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किसानों और गरीबों को दी भारी राहत और वित्तीय अनुशासन भी रहा कायम: पीयूष गोयल

By HindusthanSamachar | Publish Date: Feb 11 2019 9:17PM
किसानों और गरीबों को दी भारी राहत और वित्तीय अनुशासन भी रहा कायम: पीयूष गोयल

अजीत

नई दिल्ली, 11 फरवरी (हि.स.)। वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने वित्तीय अनुशासन कायम रखते हुए किसानों, मध्यम वर्ग, देश के रक्षा वर्ग और मजदूरों सहित समाज के हर तबके को राहत और ताकत पहुंचाने वाला अंतरिम बजट पेश किया है। आगामी लोकसभा चुनाव के फिर सत्ता में वापसी का विश्वास व्यक्त करते हुए गोयल ने कहा कि मोदी सरकार आगामी महीनों में जब अपना पूर्ण बजट पेश करेगी तो देश की विकास यात्रा को और गति देने के लिए व्यापक कदम उठाने का ब्यौरा पेश किया जाएगा।

तेलुगू देशम पार्टी(टीडीपी) सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने और राफेल सौदे की संयुक्त संसदीय समिति(जेपीसी) से जांच कराने की मांग को लेकर नारेबाजी की। वित्तमंत्री ने नारेबाजी के बीच अंतरिम बजट पर हुई चर्चा का उत्तर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सदन में मौजूद थे। गोयल ने मनमोहन सरकार के दस वर्ष और मोदी सरकार की उपलब्धियों का तुलनात्मक ब्यौरा पेश करते हुए कहा कि पहले की तुलना में किसानों को आर्थिक सहायता देने, मध्यम वर्ग को करों में रियायत देने, खेतिहर मजदूरों के लिए चलाई जा रही मनरेगा योजना को अधिक धन मुहैया कराने और रक्षा बलों को मजबूत बनाने के लिए कहीं अधिक धनराशि का प्रावधान किया गया है। जनता को राहत पहुंचाने के सारे उपायों को अमलीजामा पहनाते हुए वित्तीय अनुशासन को कायम रखा गया तथा महंगाई पर अंकुश लगाने का काम किया गया।

अंतरिम बजट पर सदन में हुई चर्चा के बाद लेखानुदान और आयकर में राहत देने संबंधी वित्त विधेयक को ध्वनिमत से पारित किया गया। कृषि क्षेत्र और किसानों की समस्याओं के समाधान होने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि किसान सम्मान निधि के ऐतिहासिक निर्णय से देश के 12 करोड़ से अधिक किसानों को 6 हजार रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे। 10 वर्ष की अवधि में छोटे, सीमांत किसानों को 60 हजार रुपये की धनराशि मिलेगी जो फसल मौसम के दौरान जरूरत वाली खरीददारी में मददगार होगी। उन्होंने कहा कि दल किसान सम्मान निधि को कम कर के आंक रहे हैं लेकिन यह किसानों की सामूहिक जरूरत को पूरा करने में बहुत मददगार होगी।

गोयल ने कांग्रेस पार्टी के किसान कर्जमाफी के कदम का उपहास करते हुए कहा कि मनमोहन सरकार ने 10 साल के दौरान केवल एक बार किसानों का 52 हजार करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया था, जिसका फायदा केवल साढ़े तीन करोड़ किसानों को हुआ था। किसान सम्मान निधि के जरिए दस वर्षों में साढ़े सात लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे, जिससे 12 करोड़ से अधिक किसान लाभांवित होंगे। गोयल ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2014 में जब अपना अंतरिम बजट पेश किया था तो उसमें अमीरों के लिए महंगी एसयूवी कारों की कीमतों में कमी की गई थी। जबकि हमारे अंतरिम बजट में गरीबों, किसानों और मध्यम वर्ग का ध्यान रखा गया। मध्यम वर्ग को आयकर में छूट देने के विभिन्न उपायों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यदि आयकरदाता विभिन्न छूटों का उपयोग करें तो उन्हें 10 लाख तक की वार्षिक आमदनी तक कोई टैक्स नहीं देना होगा।

उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि चुनाव जीतने के लिए लोक लुभावन घोषणा करके सरकार ने वित्तीय अनुशासन को तिलांजलि दे दी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने वित्तीय अनुशासन कायम रखने में बड़ी सफलता हासिल की। कांग्रेस के समय में राजकोषीय घाटा 6.5 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह 3.4 प्रतिशत ही रहा।

कांग्रेस सरकारों के दौरान लगातार महंगाई बढ़ने का जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि उस समय मुद्रा स्फीति की दर 12.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जबकि इस समय यह दर 2.9 प्रतिशत है। बैंकिंग क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज नकदी की उपलब्धता बहुत बेहतर है तथा लोगों को आसानी से कर्ज मिल सकता है। घर बनाने के लिए ऋण पर ब्याज की दर में कमी आई है और यह 8.5 से 9 प्रतिशत पर उपलब्ध है।

वित्तमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार के दौरान देश विदेशी कर्ज में डूब गया था। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल की समाप्ति पर देश पर विदेशी कर्ज का बोझ 7 लाख 35 हजार करोड़ था, जो कांग्रेस के अगले 10 वर्ष के कार्यकाल में साढ़े चार गुना बढ़कर 32 लाख करोड़ तक पहुंच गया। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट निर्देश था कि बजट के आंकड़ों को पूरी ईमानदारी के साथ देश के सामने रखा जाए। आंकड़ों के चालाकी से सरकार अपनी उपलब्धियों को और बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकती थी लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। मोदी सरकार ने कांग्रेस की कार्यसंस्कृति को अस्वीकार कर दिया, जिसमें बहुत कुछ लिखा जाता था लेकिन किया कुछ न जाता था। आर्थिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ईमानदार कंपनियों को सहायता और प्रोत्साहन दिया तथा बेईमान कंपनियों को सजा दी।

वित्तमंत्री ने देश की रक्षा सेनाओं और खेतिहर मजदूरों के लिए चलाई जा रही मनरेगा योजना के लिए पहले की तुलना में अधिक धनराशि आवंटित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार राज्यों को आर्थिक दृष्टि से अधिक सक्षम और समर्थ बनाने में विश्वास रखती है तथा उसने केंद्रीय राजस्व का बड़ा हिस्सा वस्तु और सेवाकर(जीएसटी) प्रणाली के तहत राज्यों को सौंप दिया है। कांग्रेस सरकार और मोदी सरकार के कामकाज की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गरीबों और किसानों के साथ छल और उनका अपमान किया, जबकि मोदी सरकार में सबका ध्यान रखा गया और विकास की गति को तेज किया गया।

हिन्दुस्थान समाचार

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