Hindusthan Samachar
Banner 2 शनिवार, अप्रैल 20, 2019 | समय 20:07 Hrs(IST) Sonali Sonali Sonali Singh Bisht

जेल गये परिजन पर दिव्यांग भोग रही सजा, अकेले घर में भूसा खाकर कर रही गुजारा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 12 2019 12:17PM
जेल गये परिजन पर दिव्यांग भोग रही सजा, अकेले घर में भूसा खाकर कर रही गुजारा
नरसिंहपुर, 12 अप्रैल (हि.स.)। दहेज हत्या के मामले में सजा पाकर जेल गये परिवारजनों से अधिक कष्ट घर में अकेली रह गयी उस दिव्यांग लड़की को भुगतना पड़ रहा है, जो कुछ भी कर पाने में अक्षम है। मामला तेंदूखेड़ा तहसील की ग्राम पंचायत गुंदरई के ग्राम जगन्नाथपुर का है। यहां निवासरत भागचंद ठाकुर व सब्बीबाई ठाकुर की 18 वर्षीय बेटी जन्म से ही मूक-बधिर व मानसिक रूप से विकलांग है। करीब ढाई साल पहले भागचंद के पुत्र हल्कू ठाकुर की पत्नी पूनम बाई फांसी के फंदे पर लटकी हुई मृत मिली थी। मृतका पूनम बाई के मायके वालों ने इसे दहेज हत्या का मामला बताते हुए थाने में शिकायत की थी, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों के खिलाफ दहेज हत्या का प्रकरण दर्ज हुआ था। भागचंद व सब्बीबाई को तो जमानत मिल गयी थी, लेकिन हल्कू ठाकुर जेल में ही था। अब तक भागचंद व सब्बी बाई अपनी दिव्यांग बेटी का ख्याल रख रहे थे, लेकिन प्रकरण में न्यायालय द्वारा सभी को सजा सुनाये जाने के बाद उक्त दिव्यांग बेटी फिर घर में अकेली रह गयी, जिसके सामने अब खाने-पीने, रहने-सोने सहित हर बात का संकट है। घर में भूंसा खाती मिली दिव्यांग बालिका उक्त दिव्यांग बेटी जिस झोपड़ानुमा घर में अकेली रह रही है, वह जगन्नाथपुर के पास पट्टे की भूमि पर वनक्षेत्र के पास स्थित है। आसपास कोई बसाहट न होने के कारण उसे भोजन-पानी देने वाला भी कोई नहीं है। इसके अलावा जंगली जानवर सहित अन्य खतरे भी हैं। बिटिया की पीड़ा सोशल मीडिया पर वायरल की गयी तो प्रशासन हरकत में आया, जिसमें जिला पंचायत सीईओ आरपी अहिरवार, महिला बाल विकास अधिकारी श्वेता जाधव व केंद्रीय जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी ने संवेदना दिखाते हुए बड़ी भूमिका निभाई। अब दिव्यांग बेटी की सुरक्षा व देखरेख के संबंध में कानूनी प्रावधानों को देखा जा रहा है। बताया गया कि महिला बाल विकास अधिकारी के निर्देश पर जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उक्त दिव्यांग बालिका के पास पहुंची तो वह भूसा खा रही थी। तब कार्यकर्ताओं ने स्थानीय लोगों की मदद से उसे भोजन मुहैया कराया गया । अब बालिका को वन स्टॉप सेंटर में लाने की तैयारी की जा रही है। संभवत शुक्रवार को बालिका को सीजीएम न्यायालय में भी लाया जायेगा, ताकि न्यायाधीश उसके संबंध में कुछ निर्णय ले सकें। जेल अधीक्षक ने दिखायी मानवीय संवेदना केंद्रीय जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी ने चर्चा में बताया कि जब जेल मे मेरी मुलाकात उक्त दिव्यांग बालिका की मां से हुई तो पता चला कि उनकी मानसिक विक्षिप्त बेटी जंगल के पास स्थित घर में अकेली रह गयी है। इसके बाद मैंने सोशल मीडिया पर उक्त बालिका के अकेलेपन की तस्वीर देखी तो मैंने जिला पंचायत सीईओ, महिला बाल विकास अधिकारी, सामाजिक न्याय अधिकारी से बात की। तब महिला बाल विकास अधिकारी ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एक्टिव किया | उन्होंने कहा कि यदि बालिका को कोई नहीं रखता है तो मैं उसे रखने तैयार हूं। वहीं ग्राम पंचायत गुंदरई के सरपंच सोमनाथ चड़ार ने भी भरोसा दिलाया कि वे भी बिटिया के प्रति बेहद चिंतित हैं और जो मदद की जा सकती है, कर रहे हैं। विदित हो कि पूर्व में जब इसी प्रकरण में उक्त बालिका के परिजन जेल गये थे तब भी बालिका घर में अकेली रह गयी थी। हिन्दुस्थान समाचार/ संजय/ नेहा / मुकेश/शंकर
लोकप्रिय खबरें
फोटो और वीडियो गैलरी
image