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बंपर फसल बनी किसान का सिरदर्द

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 6 2019 9:23PM
बंपर फसल बनी किसान का सिरदर्द
सरसों को बेचने के लिए चक्कर लगाता धरतीपुत्र प्रशासन एक एकड़ की मात्र साढ़े छह क्विंटल की खरीद कर रहा है एक किसान 25 क्विंटल से ज्यादा सरसों नहीं बेच पा रहा झज्जर,06 अप्रैल (हि.स.) । सरसों की खरीद को लेकर किसान परेशान हैं। जिला प्रशासन के तय नियमानुसार अपनी सरसों बेच चुके सैंकड़ों किसानों की बची फसल को खरीदने के लिए आज शनिवार का दिन मार्केट कमेटी द्वारा तय किया गया था। लेकिन आज भी किसानों को मायूसी ही मिली। किसानों का आरोप है की वे भूखे प्यासे आज सुबह ही यहां पहुंचे थे लेकिन मार्केट कमेटी अपना पल्ला झाड़ कर हैफेड पर मामला डाल रही है और हैफेड मार्केट कमेटी को कसूरवार ठहराता है। बहरहाल सरसों को बेचना किसानों के लिए बड़ी आफत बन चुका है। आपको बता दें कि जिला प्रशासन ने किसानों की सरसों खरीदने के लिए नियम बनाए थे। नियमानुसार एक एक? की साढ़े छह क्विंटल व कुल एक किसान की 25 क्विंटल सरसों ही सरकार द्वारा खरीदी जानी थी। इसके लिए भी अलग अलग इलाके के लिए दिन तय किए गए थे। किसानों ने अपने तय दिन अनुसार एक एकड़ के हिसाब से साढ़े छह क्विंटल और ज्यादा से ज्यादा 25 क्विंटल सरसों बेच दी और किसान की बाकी सरसों के लिए आज शनिवार का दिन तय किया गया। बाकी बची फसल को लेकर आज बड़ी संख्या में किसान मंडी मे आए मगर उनकी खरीद नहीं हो पाई। किसानों का कहना है की अगर प्रशासन ने परेशानी दूर नहीं की तो वह सड़कों पर उतर जाएंगे। लाडपुर निवासी देविंद्र आज अपनी बाकी बची सरसों को लेकर मंडी में आया था। वे बताते हैं की उनकी बाकी बची सरसों की खरीद के लिए उसे आज बुलाया गया था। लेकिन यहां कोई सुनवाई नहीं हो रही। अधिकारी एक दूसरे पर बात टाल रहे हैं। कोका गांव निवासी सतबीर बताते हैं की वह अपनी बाकी बची सरसों को लेकर दो बार आ चुका है। सरकार प्रति एकड़ साढ़े छह क्विंटल ही खरीद रही है। इस बार फसल अच्छी हुई है। ऐसे में वे बाकी सरसों को लेकर कहां जाएं। गांव खेड़ी आसरा के विरेंद्र बताते हैं की आज उन्हें बुलाया गया था। सुबह बिना कुछ खाए वे यहां आए थे मगर दोपहर बाद तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। किसानों का कहना है की किसानों के गेट पास कटने में धांधली हो रही है। सरकार के निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्या कहते हैं सचिव इस बारे में मार्केट कमेटी के सचिव विजय से बात की गई तो उन्होंने बताया की डीसी के आदेशानुसार वे काम कर रहे हैं। उन्हें आदेश हैं की रोस्टर के अनुसार खरीद की जाए। बकौल विजय आज एजेंसी उन किसानों की खरीद कर रही है जो एक बार भी सरसों नहीं बेच पाए हैं। जिन किसानों की सरसों बची है वे अपनी सरसों प्रचेज एजेंसी को बेच सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/ प्रथम/वेदपाल
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