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दो नाबालिग बहन से साथ दुष्कर्म के आरोपित को जीवनभर जेल में रहने की सजा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 11 2019 7:52PM
दो नाबालिग बहन से साथ दुष्कर्म के आरोपित को जीवनभर जेल में रहने की सजा
राजगढ़, 11 अप्रैल (हि.स.)। जिले के सारंगपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिव्यांगना जोशी पाण्डे ने गुरुवार को दो नाबालिग बहनों के साथ दुष्कर्म के आरोपित जाकिर मंसूरी को धारा 376(ठ), 376(2)(प),450,506 भादवि एवं 5/6 पाॅक्सो अधिनियम में दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृत जीवनकाल तक के लिये सश्रम कारावास से दण्डित किया है। विशेष लोक अभियोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपित जाकिर मंसूरी पीड़ित बालिकाओं के घर टीवी देखने आता था एवं उसका उनके रिश्तेदार होने के कारण घर आना-जाना था। फरियादी की दो बेटियां हैं, एक की उम्र 10 वर्ष एवं दूसरी बेटी की उम्र 8 वर्ष है। फरियादी की एक बेटी विकलांग है। आरोपित जाकिर मंसूरी रिश्ते में पीड़ित बच्चियों का चाचा लगता है। घटना के दिन बच्चियों के माता और पिता सोयाबीन काटने गये थे, तब जाकिर ने घटना को अंजाम देते हुए बालिकाओं को बारी-बारी से बकरी के कमरे में ले जाकर उनके साथ बलात्कार किया। एक अक्टूबर 2018 को पीड़ित बालिकाओं की मां ने उदनखेडी पुलिस चौकी पहुॅचकर आरोपित जाकिर मंसूरी (20) निवासी उदनखेडी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के दौरान दोनों बालिकाओं का डाॅक्टरी परीक्षण कराया गया, डाॅक्टरी परीक्षण उपरांत डाॅक्टर द्वारा पीड़ित बालिकाओं के प्रजर्व किये गये कपडे एवं स्लाईड पुलिस को दी थी, जिसे पुलिस ने एफ.एस.एल. सागर रासायनिक परीक्षण हेतु तथा डीएनए प्रोफाईल के मिलान हेतु भेजा था। डीएनए रिपोर्ट में यह पाया गया था कि आरोपित के डीएनए प्रोफाईल पीड़ित बालिकाओं के कपड़ों पर मौजूद थे। विवेचना के दौरान बालिका जिस स्कूल में पढ़ रही थी उस स्कूल से उनकी जन्मतिथि संबंधी जानकारी भी प्राप्त की गई थी। न्यायालय के समक्ष विवेचना उपरांत अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसमें न्यायालय ने यह पाया कि दोनों पीड़ित बालिकाओं के साथ आरोपित ने बलात्संग का जघन्य अपराध घटित किया है। सारंगपुर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिव्यांगना जोशी पाण्डे ने आरोपित जाकिर मंसूरी को धारा 376(ठ), 376(2)(प),450,506 भादवि एवं 5/6 पाॅक्सो अधिनियम शेष प्राकृत जीवनकाल तक के लिये सश्रम कारावास से दण्डित किया है। घटना के 6 माह के अंदर ही इस प्रकरण का फैसला न्यायालय द्वारा दिया गया। विशेष लोक अभियोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि म.प्र. शासन के द्वारा 12 वर्ष से कम की बालिकाओं के साथ हुए बलात्संग के अपराध को मृत्युदण्ड से दण्डनीय अपराध बनाया गया है किन्तु न्यायालय के द्वारा मृत्युदण्ड की सजा नहीं दी है इस कारण प्रकरण में सजा वृद्धि हेतु उच्च न्यायालय में अपील दायर की जाएगी। हिन्दुस्तान समाचार / प्रेम / मुकेश
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