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निगरानी में करोड़ों खर्च पर बाघ के शिकारियों पर अंकुश नहीं

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 10 2019 12:30PM
निगरानी में करोड़ों खर्च पर बाघ के शिकारियों पर अंकुश नहीं
रायसेन, 10 अप्रैल (हि.स.)। मप्र में बाघों के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, उसके बाद भी बाघ के शिकार किये जा रहे हैं। बीते एक साल में एक दो नहीं, कई बाघों के शव रातापानी (ओबेदुल्‍लागंज वन मंडल ) में मिले हैं, लेकिन वन विभाग अपनी नाकमी को छिपाते हुये बाघ के शिकार को बीमारी से मौत या फिर बाघ के उम्रदराज होने की बात कहकर जांच को ठंडे बस्‍ते में डाल देता है। कुछ माह पूर्व भी एक बाघ का शव मिला था, जिसमें एक चरवाहे के घर से मृत बाघ के पंजे मिले थे, ठीक उसी तर्ज पर फिर एक बाघ का शिकार किया गया है। मंगलवार को बाघ का शव मिला है, जो पांच दिन पुराना लगता है। ओबेदुल्‍लागंज वन मंडल के डीएफओ अरविन्द प्रताप सिंह सेंगर का कहना है कि बाघ का सुनियोजित शिकार हुआ है या किसी बीमारी से बाघ की मृत्यु हुई है, यह साफ नहीं है। मामले की जांच की जा रही है। उल्‍लेखनीय है कि पहले भी बाघ के शरीर से पंजों-पूंछ काटे गये थे। इस बार भी ऐसा ही हुआ है| रातापानी अभ्यारण के अंतर्गत आने वाले जंगलों में राष्ट्रीय पशु, बहुतायत में है, जिनकी सुरक्षा को लेकर करोड़ों रुपये सरकार खर्च कर रही है। इसके बाद भी बाघों का शिकार कहीं न कहीं वन विभाग के मैदानी अमले की अपनी बीट से नदारद होने के कारण बाघ सहित अन्‍य वन्‍य प्राणियों का शिकार होना स्‍पष्‍ट परिलछित हो रहा है। रातापानी अभ्यारण अंतर्गत छह महीनों में वन्यप्राणी के शिकार की यह चौथी घटना बताई जा रही है। इस बार बिनेका रेंज की बीट-बगासपुर में बाघ का शिकार हुआ है। शिकारी बाघ के चारों पंजे, एक कान, पूंछ के बालों वाला हिस्सा एवं मुछें काटकर ले गये हैं। बाघ का शव चार से पाँच दिन पुराना बताया जा रहा है, मजेदार बात यह है कि मरा हुआ बाघ पांच दिन बाद मिला और इससे पूर्व वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। बाघ का शव मिलने के बाद वन अधिकारी मौके पर पहुँचे, जिसके बाद मेडिकल अधिकारी, डॉक्टरों का दल जांच के लिए बुलाया गया। जांच के बाद बाघ के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पहले की तरह भी इस बार भी डीएफओ का बयान है कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से मानी जा सकती है। हिन्दुस्‍थान समाचार/नीलेंद्र/शंकर
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