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दो दशक से गुना संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे सिंधिया

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 7:14PM
दो दशक से गुना संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे सिंधिया
गुना, 13 अप्रैल (हि.स.)। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद ज्योतिरादित्य पिछले दो दशक से शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे हैं। यहां से कांग्रेस ने उन्हें चौथी बार चुनावी रण में उतारा है। बीती रात उनके नाम की घोषणा के साथ ही इसको लेकर चली आ रहीं तमाम अटकलों को विराम लग गया है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी को लेकर यहां अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दूसरी ओर राजगढ़ में भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर और कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी के बीच मुकाबला है। गौरतलब है कि जिले की चार विधानसभाओं में दो गुना-बमौरी शिवपुरी-गुना एवं चांचौड़ा-राघौगढ़ राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद ज्योतिरादित्य अपने पिता पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया के निधन के बाद 2002 में हुए उपचुनाव में सिंधिया सांसद चुने गए थे, तब से लेकर अब तक चार चुनाव हो चुके है और सभी में सिंधिया ने ही जीत दर्ज कराई है। उपचुनाव में जहां वह भाजपा प्रत्याशी देशराज सिंह से चार लाख से अधिक मतों से जीते थे। हालांकि दो साल बाद हुए उपचुनाव में उनकी जीत का अंतर चौंकाने वाले अंदाज में घटा था। इस चुनाव में सिंधिया को सिर्फ 80 हजार मतों से जीत पल्ले पड़े थे। भाजपा प्रत्याशी थे हरिवल्लभ शुक्ला। हालांकि अगले ही चुनाव में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नरोत्तम मिश्रा को फिर करीब ढाई लाख मतों से हराया। 2014 के चुनाव में सिंधिया ने भाजपा प्रत्याशी जयभान सिंह पवैया को लगभग सवा लाख मतों से शिकस्त दी। इस लिहाज से देंखे तो भाजपा ने सिंधिया के खिलाफ हर चुनाव में प्रत्याशी बदला, किन्तु जीत उसकी झोली में नहीं आ पाई। इस बार भी अब तक भाजपा प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है। प्रदेश से लेकर कई क्षेत्रीय नेताओं के नाम उम्मीद्वारी हेतु चल रहे है। दिग्गी के गढ़ में धाकड़ दिखा रहे दम पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गढ़ राजगढ़ में दो धाकड़ अपना दम दिखा रहे हैं। भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर जहां खुद किरार-धाकड़ समुदाय से ताल्लुक रखते है तो कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी खुद भलें ही पंजाबी हो, किन्तु ससुराल पक्ष से इसी वर्ग से आतीं है। लोकसभा में किरार-धाकड़ समुदाय की बहुलता को देखते हुए ही दोनों दलों से इसी समुदाय के प्रत्याशियों पर भरोसा जताया है। भाजपा प्रत्याशी रोडमल नागर ने पिछला चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी नारायण सिंह आमलाबे से 2 लाख 28 हजार 737 मतों से जीता था। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी पूर्व विधायक गुलाब सुस्तानी की बहू हैं तो खुद भी जिपं, जपं सदस्य रह चुकीं है। वर्तमान में वह जिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष हैं। राजगढ़ में कांग्रेस को छह बार और भाजपा को तीन बार जीत मिली है। एक बार खुद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी यहां से चुनाव हार चुके है। जाति के आधार पर नतीजे देने वाली इस सीट पर कांग्रेस की हार जीत जिले की चांचौड़ा और राघौगढ़ विधानसभा से ही तय होती आई है। गुना-बमौरी में चार से अधिक तो चांचौड़ा-राघगौढ़ में भी चार से अधिक मतदाता चुनेंगे सांसद जिले की चार विधानसभाओं में दो विधानसभा गुना और बमौरी शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र में एवं दो चांचौड़ा-राघौगढ़ लोकसभा क्षेत्र में आतीं हैं। चारों विधानसभाओं के 8 लाख से अधिक मतदाता दो सांसद चुनेंगे। शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र में कुल 8 विधानसभा आतीं है। इनमें 2 गुना, 3 अशोकनगर एवं 3 शिवपुरी जिले कीं है, जिनमें से ३ भाजपा और ५ कांग्रेस के पास है। जिले की गुना और बमोरी विधानसभा मिलाकर कुल 402853 मतदाता हैं। इनमें गुना के 207768 मतदाता हैं, जबकि बमोरी के 195085 मतदाता हैं, वहीं राजगढ़ लोकसभा में भी 8 विधानसभा आतीं है, जिनमें वर्तमान में 2 भाजपा और 6 कांग्रेस के कब्जे में है। जिला की चांचौड़ा और राघौगढ़ विधानसभा मिलाकर कुल 4 लाख 15 हजार 990 मतदाता है, जिनमें 207401 मतदाता चांचौडा़ और 208589 मतदाता राघौगढ़ के शामिल है। सिंधिया परिवार से लेकर कई मंत्री भी मांग रहे वोट शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र में जहां भाजपा अब तक अपना प्रत्याशी भी तय नहीं कर पाई है, वहीं कांग्रेस का पिछले करीब एक माह से प्रचार भी चल रहा है। जहां खुद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार दौरे कर रहे है तो उनकी धर्म पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया भी सक्रिय बनी हुईं है। एक दौरा वह पहले नौ दिन का कर चुकीं है तो दूसरा इस समय चल रहा है। इसके साथ ही श्रम मंत्री महैन्द्र सिंह सिसौदिया, स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट, महिला बाल विकास मंत्री एवं जिले की प्रभारी मंत्री इमरती देवी, गोविंद सिंह आदि कई मंत्री भी अपने महाराज के लिए वोट मांगने में लगे हुए है। इसके साथ ही कांग्रेसजनों की टोली अलग घूम रही है। हालांकि प्रत्याशी चयन में देरी को भाजपा की खास रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक / मुकेश
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