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बादली में गुभाना-माजरी के खेतों से गुजर रही माईनर टूटी

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 9 2019 6:22PM
बादली में गुभाना-माजरी के खेतों से गुजर रही माईनर टूटी
: माईनर टूटने से क्षेत्र की 40 दर्जन जमीन हुई जलमग्र : खेत जलमग्र होने से गेहूं की फसल बर्बाद होने के कगार पर झज्जर,09 अप्रैल (हि.स.)। झज्जर जिले के बादली सब-डिविजन के गांव गुभाना और माजरी गांव के खेतों से गुजर रही जीडब्ल्यूएस माइनर टूट गई। माइनर के टूटने से आसपास की 40 बीघा जमीन में जलभराव हो गया। सूचना मिलते ही विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को माईनर बांटने में लगाया। मंगलवार सुबह तक कर्मचारियों ने माइनर को जोडऩे का काम किया। माइनर सोमवार रात्रि बूपनियां-गुभाना-माजरी के खेतों में टूटी और मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तक माइनर को जोडऩे में कर्मचारियों ने सफलता हासिल की। गनीमत यह रही कि माइनर सिंचाई नहर में टूटी जिससे पानी खेतों की बजाय नहर में ज्यादा बहने लगा। किसानों ने माइनर टूटने की सूचना विभाग अधिकारियों को दी। अल सुबह ही कर्मचारी माइनर पर पहुंचे और बांधने का काम पूरा किया। कट्टों में मिट्टी भरकर माइनर को जोड़ा गया। इसके अतिरिक्त माइनर के पानी को भी बंद करवाया गया जबकि कुछ पानी को दुल्हेड़ा माइनर में छोड़ा गया ताकि मिट्टी भरने में कर्मचारियों को परेशानी न हो सके। किसानों के अनुसार पानी का बहाव पहले तो धीरे-धीरे हुआ और बाद में कटाव ज्यादा बढ़ गया। मिट्टी कटाव बढऩे के बाद माइनर का शत प्रतिशत पानी खेतों और सिंचाई नहर में बहने लगा। किसानों के लिए राहत की बात यह रही कि पानी का भा बहाव खाली पड़ी सिंचाई नहर में हो गया। हालांकि पानी ज्यादा होने के चलते खेतों में भी बहने लगा और करीब 40 बीघा गेहूं की फसल में पानी भर गया। गेहूं की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई। रात भर माइनर का पानी खेतों में जाने से चारों ओर लबालब पानी भर गया। खेतों में लबालब पानी होने से गेहूं की फसल नष्ट होने के कगार पर है क्योंकि अब कटाई का समय चल रहा है और ऐसे में फसल में पानी भरना नुकसानदायक है। कई जगह है दरार: क्षेत्र से गुजरने वाली जीडब्ल्यूएस माइनर से गुरूग्राम में पेयजल सप्लाई होता है। माइनर की पिछले लंबे समय से सफाई नहीं हुई है। जगह-जगह दरारें हंै जबकि प्रतिदिन 135 क्यूसेक पानी की सप्लाई गुडग़ांव में होती है। ऐसे में पानी का बहाव ज्यादा रहता है और टूट कर किसानों के लिए आफत बन जाती है। कई जगह से माइनर कमजोर हो गई। पानी का दबाव होते ही माइनर दरार के पास से टूट जाती है। किसान कर्मबीर, सुरेन्द्र, मातू और रामकुमार का कहना है कि 15 दिन पूर्व ही गेहूं की सिंचाई गई थी। पानी की कहीं निकासी न होने से गेहूं तो खत्म हो जाएगा। किसानों का कहना है कि विभाग को चाहिए कि वह खेतों में भरे पानी निकासी का प्रबंध भी करवाएं। ग्रामीणों ने अधिकारियों को चेताया था कि नहर कमजोर नहीं होनी चाहिए। इसके बाद भी नहर को कमजोर छोड़ दिया गया। यह बोले कर्मचारी: विभाग द्वारा पिछले दिनों माइनर की मरम्मत कराई गई। पानी बहाव होने से सिचांई नहर के पास माइनर कुछ कमजोर रह गई। इसे पानी बंद होने के बाद ठीक करा दिया जाएगा। फिलहाल टूटी नहर को बांध दिया गया है। किसानों की मांग को देखते हुए माइनर की मरम्मत भी करवाई जाएगी जबकि कुछ जगह पर मिट्टी डालने का काम किया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/ प्रथम/वेदपाल
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