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नागपुर की अनन्या से प्रधानमंत्री की दोस्ती

By HindusthanSamachar | Publish Date: Oct 12 2018 10:19AM
नागपुर की अनन्या से प्रधानमंत्री की दोस्ती

मनीष

नागपुर। दुनिया में दोस्ती से अच्छा कुछ भी नहीं होता| दोस्ती में दुनिया के हर ऐश्वर्य को दोस्त के चरणों में न्यौछावर करने की ताकत होती है| दोस्ती नि:स्वार्थ होती है| हालांकि कुछ लोग चाणक्य के सूत्र वाक्य कि 'दोस्ती के पीछे स्वार्थ छिपा होता है', का उदाहरण भी गाहे-बगाहे दे दिया करते हैं| लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागपुर की अनन्या वशिष्ठ से भला क्या स्वार्थ हो सकता है? उधर, अनन्या वशिष्ठ की प्रधानमंत्री से भी क्या स्वार्थ हो सकती है| उसकी उम्र अभी खाने- खेलने की है|

अनन्या महज 7 साल की है और दूसरी कक्षा में पढ़ती है| फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी से उसकी काफी अच्छी दोस्ती है। बीते एक साल से दोनों के बीच निरंतर पत्राचार होता रहता है। जन्मदिन चाहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हो या अनन्या का दोनों एक-दूसरे को मुबारकवाद देना नहीं भूलते| अनन्या जब भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजती है, प्रधानमंत्री उसका जवाब जरूर देते हैं| वह प्रधानमंत्री को अपना दोस्त बताती है| उनकी दोस्ती से अनन्या के माता-पिता, परिजन, नाते-रिश्तेदार, स्कूल के संगी-साथी और शिक्षक सभी गौरवान्वित महसूस करते हैं|

नागपुर के वाड़ी इलाके में रहने वाली अनन्या वशिष्ठ स्थानीय संदीपनी स्कूल की दूसरी कक्षा में पढ़ती है। वशिष्ठ परिवार में अनन्या के अलावा नौकरीपेशा माता-पिता तथा दादा-दादी को मिला कर कुल पांच सदस्य हैं। बीते एक साल से अनन्या की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अच्छी खासी दोस्ती हो गयी है। वह समय-समय पर प्रधानमंत्री को खत भेजती है, तो प्रधानमंत्री भी उसकी चिट्ठियों का शिद्दत से जवाब देते हैं|

अनन्या और प्रधानमंत्री की दोस्ती की मजेदार कहानी साझा करते हुए उसकी मां डॉ. हंसा वशिष्ठ ने बताया कि बीते साल टीवी देखते समय किसी चैनल पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बच्चों के साथ दिखाई दिए। उसके बाद अनन्या ने अपने दादा से प्रधानमंत्री के बारे में सवाल पूछना शुरू कर दिया। तब अनन्या के दादाजी ने उसे प्रधानमंत्री के बचपन की कहानी सुनाई। उसके बाद अनन्या ने अपनी स्कूल डायरी से एक पेज निकाल कर पेन्सिल से प्रधानमंत्री के लिए जन्मदिन का बधाई संदेश लिखा। उसने वह चिट्ठी प्रधानमंत्री को भेजने की जिद पकड़ ली। बच्ची का मन रखने के लिए उसके दादा ने वह चिट्ठी प्रधानमंत्री कार्यालय को पोस्ट कर दी। इसके बाद वशिष्ठ परिवार इस घटना को लगभग भूल गया। लेकिन कुछ दिनों के बाद अचानक प्रधानमंत्री कार्यालय से अनन्या के नाम चिट्ठी प्राप्त हुई। एक छोटी बच्ची को प्रधानमंत्री की चिट्ठी मिलना वशिष्ट परिवार के लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। प्रधानमंत्री की चिट्ठी मिलने के बाद अनन्या और प्रधानमंत्री की दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ।

चिट्ठियों का आदान-प्रदान

अनन्या ने प्रधानमंत्री को भेजी चिट्ठी में 'सुदिनं-सुदिनं तव जन्मदिन, भवतु मंगल तव जन्मदिन' सुभाषित लिखा था। उसके जवाब में प्रधानमंत्री ने ऐसी चिट्ठियों को ऊर्जा का स्रोत बताया। तब से अनन्या प्रधानमंत्री को अपने नन्हें हाथों से लिख कर चिट्ठियां भेजने लगी।

उधर, प्रधानमंत्री की ओर से उसका जवाब आने लगा। अनन्या का जन्मदिन, रक्षाबंधन, दिवाली, नया साल ऐसे सभी मौकों पर अनन्या की भेजी चिट्ठियों का प्रधानमंत्री की ओर से जवाब आता है। अपने जवाब में प्रधानमंत्री कभी अनन्या को धन्यवाद देते हैं तो कभी उसके लिए मंगल कामना करते हैं। खास बात यह है कि अनन्या और प्रधानमंत्री की कभी मुलाकात नहीं हुई, लेकिन दोनों एक-दूसरे को बराबर चिट्ठियां भेजते रहते हैं।

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