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सीपीसीबी की जांच में यमुना प्रदूषित मिली

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 11 2019 7:58PM
सीपीसीबी की जांच में यमुना प्रदूषित मिली
-एचपीएसबी को सीपीसीबी के कडे निर्देश-प्रदूषण फैलने वाले उद्यमों पर कडी कार्रवाई के निर्देश -सीपीसीबी का 170 फैक्टरियों को नोटिस, एचपीएसबी को 50 कारखानों को बंद करने के निर्देश पानीपत, 11 अप्रैल (हि.स.)। यमुना पोल्यूशन मॉनीटरिंग कमेटी ने लगातार प्रदूषित हो रही यमुना नदी पर चिंता व्यक्त करते हुए यमुना नदी में बह रहे पानी को प्रदूषित करने वाली फैक्टरियों को तत्काल बंद करने के निर्देश दिए है। कमेटी ने ये निर्देश केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए हैं। सीपीसीबी ने दिसंबर में की यमुना के पानी की जांच के बाद पाया है कि यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत में सरकारी मानकों के खिलाफ चल रही फैक्टरियां अपना प्रदूषित पानी को बिना ट्रीटमेंट किए बिना ड्रेन में छोड़ रही है और ड्रेनों का पानी, यमुना नदी में छोडा जा रहा है। इसके चलते यमुना नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है। वहीं यमुना नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सीपीसीबी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसबी) को प्रदूषण फैला रही फैक्टरियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए है। वहीं एचपीएसबी की प्रदूषण फैला रही फैक्टरियों के प्रति लचर रवैये से सीपीसीबी नाराज है। सीपीसीबी ने मार्च से लेकर अभी तक पानीपत की 70 फैक्टरियों से पानी के सैंपल भरे है। जबकि सीपीसीबी ने गत वर्ष पानीपत के 170 उद्योगों को प्रदूषण फैलाने पर क्लोजर नोटिस सेक्शन 5 एन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत जारी किया था। जबकि लगभग 50 उद्योगों को प्रदूषण के लिए घातक पाते हुए इन्हें बंद करने के निर्देश दिए थे। जबकि एचपीएसबी ने सिर्फ 12 फैक्टरियों को बंद किया और शेष के प्रति कार्रवाई को चुप्पी साध ली। गौरतलब है कि पानीपत सिटी व ग्रामीण अंचल में करीब दो हजार फैक्टरियां अवैध है और इनमें से प्रदूषित पानी निकलता है, इस पानी को ड्रेन में छोडा जाता है और ड्रेन में यह पानी बह कर यमुना नदी में मिल जात है। वहीं हरियाणा में प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन किया गया है। लेकिन राय बोर्ड प्रदूषिण फैल रही फैक्टरियों पर कार्रवाई नहीं करता। इधर, जांच में पता चला है कि पानीपत के विभिन्न क्षेत्रों में 300 डाइंग हाउस ऐसे है जो अवैध तरीके से चल रहे और प्रदूषिण बढ रहे है। जांच में यह भी पता चला है कि सनौली व बापौली क्षेत्र में 600 से अधिक फैक्टरियां है और इनमें से अधिकतर प्रदूषण फैला रही है और इन फैक्टरियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी को टैंकरों में लाद कर यमुना नदी में छोडा जाता है। वहीं हुडा के औद्योगिक सेक्टर 29 में 21 एमएलडी पानी की क्षमता का सीटीपी प्लांट है। जबकि पानीपत के उद्योगों से हर रोज 42 एमएलडी प्रदूशित पानी निकलता है। इस कारण 21 एमएलडी पानी सड़कों पर बहता है जो नालियो के जरिये ड्रेन में जाकर गिरता है। इस कारण भी यमुना प्रदूषित हो रही है। सरकार ने 42 एमएलडी क्षमता का दूसरा सीटीपी प्लांट बनाया है पर अभी तक यह प्लांट चालू नहीं हुआ। दूसरी ओर, पानीपत डायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भीम सिंह राणा ने कहा कि एसोसिएशन की हमेशा यह मांग रही है कि अवैध रूप से चल रहे डाई हाउसों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं सरकार को भी सीटीपी प्लांट जल्द चालू करना चाहिए, ताकि पानी का ट्रीटमेंट हो और प्रदूषण न फैले। इधर, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भूपेंद्र चहल ने बताया कि सीपीसीबी ने क्या आदेश दिए है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है, सीपीसीबी के आदेशों का पालन किया जाएगा। हिन्दुस्थान समाचार/विकास/पंकज
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