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गायब हो गई राहल गांधी पर बनी फिल्म

By HindusthanSamachar | Publish Date: Apr 13 2019 8:40PM
गायब हो गई राहल गांधी पर बनी फिल्म
मुंबई, 13 अप्रैल (हि स)। इन दिनों रिलीज के संकट में फंसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म का भविष्य अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगा, जहां सोमवार को इस फिल्म पर चुनाव आयोग द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती दी गई है। वहीं दो महीने पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर फिल्म की चर्चा तेज होने लगी थी। माई नेम इज रा गा नाम से बनी इस फिल्म का दो मिनट का टीजर लांच किया गया था और दावा किया गया था कि एक महीने के अंदर फिल्म रिलीज हो जाएगी। अब, जबकि मोदी की फिल्म पर लगी चुनाव आयोग की रोक ने सभी बायोपिक फिल्मों की रिलीज पर रोक लगा दी है, तो ऐसे में राहुल गांधी पर बनी फिल्म के रिलीज होने की संभावना शून्य है, लेकिन इस फिल्म को लेकर सबसे दिलचस्प बात ये रही कि फरवरी में इस फिल्म को लेकर शोरगुल हुआ और मार्च के बाद जैसे जैसे चुनावों की सरगर्मियां तेज होने लगीं, तो ये फिल्म कहीं गुमनामी में खोती चली गई और अब आलम ये है कि किसी को इस फिल्म की याद तक नहीं। इस फिल्म के निर्देशक रुपेश पाल उस वक्त दावे कर रहे थे कि ये एक ऐसे युवक के बारे में है, जो एक राजनैतिक परिवार में जन्मा है और न चाहते हुए परिस्थितियां उसे इसी क्षेत्र में धकेल देती हैं और विषम परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए वो देश की सियासत में सफलता के साथ चमकता है। रुपेश पाल ने खुद को कांग्रेसी समर्थक नहीं माना, बल्कि वे कहते रहे कि साधारण नागरिक के तौर पर उन्होंने ये फिल्म बनाई है। बाद में पता चला कि उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस का समर्थक रहा है। रुपेश पाल तो कहीं गायब हो चुके हैं, लेकिन उनके एक दोस्त ने बताया कि इस फिल्म को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं से संपर्क किया गया और रिलीज करने के लिए मदद मांगी गई, लेकिन कांग्रेस का कोई नेता मदद के लिए आगे नहीं आया। ये दोस्त, खुद इस फिल्म का हिस्सा रहा है और कहता है कि फिल्म का बजट बहुत ज्यादा नहीं था, लेकिन ये फिल्म कर्जा लेकर बनी थी और रुपेश चाहता था कि कांग्रेस पार्टी फिल्म की लागत का खर्चा दे दे। कांग्रेसी नेताओं की बेरुखी ने रुपेश को निराश कर दिया। ये दोस्त कांग्रेस के उन नेताओं के नाम नहीं बताता, जिनसे फिल्म को लेकर संपर्क किया गया। ये दोस्त दिलचस्प बात कहता है कि एक भाजपा के नेता चाहते थे कि कहानी में थोड़ा बदलाव किया जाए, वो मदद कर सकते हैं। भाजपा के वे नेता चाहते थे कि फिल्म में राहुल की पप्पू छवि को प्रमुखता दी जाए, लेकिन वक्त कम था और फिर से शूटिंग तथा संपादन करना संभव नहीं था। ये दोस्त भाजपा के उस नेता का नाम भी नहीं बताते। मुंबई कांग्रेस के एक नेता से जिक्र हुआ, तो उनका कहना था कि पार्टी का ऐसी किसी फिल्म से कोई मतलब नहीं है। बालीवुड के एक विश्लेषक ने इस फिल्म को लेकर एक और दिलचस्प बात बताई। सेंसर बोर्ड ने अब ये कानून बना दिया गया है कि अगर आपकी फिल्म में कोई राजनैतिक किरदार है, तो उस नेता अथवा उसके परिवार से अनुमति लेना जरुरी हो गया है। ये कानून रुपेश के गले की फांस बन गया, क्योंकि राहुल गांधी तक पंहुचने का उनके पास कोई रास्ता नहीं था और ये भी लगभग नामुमकिन था कि राहुल गांधी अपने ऊपर बनी इस फिल्म को अनुमति दे देते, इसलिए ये फिल्म तेजी से गुमनामी में खोती चली गई। pan lang="HI" style="font-size:20.0pt; font-family:"Mangal","serif";mso-fareast-font-family:"Times New Roman"; color:black">हिन्दुस्थान समाचार/अनुज
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