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लोकसभा चुनाव : प्रदेश में किसी भी दल की हो सरकार, किसानों की नहीं ली जाती कोई सुध

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 10 2019 6:24PM
लोकसभा चुनाव : प्रदेश में किसी भी दल की हो सरकार, किसानों की नहीं ली जाती कोई सुध
फसल को बेचने के लिए धक्के खाने को मजबूर किसान, सरसों की खरीद शुरू न होने से पड़ा किसानों पर आर्थिक बोझ मंडी में अपनी फसल की सुरक्षा खुद करने से परेशान किसान, किसान व आढ़तियों ने सरकार के खिलाफ की नारेबाजी रोहतक, 10 अप्रैल (हि.स.)। सत्ता में आने से पहले हर राजनीतिक दल के नेताओ द्वारा किसानों के उत्थान के लिए बड़े-बडे़ दावे किये जाते है, लेकिन जैसे ही सता पर काबिज होते है, अपने किए वायदों को भूल जाते है। आज धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। प्रदेश सरकार द्वारा फसल खरीद पर लगाई गई तरह तरह की शर्तों से किसानो व आढ़तियों में भारी रोष है, जहां एक तरफ किसान कड़ी मेहनत कर फैसल पैदा करता है और जब वह समय पर बिक नहीं पाती तो इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसान पर क्या बीतती होगी। बुधवार को मकड़ोली गांव के किसान राम दहिया, राजेदंर सिंह, कबूलपुर के रविंद्र कुमार व राकेश ने बताया कि आज सरकार ने सरसों खरीद करने से इंकार कर दिया। आढ़तियों ने भी सरसों की खरीद नहीं की जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी। सरकार के अडि़यल रवैये के चलते किसान काफी परेशान है। इतना ही नहीं किसानों का आरोप है अनाज मंडी में किसानों के लिए कोई मूलभूत सुविधाएं नहीं है। सरकार व प्रशासन के सभी दावे झूठे साबित हो रहे है। मंडी में किसानों को स्वयं अपनी फसलों की रखवाली करनी पड़ती है। जब इस बारे में सरकारी कर्मचारियों से बात की जाती है तो उन्हें एक ही जबाव दिया जाता है कि अपनी फसल को वापिस ले जा सकते हो। किसानो का कहना है कि सरसों को लाने में प्रति ट्रैक्टर आने जाने तक तीन हजार रूपये अतिरिक्त व्यय करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें आर्थिक बोझ का भी सामना करना पड़ रहा है। साथ ही किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी कर्मचारी नमी का बहाना बनाकर सरसों को खरीद करने से आना कानी कर रहे है। इतना ही नही फसल बेचने से पूर्व उन्हें ऑनलाइन अप्लाई करना पड़ता है औऱ टॉेकन लेना पड़ता है। इसके बाद आधार कार्ड, फर्द की फोटोस्टेट कापी, बैंक खाता की डिटेल व अन्य कागज भी जमा कराने पड़ते है। तब कही जाकर उनको अपनी फसल बेचने की मंजूरी मिलती है। किसानों का आरोप है कि अगर किसी किसान को रात के समय अनाज मंडी में रूकना पड़ जाए तो सरकार की तरफ से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। भारतीय किसान सभा के जिला सचिव सतीश कुमार ने बताया कि सरकार किसानों को सुविधा मुहैया कराने का राग तो अलापती है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें कोई सुविधा मुहैय्या नहीं कराई जाती है। सरकार द्वारा निर्देशों के तहत एक सप्ताह में केवल 25 क्विंटल ही सरसों एक किसान बेच सकता है, यदि उसका उत्पादन अधिक हुआ तो उसे दूसरे सप्ताह में अपनी फसल बेचनी पडे़गी। ई-ट्रेडिंग व ऑनलाइन पेमेंट के विरोध में आढ़तियों ने की हड़ताल जिले के आढ़तियों ने ई-ट्रेडिंग व ऑनलाईन पेमेंट के विरोध में अपनी दुकानें बंद करने अश्चिितकालीन हड़ताल शुरू कर दी और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आढ़ती एसोसिएशन रोहतक प्रधान डिम्पल बधवार ने बताया कि सरकार उनके काम को खत्म करने पर तुली हुई है। पहले उन्हें ढाई प्रतिशत कमीशन मिलता था, जो घटा कर एक प्रतिशत कर दिया गया है। ऑनलाइन पेमेंट के बारे में तो उन्हें जानकारी ही नही है। जिसकी वजह से उन्हें दिक्कत हो रही है। इसलिए जब तक इस फैंसले को वापस नही लिया जाएगा, तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। वहीं इस हड़ताल से किसानों को भी परेशानी हो रही है और वे अपनी सरसों की फसल लेकर मंडी में पहुंचे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नही हो रही है। किसानो का कहना है कि पहले ही सरकार ने फसल बेचने पर अनाप शनाप शर्ते लागू की है और अब आढ़ती भी हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/वेदपाल
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