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शतरंज मस्तिष्क का ही नहींअपितु तीव्र निर्णय लेने की क्षमता का भी करता है विकास: डॉ. बीरसिंह

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 7 2019 6:54PM
शतरंज मस्तिष्क का ही नहींअपितु तीव्र निर्णय लेने की क्षमता का भी करता है विकास: डॉ. बीरसिंह
नारनौल, 7 अप्रैल (हि.स.)। श्रीकृष्णा स्कूल महेन्द्रगढ़ में युवा शतरंज एसोसिएशन महेन्द्रगढ़ द्वारा दो दिवसीय जिला स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता का समापन किया गया। जिसमें स्कूल के चेयरमैन डॉ. बीरसिंह यादव, उपप्रधान श्रीभगवान व सैकेटरी राजकुमार परिहार मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस मौके पर जानकारी देते हुए एसोसिएशन के उप प्रधान श्रीभगवान ने बताया कि जिला शतरंज प्रतियोगिता में 13 व 19 आयुवर्ग के लड़के व लड़कियां ने भाग लिया तथा उनके पांच राउण्ड करवाए गए। जिसमें विजेता खिलाडिय़ों को मैंडल, सर्टिफिकेट व नगदी राशी देकर सम्मानित भी किया गया। दूसरे दिन के ये रहे शतरंज के परिणाम: टूर्नामेंट के चीफ आरबीटर अक्षय कुमार ने बताया कि अन्डर-19 आयुवर्ग में साहिल तंवर प्रथम, अंकित द्वितीय व सुमित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं अन्डर-13 आयु वर्ग हर्ष प्रथम, कार्तिक द्वितीय व नितीन कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। चेयरमैन डॉ. बीरसिंह यादव ने खिलाडिय़ों को संबोधित करते हुए कहा कि संसार की सबसे खतरनाक रचना है मनुष्य का मष्तिस्क। जिसनें मष्तिस्क रूपी संरचना को अपना बना लिया वो जिंदगी में कभी परास्त नहीं हो सकता। शतरंज का खेल भी दिमाग का खेल है। इसमें जो जीतता वो ही सिकन्दर होता है। शतरंज मस्तिष्क का ही नहीं अपितु तीव्र निर्णय लेने की क्षमता का विकास रखता है। हिन्दुस्थान समाचार/श्याम/वेदपाल
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