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अवैध निर्माण करनेवालों को क्यों 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 11 2018 1:57PM
अवैध निर्माण करनेवालों को क्यों 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट

संजय

नई दिल्ली। दिल्ली में सीलिंग के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि जिन्होंने अवैध निर्माण किया है उन्हें आखिर क्यों 48 घंटे पहले नोटिस दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी नोटिस के दिल्ली में सीलिंग किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 27 हजार से ज्यादा अवैध और प्रदूषण फैलाने वाले फैक्ट्रियों को बंद किया जाए।

पिछले 7 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा गठित एसटीएफ को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि लगता है कि इन पर दबाव है खासकर व्यापारियों का। कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि दिल्ली से मुंबई नहीं, बल्कि कन्याकुमारी तक की दूरी का अवैध कब्जा है। पिछले 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में रिहायशी इलाकों में उद्योगों को चलाने पर गहरी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने 2004 के उसके आदेश में हुई लापरवाही पर रिपोर्ट तलब किया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने केंद्र सरकार डीडीए और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि आप लोगों को अवैध निर्माणों को नियमित करने का आशा दिलाकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं। लगता है कि आपने कमला मिल हादसा से कोई सबक नहीं लिया है।

सुनवाई के दौरान एमिकस क्युरी रंजीत कुमार ने जब कोर्ट को बताया था कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम 28 अगस्त से संशोधित मास्टर प्लान लागू करने जा रही है| तब कोर्ट ने कहा कि डीडीए और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के वकील कोर्ट में पेश नहीं हो रहे हैं। उन्हें कोर्ट के आदेश की चिंता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निगरानी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बुराड़ी, विश्वासनगर और कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशनों के पास डीडीए की अतिक्रमण की गई भूमि को खाली करा लिया गया है।

दिल्ली के गोकुलपुरी में पिछले 16 सितंबर को एक घर पर लगी सीलिंग को तोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को अवमानना नोटिस जारी किया था। उसके बाद मनोज तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कोर्ट से माफी मांगने से इनकार किया था।

तिवारी ने कहा था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का कहीं कोई उल्लंघन नहीं किया है। तिवारी ने कहा था कि इस मामले से मॉनिटरिंग कमिटी के निर्देश का कोई लेना देना नहीं था । मनोज तिवारी ने अपने हलफनामे में कहा था कि इसमें पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने गैरकानूनी काम किया है।

मनोज तिवारी ने आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि पता नहीं क्या कारण है कि मॉनिटरिंग कमिटी ने ओखला, जामिया, शाहीन बाग, नूर नगर और जौहरी फार्म्स जैसे इलाकों में कोई सीलिंग नहीं की है जबकि वहां पर पांच से सात मंजिला इमारतें बनी हुई हैं। मनोज तिवारी ने कहा था कि वे सीलिंग अफसर बनने को तैयार हैं और वे चार साल में अनधिकृत निर्माण करने वालों पर कार्रवाई करेंगे।

पिछले 25 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मनोज तिवारी के इस बयान पर गहरी आपत्ति जताई थी कि मानिटरिंग कमेटी हजारों अनधिकृत बिल्डिंग को सील नहीं कर रही है।

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