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ध्यान नहीं दिया गया तो और कम होगा गंभीर बांध का जल स्तर

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 12 2019 7:57PM
ध्यान नहीं दिया गया तो और कम होगा गंभीर बांध का जल स्तर
उज्जैन, 12 अप्रैल (हि.स.)। शहर की जीवनरेखा कहा जाने वाला गंभीर बांध इस वर्ष पानी की कमी से जूझ रहा है। जलसंकट का साया शहर पर तेजी से गहराता जा रहा है। नगर निगम के अधिकारी इंदौर के यशवंत सागर से 300 एमसीएफटी पानी मांग रहे हैं। जानकारों के अनुसार इतना पानी आने के बाद भी जून माह आसानी ने बीत जाएगा, ऐसी आशंका है। उनके अनुसार बांध से पानी चोरी अभी भी जारी है। बांध के दोनों ओर अपस्ट्रीम में खेतों में लगे नलकूप तेजी से पानी उगल रहे हैं। यही कारण है कि सितंबर,18 में पूरी क्षमता से भरा बांध गड्ढों में तब्दील होता जा रहा है। गंभीर बांध की जलभरण क्षमता 2250 एमसीएफटी है। करीब 19 किलोमीटर के जलभरण क्षेत्र का एक तिहाई हिस्सा इंदौर संभाग में आता है। पानी चोरी उज्जैन और इंदौर के बांध से सटे क्षेत्रों में हर वर्ष होती है। अप्रैल माह होते-होते शहर पर जलसंकट का साया मंडराने लगता है। हालात दूभर होते ही नगर निगम शहर के वार्डों में सड़कों को छलनी करना शुरू कर देता है। बजट बनाया जाता है और दो-चार बोरिंग कर दिए जाते हैं। हालात यह हैं कि भूमिगत जलस्तर नीचे जा रहा है, वहीं शहर के वार्डों में हैंडपंपों की संख्या बढ़ती जा रही है। अधिकारी कभी इस बात की ओर ध्यान नहीं देते कि गंभीर बांध से पानी चोरी और आसपास के लगे हुए खेतों में 19 किमी की रेंज में लगे हुए नलकूपों पर रोक कैसे लगाएं। इन नलकूपों में बांध के पानी से ही रिचार्ज होता है, जिनके 12 महीने सतत चलने के कारण बांध के जलस्तर में कमी आती है। एक बार फिर शहर पर जलसंकट का साया मंडरा रहा है और नगर निगम की पीएचई पानी चोरी रोकने की कवायद में लगी है। पीएचई के आला इंजीनियर स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि केवल मोटरें जब्त करने से कुछ नहीं होगा। आवश्यकता इस बात की है कि बांध से लगे निश्चित दायरे में पूरे 19 किमी के क्षेत्र में नलकूपों पर प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही पानी चोरी को लेकर सख्ती से कार्रवाई हो और राजनीतिक प्रभावों को समाप्त किया जाए। अधिकारी दावा करते हैं कि यदि इन बातों पर ध्यान दिया गया तो बांध में सालभर का पानी खपत के बाद भी बचा रहेगा। अधिकारियों ने लगाए आरोप पीएचई के कुछ अधिकारियों ने अनौपचारिक चर्चा में आरोप लगाया कि पूर्व में ठंड के दिनों में एक दिन छोडक़र जलप्रदाय करने की परंपरा थी। ऐसा करने पर पानी चोरी के बाद भी शहर की जलापूर्ति जून माह के अंत तक ध्वस्त नहीं होती थी। गत वर्ष भी ठंड के तीन माह में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय का आग्रह जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से किया गया था। कथित रूप से चुनावी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए रसूखदारों ने प्रस्ताव को फाइल में बंद करवा दिया। अब हालात दूभर हो गए हैं। गर्मी में पानी की खपत बढ़ती है | वहीं पानी चोरी, वाष्पीकरण और दैनिक सप्लाई जैसे कारणों से जलस्तर 10 एमसीएफटी तक कम हो रहा है। अभी भी स्थिति नहीं संभाली गयी और जुलाई के पहले पखवाड़े तक मानसून नहीं आया तो आशंका है कि शहर में हालात गंभीर हो जाएं। हिन्‍दुस्‍थान समाचार/ललित/राजू / मुकेश/शंकर
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