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श्रद्धा भाव के साथ किया गणगौर का विसर्जन

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 6:04PM
श्रद्धा भाव के साथ किया गणगौर का विसर्जन
नारनौल, 8 अप्रैल (हि.स.)। लगातार 16 दिनों तक चलने वाला गणगौर उत्सव सोमवार को गणगौर विसर्जन के साथ सम्पन्न हो गया। गणगौर का पर्व चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है, इसे गौरी तृतीया भी कहते है। होली के दूसरे दिन से अविवाहित, विवाहित व नवविवाहित महिलाएं प्रतिदिन गणगौर पूजती हैं और चैत्र शुक्ल द्वितीया के दिन कुएं, नदी व तालाबों पर जाकर अपनी पूजी हुई गणगौरों को पानी पिलाती है। इसके बाद दूसरे दिन शाम को इसका विसर्जन किया जाता है तथा इस दिन महिलाएं गणगौर का व्रत भी रखती है। माना जाता है कि गणगौर व्रत को करने से कुंवारी लड़कियों को उत्तम पति मिलता है और सुहागिनों का सुहाग अखंड रहता है। इसी को लेकर शहर व आसपास के क्षेत्र में आज गणगौर पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। फाल्गुन मास से गणगौर पूजन का कार्यक्रम लगातार पन्द्रह दिन चलने के पश्चात महिलाओं ने आज सोलहवें दिन ईस्सर को मिठाई, पकवान आदि खिलाकर व पानी पिलाकर बड़े धूमधाम से विसर्जन किया। शहर में युवतियों व महिलाओं के समूहों ने कुओं पर जाकर गणगौर का गाजे-बाजे के साथ विसर्जन किया। यह त्यौहार राजस्थान में विशेष रूप से मनाया जाता है। इसलिए राजस्थान की सीमा से लगते नारनौल व आसपास के क्षेत्र में भी गणगौर पूजा का प्रचलन है। नई नवेली सुहागिनें इस त्यौहार को कुंवारी लड़कियों व महिलाओं के साथ अपने पीहर में मनाती है, वहीं महिलाओं व युवतियों का समूह सौलह दिनों तक गणगौर को तरह-तरह के पकवान बनाकर भोग लगाती है तथा नाच-गाकर खुशियां मनाती है। गणगौर व ईस्सर को पार्वती और भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। महिलाओं के समूहों ने सोमवार सुबह ईस्सर व गणगौर की पूजा करने के पश्चात सायं के समय कुओं व तालाबों पर जाकर गणगौर का विसर्जन किया। इसके पश्चात एक-दुसरे को गुलाल लगाकर खुशियां मनाई। हिन्दुस्थान समाचार/श्याम/वेदपाल
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