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पूर्व सांसदों-विधायकों को पेंशन एवं अन्य भत्ते देने के लिए स्थायी तंत्र बनाने की मांग संबंधी याचिका खारिज

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 16 2018 11:11AM
पूर्व सांसदों-विधायकों को पेंशन एवं अन्य भत्ते देने के लिए स्थायी तंत्र बनाने की मांग संबंधी याचिका खारिज
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सांसदों और विधायकों को पेंशन और अन्य भत्ते देने के लिए पर स्थायी तंत्र बनाए जाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 7 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि उसने सांसदों की सैलरी की समय-समय पर रिवाईज कराने के लिए स्वतंत्र बॉडी गठित करने का विचार छोड़ दिया है। केंद्र ने कहा था कि इसके कई जटिलताएं पैदा होंगी और दूसरे क्षेत्रों से भी ऐसी ही मांग उठने लगेंगी। केंद्र ने पूर्व सांसदों और उनके परिवार के सदस्यों को पेंशन देने की योजना का समर्थन करते हुए कहा था कि कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें गरिमा के साथ अपना जीवन जीने के लिए जरुरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि हर मामले में केंद्र का यही पक्ष क्यों होता है कि संबंधित मामला संसद पर छोड़ दिया जाए, इसे कोर्ट नहीं देख सकती। कोर्ट ने कहा था कि नेताओं को पत्नी और बच्चे की आय का स्त्रोत बताना होगा, संबंधी आदेश को सभी राजनीतिक दलों ने सराहा, केवल केंद्र सरकार ही इस पर आपत्ति जता रही है। याचिका लोक प्रहरी नामक एनजीओ ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि सांसद और विधायक खुद अपने वेतन और भत्ते तय करते हैं। उन्हें इसकी इजाजत नहीं होनी चाहिए। याचिका में मांग की गई थी कि इसके लिए एक स्थायी व्यवस्था बने, जो जरूरत के मुताबिक वेतन और भत्ते का निर्धारण करे। लोक प्रहरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अप्रैल 2014 में याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि संविधान की धारा 106 सांसदों की सैलरी बढ़ाने का अधिकार संसद को देता है और इससे पेंशन का कोई लेना-देना नहीं है। हाईकोर्ट ने सांसदों और विधायकों को भत्ते और अन्य सुविधाएं देने के खिलाफ दायर याचिका को भी खारिज कर दिया था। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/आकाश
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