में लिप्त रहे हैं। ऐसा गोपनीय शिकायत में कहा गया है। गोपनीय शिकायत के आधार पर ही ईओडब्ल्यू ने इस मामले की जांच शुरू की थी। लंबे अर्से तक जांच के बाद ईओडब्ल्यू ने पाया कि कॉलेज संचालक, समिति अध्यक्ष, सचिव, पदाधिकारी तत्कालीन प्राचार्य, क्लर्क और नोडल एजेंसी की प्राचार्य इस घोटाले में शामिल रही हैं। अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण विभाग की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया गया है, इसलिए ईओडब्ल्यू का कहना है कि आगे होने वाली जांच में कुछ और आरोपी बढ़ाए जा सकते हैं। ईओडब्ल्यू के एसपी आरएस भदौरिया ने बताया कि अब जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उनमें नरेंद्र सिंह सेंगर, जयराम पटेल, राम बहादुर सिंह भदौरिया, रामनाथ सिंह शिक्षा प्रसार समिति के संचालक गण, अध्यक्ष और दूसरे कर्मचारी शामिल हैं। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश
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