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रेणुका बांध परियोजना को हरी झंडी- दिल्ली, उप्र, हिमाचल समेत छह राज्यों में बढ़ेगी जल की उपलब्धता

By HindusthanSamachar | Publish Date: Jan 11 2019 8:29PM
रेणुका बांध परियोजना को हरी झंडी- दिल्ली, उप्र, हिमाचल समेत छह राज्यों में बढ़ेगी जल की उपलब्धता

आशुतोष/उज्जवल

नई दिल्ली में छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एमओयू पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली/शिमला, 11 जनवरी (हि.स.) । हिमाचल प्रदेश में सिरमौर के गिरि नदी पर प्रस्तावित रेणुका बहुउद्देशीय बांध परियोजना को शुक्रवार को हरी झंडी मिल गयी। इसके पूरा होने पर हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में पेयजल एवं कृषि कार्यों के लिए जल की उपलब्धता बढ़ेगी। केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत छह राज्यों के बीच इस परियोजना के निर्माण को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उत्तराखंड के त्रिवेंद्र सिंह रावत और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव बीके अग्रवाल और छह राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। गडकरी ने कहा कि देश में जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, परन्तु कुशल जल प्रबंधन की आवश्यकता है। उन्होंने रेणुका बांध परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि सरकार यथाशीघ्र कैबिनेट से इसकी मंजूरी प्राप्त करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि यमुना नदी पर किसाऊ बहुउद्देशीय परियोजना विकसित की गई है और जल्द ही समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि लखवार बहुउद्देशीय परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच 28 अगस्त 2018 को समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।

गडकरी ने मुख्यमंत्रियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि इन परियोजनओं से सभी राज्यों को लाभ होगा। इन परियोजनाओं से यमुना नदी में प्रवाह की स्थिति बेहतर होगी जो कि समय की मांग है। रेणुका बांध परियोजना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक गिरि नदी पर निर्मित की जाएगी। इस परियोजना में 148 मीटर ऊंचा बांध बनाया जाएगा तथा इससे दिल्ली व अन्य बेसिन राज्यों को 23 क्यूसेक जल की आपूर्ति की जाएगी। उच्च प्रवाह के दौरान परियोजना से 40 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा। बिजली परियोजना का निर्माण हिमाचल प्रदेश ऊर्जा निगम द्वारा किया जाएगा। रेणुकाजी बांध की संग्रहण क्षमता 0.404 एमएएफ है। बांध निर्माण के पश्चात गिरि नदी के प्रवाह में 110 प्रतिशत की वृद्धि होगी और यह दिल्ली व अन्य बेसिन राज्यों के जल की जरूरत को पूरा करेगी। उल्लेखनीय है कि रेणुका बांध परियोजना का जांच कार्य 1976 में प्रारंभ हुआ था, लेकिन कुछ कारणवश निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया। वर्ष 2015 के स्तर पर परियोजना की अनुमानित लागत 4596.76 करोड़ रुपये है, जबकि सिंचाई/पेयजल घटक की लागत 4325.43 करोड़ रुपये है। ऊर्जा घटक की लागत 277.33 करोड़ रुपये है। सिंचाई/पेयजल घटक की 90 प्रतिशत लागत अर्थात् 3892.83 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार के द्वारा वहन की जाएगी। शेष 432.54 करोड़ रुपये की राशि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली राज्य वहन करेंगे।

रेणुका बांध परियोजना यमुना और इसकी दो सहायक नदियों- टोंस और गिरि पर बनाए जाने वाले तीन संग्रह परियोजनाओं का हिस्सा हैं। यमुना नदी पर लखावर परियोजना तथा टोंस नदी पर किसाऊ परियोजना, अन्य दो परियोजनाएं है। लखावर बहुउद्देशीय परियोजना की लागत और लाभ साझा करने के संदर्भ में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों के बीच नितिन गडकरी की मौजूदगी में 28 अगस्त 2018 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि यह बांध दिल्ली, हिमाचल समेत छह राज्यों के लिए जल उपलब्धता को बढ़ाएगा। इस बहुउद्देशीय परियोजना के तहत 40 मेगावाट बिजली पैदा होगी, जिसको हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा निष्पादित किया जाना प्रस्तावित है।

इस परियोजना से हिमाचल को सिर्फ 0.30 रुपये प्रति यूनिट की दर से करीब 200 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी। इससे हिमाचल प्रदेश पॉवर कॉपरेशन लिमिटेड को प्रति वर्ष 60 करोड़ रुपये का शुद्ध राजस्व प्राप्त होगा। इसके संचालन के प्रथम वर्ष में राज्य सरकार को 12 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। बांध के निर्माण के बाद गिरि नदी का प्रवाह लगभग 110 प्रतिशत बढ़ जाएगा। इस परियोजना से जलाशय में 49800 हेक्टेयर घन मीटर (0.498 बीसीएम) जल का भंडारण होगा और दिल्ली को 23 क्यूसेक्स की जलापूर्ति होगी। इस परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण के लिए केन्द्र सरकार ने 446.96 करोड़ रुपये, दिल्ली सरकार ने 214.84 करोड़ और हरियाणा ने अब तक 25 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। हिन्दुस्थान समाचार

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