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तहसीलदार सांपला को कारण बताओ नोटिस

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 7 2019 4:17PM
तहसीलदार सांपला को कारण बताओ नोटिस
जींद, 7 अप्रैल (हि.स.)। गांव खरैंटी निवासी सूरजमल नैन ने तहसीलदार सांपला के कार्यालय में आरटीआई एक्ट 2005 के तहत आवेदन करके वर्ष 2012-13 में खराब हुई फसल का वर्ष 2014 में तहसीलदार सांपला द्वारा मुआवजा बांटने संबंधित चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी लेकिन सूचना नहीं मिली। इसके बाद प्रथम अपील और द्वितीय अपील भेजी गई। द्वितीय अपील का निपटारा सूचना आयोग ने 13 मार्च 2019 को किया था तथा 20 दिनों के अंदर मांगी गई पूर्ण सूचना आवेदक को उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे। सूचना देने में देरी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर 17 जून तक लिखित में कारण बताने के निर्देश दिए हैं और इस कारण बताओ नोटिस की सुनवाई 19 जुलाई को सुबह 10:30 बजे होनी है लेकिन राज्य जनसूचना अधिकारी तहसीलदार संपला (रोहतक) ने आयोग के फैसले के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं करवाई है। जिस कारण से अब आवेदक ने सूचना आयोग के पास रिजोइंडर भेज कर जुर्माना लगाने की मांग की है और सभी चार बिंदुओं पर सूचना दिलवाने का निवेदन किया है। यह है मामला 24 अगस्त 2018 को जुलाना के तहसीलदार शिव कुमार सैनी ने वर्ष 2014 में उनके द्वारा संपला तहसील में वर्ष 2012-13 की खराब फसल का मुआवजा बांटा गया था। उस समय वह संपला में नोडल अधिकारी था और उनके पर्सनल खाते में मुआवजा बांटने के लिए पांच करोड़ 44 लाख 77 हजार रुपये आए थे। जिसमें से मुआवजा बांटने के बाद उनके खाते में 32 लाख 77 हजार रुपये शेष बच गए थे। इसके बारे में उन्हें वर्ष अगस्त 2018 में पता चला था और उन्होंने ईमानदारी का परिचय देते हुए यह राशि वापस लौटने के लिए हरियाणा सरकार को पत्र लिखा था। आरटीआई कार्यकर्ता सूरजमल नैन को जब यह पता चला तो पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए आवेदन किया। क्योंकि मुआवजा बांटने की राशि किसी भी अधिकारी के पर्सनल खाते में नहीं आ सकती है और मुआवजा राशी बांटने के बाद सारा हिसाब-किताब सरकार को देना होता है। ऐसे में चार वर्षों तक मुआवजा बांटने की शेष राशि तहसीलदार शिव कुमार सैनी के पर्सनल खाते में कैसे पड़ी रही। हिन्दुस्थान समाचार/विजेंद्र/वेदपाल
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