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सलपानी कलां में रहस्यमय बीमारी से सैकड़ों लोग पीडि़त

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 6:40PM
सलपानी कलां में रहस्यमय बीमारी से सैकड़ों लोग पीडि़त
बीमारी के फैलने से ग्रामीणों में दहशत, स्वास्थ्य विभाग बीमारी से अनभिज्ञ पिछले एक साल से लोग सरकारी अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों में करवा चुके हैं उपचार कुरुक्षेत्र, 08 अप्रैल (हि.स.)। जनपद के गांव सलपानी कलां के सैकड़ों लोग तकरीबन पिछले एक वर्ष से रहस्यमय बीमारी से पीडि़त हैं। गांव के प्रत्येक परिवार के दो या तीन सदस्य बीमारी से पीडि़त हैं। छोटे बच्चों से लेकर महिलाएं तक बीमारी से पीडि़त हैं। इतना ही नहीं कुत्तों में भी यह बीमारी तेजी से फैल रही है। ग्रामीण बीमारी का इलाज करवाकर थक चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी आज तक लोगों को बीमारी से राहत नहीं मिल पाई है। अब तो लोगों का सब्र जवाब दे गया है। लोगों ने सबकुछ रामभरोसे छोड़ दिया है। पीडि़त लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि आखिरकार रहस्यमय बीमारी कहां से आई। स्वास्थ्य विभाग भी लाख कोशिश करने के बाद ना तो बीमारी पर रोक लगा पाया है और ना ही बीमारी पनपने का सुराग लगा पाया है। गांव में ऐसे हालात पैदा हो गए हैं हर कोई इस रहस्यमय बीमारी से डरा हुआ है। सोमवार को ग्रामीण मनोज कुमार, राजकुमार, राकेश, सोना राम, संजीव, नवनीत, गुरलाल, रविंद्र, महेंद्र सिंह, करनैल, गुरदेव व प्रवीण ने बताया कि पिछले एक साल से गांव के सैकड़ों लोग रहस्यमय बीमारी से पीडि़त हैं। उनका कहना है कि शुरूआती दौर में बीमारी से लोगों को एलर्जी होती है। धीरे धीरे यह एलर्जी सारे शरीर पर फैल जाती है। कुछ महीनों के अंतराल के बाद एलर्जी उपचार के बावजूद गंभीर अवस्था में चली जाती है। उनका कहना है कि उन्होंने इसका इलाज सीएचसी धुराला के अलावा झांसा सीएचसी से भी इलाज करवा चुके हैं, लेकिन जब यहां उपचार के बाद भी कोई आराम नहीं मिला तो लोगों ने एलएनजेपी अस्पताल व श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय एवं अस्पताल से भी इलाज करवाया है, लेकिन हर जगह बीमारी का कोई स्थायी उपचार नहीं हो पाया है। उपचार के बावजूद बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। उनका कहना है कि इस बीमारी से छोटे बच्चे से लेकर महिलाएं तक चपेट में आ चुकी हैं। महिलाएं शुरूआती दिनों में इस बीमारी को बताने में शर्म महसूस करती हैं, लेकिन जब बीमारी सीमा पार कर जाती है, तब महिलाओं को इस बीमारी के बारे में परिवार के लोगों को बताने पर मजबूर होना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी के चलते शरीर पर पहले एलर्जी के साथ खुजली होती है। खुजली के बाद धीरे धीरे शरीर पर बड़े बड़े दाग बन जाते हैं। इतना ही नहीं यह बीमारी ज्यादातर गुप्त स्थानों पर फैल रही है। ग्रामीणों ने बताया कि कई पीडि़तों ने इस बीमारी का इलाज निजी अस्पतालों में भी करवाया है, लेकिन वहां से भी कोई आराम नहीं मिला। मनोज कुमार के साथ साथ अन्य ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि तकरीबन एक साल से इस बीमारी से गांव में हड़कंप मचा हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। उनका कहना है कि हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों व चिकित्सकों इस बीमारी के बारे में पता है, लेकिन उसके बावजूद भी आज तक स्वास्थ्य विभाग ने गांव में पहुंचकर यह पता लगाने की कोशिश नहीं की कि आखिर यह बीमारी किन कारणों से पनप रही है। मनोज कुमार ने आशंका प्रकट की कि लगता है कि पीने के पानी में कीटाणुओं के चलते यह बीमारी फैल रही हो, लेकिन इसका पता लगाना प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग का काम है। लोग रहस्यमय बीमारी से पीडि़त होने के चलते सहमे हुए हैं। लोगों का धैर्य अब जवाब देने लग गया है कि आखिर वे कब तक इस बीमारी से पीडि़त रहेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/बाबूराम/वेदपाल
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