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कुत्तों से सावधान, अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 6:53PM
कुत्तों से सावधान, अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन
गुना, 08 अप्रैल (हि.स.)। जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बीते काफी समय से रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण ग्रामीण अंचल के मरीजों को 50 से 80 किमी की दूरी तय कर जिला अस्पताल तक आना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को शारीरिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। लेकिन अभी तक अंचल के स्वास्थ्य केंद्रों पर रैबीज के इंजेक्शन नहीं भेजे गए हैं। ऐसी स्थिति में जिला अस्पताल पर भी मरीजों का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक बीते काफी समय से रैबीज के मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रतिदिन 30 से 50 मरीजों कुत्ते का काटने के आते हैं। बीते मार्च माह में यह आंकड़ा 375 तक जा पहुंंचा था। स्टाफ के मुताबिक जिला अस्पताल में हर माह कुत्ते के काटने के मरीजो की संख्या 300 के करीब है। जो कहीं न कहीं चिंताजनक है। इस समस्या से निपटने के लिए पंचायत से लेकर नगरीय निकाय को कुत्तों की नसबंदी करने का कदम उठाए जाना था लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। जिससे समस्या बढ़ती जा रही है। ग्राम डुंगासरा निवासी नारायण वाल्मीक ने बताया कि उसके बच्चे को जिस कुत्ते ने शिकार बनाया था वह अब तक न सिर्फ एक दर्जन भर लोगों को काट चुका है बल्कि जानवरों को भी घायल कर चुका है। डुंगासरा गांव में तो लोगों ने पागल कुत्ते को मार दिया है लेकिन कुछ गांव में अभी भी पागल कुत्ते घूम रहे हैं, जिनसे अन्य लोगों को खतरा बना हुआ है। - बाजार में 1750 का पड़ता है रैबीज का इंजेक्शन सरकारी प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर डॉग बाइट के इंजेक्शन न लगने से गरीब मरीजों के समक्ष बड़ी परेशानी पैदा हो गई है। क्योंकि एक इंजेक्शन की बाजार में कीमत 350 रुपये है और एक मरीज को कुल पांच इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। इस तरह बाजार से खरीदने पर 5 इंजेक्शन का पूरा डोज 1750 रुपये का पड़ेगा। गौर करने वाली बात है कि मरीजों की यह परेशानी यहीं खत्म नहीं होती है क्योंकि यह इंजेक्शन प्रत्येक मेडिकल पर आसानी से मिल जाए यह जरूरी नहीं है। क्योंकि मेडिकल संचालक के मुताबिक जब से यह इंजेक्शन सरकारी अस्पताल में मिलने लगे हैं तब से वह यह इंजेक्शन कम ही मंगाते हैं। मरीजों की परेशानी उनकी जुबानी हमारे गांव अशोकनगर जिले में आता है लेकिन वहां से गुना पास है इसलिए यहां इजेक्शन लगवाने आना पड़ता है। डॉक्टर के अनुसार कुल 5 इंजेक्शन लगने हैं इसलिए पांच बार गांव से गुना जिला अस्पताल आना पड़ेगा। हर बार यहां तक आने और जाने में 500 रुपये तक खर्च हो जाता है। इसके बाद भी यदि जिला अस्पताल पहुंचने में देरी हो जाए तो इंजेक्शन लगना मुश्किल हो जाता है। हल्की बाई, डुंगासरा - मैं आरोन तहसील के ग्राम भूतमल में रहता हूं। मेरे 6 साल के बेटे सचिन को पागल कुत्ते ने खा लिया था। अभी तक दो इंजेक्शन लग चुके हैं, तीसरा लगवाने अस्पताल आया था। लेकिन स्टाफ ने कहा कि तुम्हें आने में देर हो गई है इसलिए अब 5 बजे के बाद ही लगेगा। हालांकि बाद में मैंने कर्मचारी को बताया कि बस लेट हो गई थी इसलिए मुझे आने में देरी हुई और यहां से वापस जाने के लिए भी 3 बजे के बाद बस नहीं है। यह सुनने के बाद उक्त कर्मचारी ने इंजेक्शन लगा दिया। नारायण, मरीज का पिता - इनका कहना है डिमांड भेजी थी सप्लाई अभी तक नहीं हुई है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी डॉग बाइट के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। क्योंकि हमने संबंधित कंपनी को डॉग बाइट इंजेक्शन की डिमांड भेजी थी लेकिन अभी तक सप्लाई नहीं हो सकी है। कुछ समय तक तो हमने अपने बजट के जरिए बाजार से खरीदकर मरीजों को इंजेक्शन लगाए लेकिन अब बजट भी खत्म हो चुका है। इसलिए यह परेशानी आ रही है डॉ. पी बुनकर, सीएमएचओ गुना हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक / मुकेश
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