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मुख्यमंत्री बताएं, उनके ओएसडी के यहां इतना पैसा कहां से आया: भार्गव

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 12:17PM
मुख्यमंत्री बताएं, उनके ओएसडी के यहां इतना पैसा कहां से आया: भार्गव
भोपाल, 08 अप्रैल (हि.स.)। मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़, निज सचिव राजेन्द्र मिगलानी के यहां से आयकर विभाग की छापेमारी में सूटकेसों में भरे करोड़ों रुपये मिले। क्या मुख्यमंत्री बताएंगे कि छापे में मिला कालाधन किसकी स्वेच्छा और कहां से इकट्ठा किया गया? एक मुख्यमंत्री के ओएसडी के यहां से छापे में कालेधन का मिलना गंभीर मामला है। जनता समझ सकती है कि यह पैसा किसकी शह और कहां से इकट्ठा किया गया होगा। नैतिकता के आधार पर मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपना इस्तीफा दे देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सोमवार को मीडिया को जारी किये अपने बयान में आरोप लगाया है कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार में जो ट्रांसफर उद्योग चलाया गया, उसके नतीजे अब जनता के सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा से विधानसभा, जनसभाओं और मीडिया से चर्चा के दौरान कहता आया हूं कि प्रदेश में अराजकता की स्थिति है। ट्रांसफर उद्योग फल-फूल रहा है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अत्याचार बढ़े हैं, आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं। पैसे लेकर छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारियों तक के ट्रांसफर किए जा रहे हैं। अब मुख्यमंत्री के ओएसडी के यहां जो छापे में इतनी धनराशि मिली है, वह सब इसी ट्रांसफर उद्योग से संग्रह किया हुआ धन है। कांग्रेस सरकार बनते ही करोड़ों का भ्रष्टाचार हुआ है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश की राजनीति में कभी भी ऐसा मौका नहीं आया और न ही इस तरह का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा कि हमेशा से मध्य प्रदेश में शुचिता की राजनीति होती आई है। एक मुख्यमंत्री के ओएसडी और उनके स्टाफ से जुड़े अधिकारियों का इसमें शामिल होना प्रदेश की राजनीति में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मुख्यमंत्री कमलनाथ को शुचिता की राजनीति के आधार पर तत्काल अपने पद से इस्तीफा देकर आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों को भी इस्तीफा देना चाहिए। भार्गव ने कहा कि आयकर विभाग की टीम ने प्रदेश में कई जगह छापेमारी की है। भोपाल में कार्रवाई करने पहुंची आयकर विभाग की टीम के साथ पहुंचे सीआरपीएफ के जवानों को जिस प्रकार रोकने की कोशिश की गई, वह निंदनीय है। यह घटना ठीक वैसी ही है, जिस तरह पश्चिम बंगाल में राज्य की पुलिस द्वारा आयकर विभाग के अधिकारियों को बलपूर्वक रोका गया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा सीआरपीएफ के जवानों को रोका जाना संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने जैसा है। सरकार, राज्य की पुलिस अपना काम करें और सीआरपीएफ जवानों को अपना काम करने दें। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश/रामानुज
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