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भारत को पुन: विश्व गुरु के रुप में स्थापित करने के लिए सभी की भागीदारी जरूरी : प्रेमचंद

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 8 2019 3:26PM
भारत को पुन: विश्व गुरु के रुप में स्थापित करने के लिए सभी की भागीदारी जरूरी : प्रेमचंद
वरिष्ठ संघ प्रचारक ने फ्लैट धारकों को दी उनके फ्लैट की चाबियां फरीदाबाद, 08 अप्रैल (हि.स.)। वरिष्ठ संघ प्रचारक प्रेमचंद गोयल ने कहा है कि भारत को पुन: विश्व गुरू के रूप में स्थापित करने के लिये सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी स्वप्र को साकार करने में जुटे हुए है। उन्होंने शहर के समाजसेवी नरेंद्र अग्रवाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सभी को आवास के सपने को साकार रूप देने का जो सफल प्रयास किया है वह एक अनुकरणीय उदाहरण है जिससे अन्य वर्गों को भी अपनाना चाहिए। उक्त वक्तव्य प्रेमचंद गोयल ने सोमवार को ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-70 में प्रसिद्ध उद्योगपति एवं शिवालिक प्रिंट्स के चेयरमैन नरेंद्र अग्रवाल द्वारा आगमन सोसायटी के रूप में एर्फोडेबिल हाउस के फ्लैट धारकों को उनके फ्लैटों की चाबियां प्रदान करते हुए व्यक्त किए। गोयल ने कहा कि भामाशाह की प्रवृत्ति हमारे समाज का हिस्सा रही है। नरेंद्र अग्रवाल धन कमाने के लिये नहीं बल्कि लोगों को अधिक से अधिक घर देने के लिये इस क्षेत्र में आए हैं और अपना घर, अपना ही होता है यह बात वही समझ सकता है जिसके सिर पर अपनी छत नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सबकुछ ठीक रहा तो अगले पांच वर्षों में सभी के सिर पर छत होगी और कोई भूखा नहीं सोएगा। इस अवसर पर गोयल ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1835 से पहले भारत में सभी के सिर पर छत थी, कोई भूखा नहीं सोता था और यह बात लार्ड मकैले ने पार्लियामैंट में कही थी। उन्होंने कहा कि तब भारत को विश्व गुरू तथा सोने की चिडिय़ा कहा जाता था। भारतीय संस्कारों का वर्णन करते वरिष्ठ संघ प्रचारक गोयल ने कहा कि भारतवासी पशुओं और पक्षियों के लिये भी खाने का प्रबंध करते हैं।पिछले चार वर्ष में परिवर्तन का जो दौर शुरू हुआ वह भारत को पुन: विश्वगुरू के रूप में स्थापित करेगा। सभी के सिर पर अपनी छत होगी और हम विश्व सिरमौर के रूप मेें पहचान बनाएंगे। गोयल ने कहा कि देश में निर्धन वर्ग की मदद करने वाले बहुत हैं बशर्ते उसे उचित ढंग से रखा जाए और समझा जाए। उन्होंने उदाहरण देते कहा कि 2004 में जब वे छत्तीसगढ़ गये तो उन्हें वहां एक आदिवासी परिवार से मिलने का मौका मिला। उन्हें पता लगा कि इस परिवार की पांच बहनों के पास पहनने के लिये महज एक ही साड़ी थी। गोयल ने बताया कि जब उन्होंने दिल्ली आकर यह बात बताई तो 15 दिन में एक लाख 47 हजार साडिय़ां छत्तीसगढ़ भेज दी गई। इससे पूर्व नरेंद्र अग्रवाल ने आगमन सोसायटी प्रोजैक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि 112 फ्लैट्स के चार टॉवरों का कार्य पूरा हो चुका है जिसकी चाबियां फ्लैट धारकों को दे दी गई हैं। उन्होंने बताया कि दो टॉवर्स अभी ओर रह रहे हैं जिसकी चाबियां तीन माह में सौंप दी जाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/मनोज/वेदपाल
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