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संकट मोचन मंदिर में रामनवमी हुआ हवन, सत्संग, कन्या पूजन व भंडारा

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 14 2019 9:07PM
संकट मोचन मंदिर में रामनवमी हुआ हवन, सत्संग, कन्या पूजन व भंडारा
रोहतक, 14 अप्रैल(हि.स.)। संकट मोचन मंदिर में रविवार को रामनवमी पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास से मना। गद्दीनशीन परमपूज्य मानेश्वरी देवी ने भक्तों संग मिलकर भगवान राम दरबार की पूजा व भक्तिमय भजन गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। तत्पश्चात मंत्रोच्चारण व विधि-विधाननुसार रामायण पाठ की समाप्ति, हवन, कन्या पूजन, गद्दीनशीन मानेश्वरी देवी व संतों महात्माओं के प्रवचन, आर्शीवचन तत्पश्चात भंडारा हुआ जिसमें भक्तों ने भंडारा ग्रहण किया और संतों-महात्माओं से आर्शीवाद प्राप्त किया। मां जगदंबे के स्वरूप में आईं कन्याओं के चरण धोकर, हाथों पर रोली-मोली बांधकर, माथे पर तिलक, श्रृंगार का सामान देकर, आरती कर, छोले-पूरी-हलवा, नारियल का प्रसाद देकर कन्याओं की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मानेश्वरी देवी जी ने रामनवमी पर भक्तों को प्रवचन देते हुए कहा कि राम ने जीवन भर ईश्वर की आराधना, यज्ञ की रक्षा व उपासना, पिता के वचन का पालन के द्वारा अतुलनीय पितृभक्ति, अद्भुत त्याग, मित्रधर्म, अत्याचारियों का नाश व दीन दु:खी एवं धर्मात्माओं की सहायता, पत्नीव्रत आदि वैदिक आर्य मर्यादाओं का पालन किया। इसलिए श्रीराम को मर्यादापुरुषोत्तम के नाम से जाना जाता है। उन्होंने श्रीराम के जीवन पर प्रकाश डाला और भजनों की बौछार की जिसमें भक्तजन झूमने पर विवश हुए। उन्होंने भक्तों से कहा कि मांग के चरणां में अपने स्वार्थ व दुर्गणों की बलि चढ़ा दो। मां तुम्हारे इन अवगुणों को नष्ट कर दे, ऐसी मां से प्रार्थना करो। उन्होंने कहा कि हम नवरात्रों में जिस कन्या के स्वरूप की मां मानकर पूजा करते हैं, व्यवहारिक जीवन में हम उसे केवल उपभोग की वस्तु मान बैठे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि हमने नारी की प्रतिमा को पूजने का बीड़ा उठाया है, न कि नारी को पूजने का। जिस घर में मां बहन व बेटीयों का सम्मान होता है वहां नारायण का वास होता और मां लक्ष्मी की सम्पूर्ण कृप्या बरसती है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/पंकज
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