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जलियांवाला बाग हत्याकांड अमानुषिक घटना : प्रो. दहीभाते

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 6:27PM
जलियांवाला बाग हत्याकांड  अमानुषिक घटना : प्रो. दहीभाते
गुना, 13 अप्रैल (हि.स.)। जलियांबाला बाग हत्याकांड को आज 100 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। आज शहीदों की शहादत को नेकी की दीवार पर याद किया गया व शहीदों के सपनों के भारत विषय पर चर्चा की गई। विषय पर मुख्य वक्तव्य इतिहासकार प्रो. अशोक दहीभाते ने दिया। उन्होंने कहा कि भारत को जो स्वतंत्रता प्राप्त हुई है वह स्वाधीनता सेनानियों के त्याग और बलिदान के कारण प्राप्त हुई है। आज जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी अमानुषिक घटना को सौ वर्ष पूर्ण हुए हैं। नागरिक स्वतंत्रता का हनन जिस प्रकार से हुआ उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान स्वाधीनता सेनानियों के मन मे यह बात एकदम स्पष्ट थी कि यदि हमें एक राष्ट्र का निर्माण करना है तो उन स्वप्नों , मूल्यों ,आदर्शों और विचारधारा का पोषण करना होगा जो राष्ट्रीय एकता को मजबूत बना सके। इसीलिए उन्होने 1919 से ही आम आदमी को आंदोलनों से जोडऩे के प्रयास किए। गांधी जी कहा करते थे कि जनता ही जन आंदोलनों की सृष्टा होती है नेता नहीं। स्वाधीनता सेनानी प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं के सम्मान की सुरक्षा के प्रति सदैव चौकन्ने रहे। प्रो. दहीभाते ने कहा कि स्वाधीनता सेनानियों का यह भी स्वप्न था कि देश आत्मनिर्भर हो और स्वतंत्र आर्थिक व्यवस्था को अपनाये। सामाजिक समानता और समतावादी समाज की स्थापना उनका मूल लक्ष्य था। धर्मनिरपेक्षता और सर्व धर्म समभाव के प्रति अपने लगाव को खुले रूप मे अभिव्यक्त करने मे उन्होंने कभी संकोच नहीं किया। वसुधैव कुटुम्बकम के दर्शन में आस्था रखने के कारण उन्होंने वैदेशिक नीति मे अन्तर्राष्ट्रीय द्रष्टिकोण को विकसित करने की वकालत की। स्वाधीनता सेनानियों ने जो कुछ सोचा और किया उसके विषय मे स्पष्टत: कहा जा सकता है कि उन्होंने जनवादी मूल्यों के प्रति बडा सम्मान प्रदर्शित किया, नागरिक स्वतंत्रता के प्रति सम्मान, बहुमत का आदर , अल्पमतों को बने रहनेऔर फलने फूलने का अवसर प्राप्त हो इस पर पूर्ण ध्यान दिया। डॉ. पुष्पराग ने कहा किस्वाधीनता सेनानियों, क्रांतिकारियों या शहीदों के सपनों का भारत केंसा हो वो 1950 में निर्मित संविधान में लिखा जा चुका है। संबिधान की प्रस्तावना में उल्लेखित सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, लोकतंत्रात्मक, धर्मनिरपेक्ष, समता, अभिव्यक्ति आदि इसका प्रमाण हैं। इस अबसर पर डॉ. ओ पी बिरथरे, महावीर सिंह तोमर, राकेश मिश्रा, अशोक सक्सेना, राम बाबू शुक्ला, जयराम विसेन, सोमवंसी, सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओ ने भी अपने विचार व्यक्त किये। संचालन गुलाबराज ने किया, आभार वीरेंद्र पंत ने माना। सभा के अंत मे पोस्टर हाथों में लेकर नारे लगाए गए। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक / मुकेश
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